
New Delhi, 29 जून . शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के भाजपा को ‘बाबर जनता पार्टी’ कहने और राम मंदिर को लेकर दिए गए बयान पर भाजपा नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. भाजपा विधायक राम कदम, पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश, सांसद संजय जायसवाल और शिवसेना की विधान परिषद सदस्य मनीषा कायंदे ने उद्धव ठाकरे की आलोचना करते हुए इसे अनुचित और Political हताशा से प्रेरित बताया.
Mumbai में भाजपा विधायक राम कदम ने उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें सबसे पहले स्वयं यह समझना चाहिए कि वे किन Political दलों के साथ रहे हैं. उद्धव ठाकरे उन लोगों के साथ सत्ता में बैठे, जिन्होंने राम मंदिर पर सवाल उठाए और मंदिर निर्माण में कानूनी अड़चनें पैदा करने की कोशिश की थी. जो लोग भगवान राम के अस्तित्व को काल्पनिक बताते रहे, उद्धव ठाकरे उन्हीं के साथ Political गठबंधन कर चुके हैं. उनके शासनकाल में मंदिरों को बंद रखा गया, जबकि अन्य गतिविधियों को अनुमति दी गई. ऐसे में उद्धव ठाकरे को भाजपा को हिंदुत्व का पाठ पढ़ाने का कोई अधिकार नहीं है. जब Political रूप से उनका सब कुछ समाप्त हो गया, तब उन्हें हिंदुत्व की याद आई है.
BJP MP संजय जायसवाल ने उद्धव ठाकरे के बयान को गंभीरता से लेने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे आज की राजनीति में पूरी तरह अप्रासंगिक हो चुके हैं और उनके साथ जुड़े अधिकांश नेता एवं जनप्रतिनिधि उनका साथ छोड़ चुके हैं. Political हताशा के कारण उद्धव ठाकरे इस प्रकार के बयान दे रहे हैं. उनके बयानों को न तो जनता गंभीरता से ले रही है और न ही मीडिया को अधिक महत्व देना चाहिए.
शिवसेना की विधान परिषद सदस्य मनीषा कायंदे ने भी उद्धव ठाकरे की टिप्पणी पर असहमति जताई. उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे स्वयं Maharashtra के Chief Minister रह चुके हैं और उनके जैसे वरिष्ठ नेता को इस प्रकार की टिप्पणी करना शोभा नहीं देता.
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने कहा कि उद्धव ठाकरे को भाजपा और उसके वैचारिक आधार पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. यही उद्धव ठाकरे सत्ता के लिए कांग्रेस के साथ Government बनाने को तैयार हो गए थे. कांग्रेस वही पार्टी है, जिसने वर्ष 2007 में भगवान राम के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न खड़ा किया था. Chief Minister बनने की इच्छा में उद्धव ठाकरे ने उन्हीं दलों के साथ गठबंधन किया, जो भाजपा की वैचारिक धारा के विरोधी रहे हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद और भारतीय जनता पार्टी की कई पीढ़ियों ने राम मंदिर आंदोलन और हिंदुत्व के लिए त्याग, तपस्या और बलिदान दिया है. ऐसे में भाजपा को अपनी आस्था और प्रतिबद्धता का प्रमाण किसी से लेने की आवश्यकता नहीं है.
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पीएसके/एबीएम