
अगरतला, 28 दिसंबर . उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा पर हुए क्रूर हमले और उसके बाद हुई मौत के विरोध में Sunday को अगरतला में विभिन्न युवा और छात्र संगठनों ने कैंडल मार्च का आयोजन किया.
अधिकारियों के अनुसार, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के एक constable के 24 वर्षीय पुत्र एंजेल चकमा ने 26 दिसंबर को देहरादून के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया. 9 दिसंबर को बदमाशों के हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे.
एंजेल चकमा के लिए न्याय की मांग करते हुए, टिपरा स्वदेशी छात्र संघ (टीआईएसएफ) और अन्य संगठनों द्वारा आयोजित कैंडल मार्च स्वामी विवेकानंद स्टेडियम से शुरू हुआ और शहर के कई हिस्सों से गुजरा. प्रतिभागियों ने केंद्र Government से देश के विभिन्न हिस्सों, विशेष रूप से उत्तर India में रहने वाले पूर्वोत्तर के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कानून बनाने का आग्रह किया.
टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) की युवा शाखा, यूथ टिपरा फेडरेशन (वाईटीएफ) के अध्यक्ष सूरज देबबर्मा ने कहा कि पूर्वोत्तर के कई युवाओं को पहले भी विभिन्न राज्यों में गंभीर हमलों और नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ा है, जो मजबूत सुरक्षा उपायों की तत्काल आवश्यकता को उजागर करता है.
इस घटना की मेघालय के Chief Minister कॉनराड के. संगमा और उनकी पार्टी नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) ने भी कड़ी निंदा की. अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर एक पोस्ट में संगमा ने इस घटना को दिल दहला देने वाला और अस्वीकार्य बताया और इस बात पर जोर दिया कि नस्लीय हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के लोग भी इस देश के हर नागरिक की तरह ही भारतीय हैं.
एनपीपी के कार्यकारी अध्यक्ष और मेघालय के पूर्व मंत्री जेम्स संगमा ने इस घटना को बेहद चौंकाने वाला बताया और इसे नस्लीय भेदभाव, नफरत फैलाने वाले भाषण और लक्षित हिंसा के खिलाफ मजबूत कानूनी, संस्थागत और सामाजिक उपायों की चेतावनी कहा. उन्होंने न्याय सुनिश्चित करने के लिए त्वरित और अनुकरणीय कार्रवाई की मांग की.
इस बीच, त्रिपुरा के Chief Minister माणिक साहा ने Saturday को उत्तराखंड के Chief Minister पुष्कर सिंह धामी से इस घटना के संबंध में बात की. Chief Minister धामी ने साहा को बताया कि पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और आगे की जांच जारी है.
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एमएस/डीकेपी