
New Delhi, 11 फरवरी . Prime Minister Narendra Modi ने Wednesday को कहा कि कार्बन कैप्चर तकनीक India में स्टील सेक्टर की नई क्रांति की ताकत बन सकती है.
Prime Minister मोदी ने बताया कि India का लक्ष्य 2070 तक ‘नेट जीरो’ हासिल करना है और इसके लिए Government रणनीतिक निवेश और ग्रीन हाइड्रोजन जैसी योजनाओं पर काम कर रही है. इससे देश की आर्थिक वृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी और ‘विकसित भारत’ का सपना साकार होगा.
Prime Minister ने केंद्रीय इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के उस लेख का जिक्र किया, जिसमें कहा गया है कि India का लौह एवं इस्पात क्षेत्र एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है. India दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा इस्पात उत्पादक देश है. वित्त वर्ष 2024-25 में देश ने लगभग 152 मिलियन टन स्टील का उत्पादन किया. Government का लक्ष्य 2030-31 तक 300 मिलियन टन और 2047 तक 500 मिलियन टन उत्पादन क्षमता हासिल करना है.
मंत्री ने बताया कि स्टील बनाना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें बहुत अधिक ऊर्जा लगती है और इससे ज्यादा मात्रा में प्रदूषण भी होता है. India में अभी भी ज्यादातर स्टील कोयले की मदद से बनाया जाता है. इस कारण यह उद्योग देश के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में करीब 10 से 12 प्रतिशत का योगदान देता है.
इस चुनौती से निPatna न सिर्फ पर्यावरण के लिए जरूरी है, बल्कि वैश्विक बाजार में India की प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण है. मंत्री ने कहा कि Government ने स्वच्छ स्टील उत्पादन की दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं.
उन्होंने कहा कि ‘ग्रीन स्टील टैक्सोनॉमी’ की शुरुआत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिसमें कम प्रदूषण वाले स्टील के लिए खास मानक तय किए गए हैं. जिन स्टील उत्पादों में कम कार्बन उत्सर्जन होगा, उन्हें 3 से 5 स्टार रेटिंग देकर ‘ग्रीन स्टील’ माना जाएगा.
कुमारस्वामी ने इस बात पर भी जोर दिया कि नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत स्टील मंत्रालय को 455 करोड़ रुपए दिए गए हैं, ताकि स्टील उत्पादन में ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग शुरू किया जा सके. यह तकनीक भविष्य में स्टील बनाने के तरीके को बदल सकती है. ये सभी उपाय मिलकर इस बात को प्रमाणित करते हैं कि इस्पात को कार्बन मुक्त करना India की व्यापक जलवायु और औद्योगिक रणनीति का अभिन्न अंग है.
उन्होंने कहा कि कम कार्बन वाले स्टील उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उद्योग कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (सीसीयूएस) की दिशा में भी काम कर रहा है. इस साल के केंद्रीय बजट में पांच क्षेत्रों, जिनमें स्टील भी शामिल है, में कार्बन कैप्चर तकनीक के परीक्षण के लिए 20,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है.
कार्बन कैप्चर तकनीक के जरिए स्टील फैक्ट्रियों से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड गैस को वातावरण में जाने से पहले ही कैप्चर करके सीसीयूएस तकनीक प्रदूषण उत्सर्जन में काफी कमी ला सकती है, साथ ही पुरानी फैक्ट्रियां भी काम करती रह सकेंगी.
मंत्री ने कहा कि यह तकनीक India के लिए बहुत उपयोगी है, क्योंकि देश में कई स्टील प्लांट आने वाले कई दशकों तक चलते रहेंगे.
–
डीबीपी/