राम मंदिर, विपक्ष के वोटों में बंटवारे से भाजपा को यूपी में होगा फायदा : प्रदीप गुप्ता (आईएएनएस साक्षात्कार)

नई दिल्ली, 3 मार्च . भाजपा की तरफ से लोकसभा चुनाव 2024 के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी गई है. भाजपा इस बार 370 और एनडीए के सभी सहयोगी दलों के साथ 400 पार का लक्ष्य लेकर चुनाव मैदान में जाएगी. ऐसे में भाजपा के लिए इस चुनाव में कौन-कौन सी उपलब्धि उनके पक्ष में रहने वाली है और साथ ही भाजपा किस रणनीति के तहत 400 पार की दिशा में बड़ा कदम उठाने वाली हैं. इसको लेकर के साथ एक्सिस माय इंडिया के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर प्रदीप गुप्ता ने बातचीत में अपनी राय रखी.

प्रदीप गुप्ता ने के साथ खास बातचीत में राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर कहा, “हां, वहां एक तो राम मंदिर है जो बड़ा मुद्दा है उत्तर प्रदेश का, दूसरा उसके उलट दो और चीजें ऐसी हुई हैं, जिसके चलते बीजेपी की संभावनाएं और अच्छी होती दिख रही हैं, वो हैं पिछली बार चुनाव में सपा और बसपा का गठबंधन था जो इस बार नहीं है. कहने का मतलब विपक्ष के वोटों का विघटन होगा. दूसरी बड़ी बात ये कि पिछली बार आरएलडी गठबंधन में सपा के साथ थी. इस बार वो एनडीए में शामिल होती दिख रही है और राजभर की पार्टी भी एनडीए में आ चुकी है तो इन सब बातों को देखते हुए इन तीन विषयों राम मंदिर, सपा-बसपा का गठबंधन न होना और तीसरी बात आरएलडी का एनडीए में शामिल होना भले ही वो 2-4 सीटों के ऊपर असर करें, पर करते तो हैं.”

वहीं यूपी में कांग्रेस और सपा के गठबंधन को लेकर उन्होंने कहा कि ऐसा है कि कांग्रेस पार्टी को पिछले विधानसभा चुनाव में दो सीटें और लोकसभा चुनाव में एक सीट मिली थी और वोट परसेंट के लिहाज से भी दो चार सात परसेंट वोट मिलना कोई मायने नहीं रखता. लोकसभा के चुनाव में गठबंधन हुआ है, माहौल बनता है, मुसलमानों के वोट नहीं कटेंगे बावजूद उसके जो बसपा और सपा का गठबंधन था उसके मुकाबले मैं कहूंगा कि कांग्रेस और सपा का अब जो गठबंधन है, उसमें बहुत बड़ा अंतर है. जबकि अब गठबंधन में बसपा के आने की संभावनाएं खत्म हो चुकी हैं. उसका कारण है कि 17 सीटें कांग्रेस को दे दी गई हैं.

वहीं कांग्रेस की भारत जोड़ो न्याय यात्रा के असर को लेकर उन्होंने कहा, “देखिए जैसा मैंने कहा असर कुछ तो होता है. लेकिन, जहां तक कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश दोनों राज्य ऐसे हैं कि कभी भी वहां पर आजतक कोई भी सरकार रिपीट नहीं हुई तो उस हिसाब से, हां फायदा तो जरूर हुआ है पर ये कह देना उसकी वजह से सरकार बनी है कर्नाटक में और हिमाचल में ये कतई नहीं है.”

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