
कोलकाता, 21 दिसंबर . भाजपा नेता दिलीप घोष ने Sunday को कहा कि पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ी की जिम्मेदारी बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की है. साथ ही, दावा किया कि बीएलओ ने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के दबाव में काम किया है.
समाचार एजेंसी से खास बातचीत में दिलीप घोष ने कहा कि बंगाल में कुछ बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) ने तृणमूल कांग्रेस के दबाव में गंभीर गड़बड़ियां की हैं. इसलिए, लाखों नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए जाएंगे. अगर वोटर लिस्ट में एक भी नाम गलत जोड़ा गया है, तो संबंधित बीएलओ को जिम्मेदार ठहराया जाएगा. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वोटर लिस्ट में हेरफेर करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
घोष ने कहा कि इसमें शामिल सभी लोगों को कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा. कुछ को कारण बताओ नोटिस मिल सकता है, जबकि दूसरों को जेल भेजा जा सकता है. उन्हें तैयार रहना चाहिए. वोटर लिस्ट को पूरी तरह से साफ किया जाएगा.
वहीं, पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर में Saturday को नादिया में Prime Minister Narendra Modi के टेलीफोन पर पब्लिक रैली को संबोधित करने पर घोष ने कहा, “खराब मौसम की वजह से वहां कार्यक्रम नहीं हो पाया. हालांकि, उन्होंने बंगाल की पूरी स्थिति के बारे में बात की. Prime Minister मोदी किसी खास समुदाय या ग्रुप के बारे में बात नहीं करते. वह देश, लोगों और बंगाल के बारे में बात करते हैं, और उन्होंने बंगाल से जुड़ी हर बात पर बात की.”
इस बीच, 11 दिसंबर को पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद, भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) उन वोटरों की सुनवाई शुरू करने वाला है जो मैपिंग डिटेल्स से असंतुष्ट हैं या जो अनमैप्ड वोटर हैं. इनमें वे लोग शामिल हैं जिनकी जानकारी 2002 के एसआईआर डेटा से लिंक नहीं हो पाई थी, लेकिन जिनके नाम अभी भी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में थे. सुनवाई 25 दिसंबर के बाद शुरू होने वाली है.
चुनाव आयोग ने एक खास सॉफ्टवेयर बनाने का फैसला किया है जिसके तहत सुनवाई के लिए बुलाए गए हर वोटर को एक अलग अकाउंट दिया जाएगा ताकि प्रक्रिया को आसान बनाया जा सके. आयोग ने यह भी घोषणा की है कि इस काम के लिए केंद्र Government के विभिन्न संगठनों से 4,000 से ज़्यादा माइक्रो-ऑब्जर्वर भर्ती किए जाएंगे.
ये माइक्रो-ऑब्जर्वर हर सुनवाई टेबल पर ईसीआई की आंखों के तौर पर काम करेंगे, कार्रवाई को विस्तार से रिकॉर्ड करेंगे और अपनी रिपोर्ट सीधे आयोग को सौंपेंगे.
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पीएसके