
New Delhi, 18 जून . कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने शिवसेना (यूबीटी) में कथित अंदरूनी हलचल, बागी सांसदों को वाई-प्लस श्रेणी की सुरक्षा दिए जाने, Samajwadi Party के सांसदों को लेकर भाजपा की रणनीति और Jharkhand राज्यसभा चुनाव के नतीजों पर भाजपा पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि 2014 के बाद से भाजपा का मुख्य लक्ष्य विपक्षी दलों को कमजोर कर सत्ता पर पकड़ बनाए रखना रहा है.
समाचार एजेंसी से बातचीत में तारिक अनवर ने कहा कि भाजपा का जनता का विश्वास जीतने की बजाय Political जोड़-तोड़ के जरिए सत्ता हासिल करने में ज्यादा भरोसा है. उन्होंने कहा कि 2014 में Narendra Modi के Prime Minister बनने के बाद से यह प्रवृत्ति लगातार बढ़ी है. उन्होंने कहा कि भाजपा का विश्वास जनता का समर्थन हासिल करने में नहीं है. उनका विश्वास किसी भी तरह सत्ता में आने और बहुमत जुटाने में है. कई राज्यों में जहां कांग्रेस या अन्य विपक्षी दलों को जनादेश मिला था, वहां भी Governmentें बदली गईं. यह सिलसिला लगातार जारी है. विपक्ष को कमजोर करने और विपक्ष-मुक्त India बनाने की कोशिशें की जा रही हैं.
शिवसेना (यूबीटी) के अंदरूनी हालात और सांसदों के संभावित दल-बदल को लेकर पूछे गए सवाल पर कांग्रेस सांसद ने कहा कि प्रभावित दलों के पास न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने संविधान का मजाक उड़ाया है, उनके खिलाफ अब अदालत का रास्ता ही बचता है. चाहे तृणमूल कांग्रेस हो, उद्धव ठाकरे की पार्टी हो या कोई अन्य दल, ऐसे मामलों में कोर्ट जाना ही एकमात्र विकल्प रह जाता है. अगर वहां से न्याय मिल जाए तो यह बड़ी बात होगी.
सांसदों को वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा दिए जाने के मुद्दे पर तारिक़ अनवर ने कहा कि Political दल बदलने वाले नेताओं को अक्सर विशेष सुविधाएं और सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि जब लोग दल बदलते हैं तो उन्हें वाई प्लस सुरक्षा दी जाती है, उन्हें हर तरह से नवाजा जाता है. सभी जानते हैं कि इसमें धनबल का भी इस्तेमाल होता है. कई बार इतनी बड़ी रकम की पेशकश की जाती है कि लोगों का ईमान डगमगा जाता है.
उत्तर प्रदेश के उपChief Minister केशव प्रसाद मौर्य द्वारा Samajwadi Party के सांसदों को लेकर की गई टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए तारिक अनवर ने कहा कि भाजपा वहां भी कोशिश जरूर करेगी, लेकिन उसे सफलता मिलने की संभावना कम है. हमें लगता है कि अखिलेश यादव की अपनी पार्टी और अपने सांसदों पर मजबूत पकड़ है. वहां भाजपा अपनी साजिश में शायद कामयाब नहीं हो पाएगी.
Jharkhand राज्यसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन समर्थित कांग्रेस उम्मीदवार की हार पर भी उन्होंने सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनावों में इस तरह की घटनाएं पहले भी होती रही हैं और Political संपर्कों का प्रभाव भी देखने को मिलता है. उन्होंने कहा कि जैसा अन्य जगहों पर होता है, वैसा ही Jharkhand में भी हुआ है. राज्यसभा चुनाव में इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं. परिमल नथवानी पहले भी राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं, इसलिए उन्होंने अपने संपर्कों का लाभ उठाया होगा. यह कैसे और किन कारणों से हुआ, इसका पता बाद में चलेगा.
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पीएसके