बिटुमेन घोटाला मामला: सीबीआई अदालत ने पूर्व इंजीनियर और ट्रांसपोर्टर को सुनाई सजा

Patna, 11 दिसंबर . Patna की एक विशेष सीबीआई अदालत ने Thursday को एक पूर्व कार्यकारी अभियंता और एक ट्रांसपोर्टर को लगभग तीन दशक पुराने बिटुमेन घोटाले में उनकी भूमिका के लिए दोषी ठहराया और सजा सुनाई. इससे बिहार Government को भारी नुकसान हुआ था.

यह मामला मूलरूप से 1996 में दर्ज किया गया था. यह सड़क निर्माण कार्य के लिए निर्धारित थोक बिटुमेन के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग से संबंधित था.

सीबीआई के अनुसार, अदालत ने बिहार शरीफ में सड़क निर्माण प्रभाग (आरसीडी) के तत्कालीन कार्यकारी अभियंता बैकुंठ नाथ शर्मा को एक साल के कठोर कारावास के साथ 35,000 रुपए का जुर्माना भी सुनाया है.

तिरुपति ट्रांसपोर्ट एजेंसी से जुड़े निजी ट्रांसपोर्टर सुरेश कुमार गुप्ता को तीन साल के कठोर कारावास और 1.5 लाख रुपए का जुर्माना सुनाया गया है.

यह मामला शुरू में बांका टाउन Police स्टेशन में दर्ज किया गया था, जिसे Patna उच्च न्यायालय के निर्देशों पर फरवरी 1997 में सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया गया था.

जांचकर्ताओं ने पाया कि आरसीडी बांका डिवीजन को थोक बिटुमेन पहुंचाने के लिए जिम्मेदार ट्रांसपोर्टर ने आपूर्ति आदेश के अनुसार उठाई गई मात्रा से काफी कम सामग्री की आपूर्ति की थी.

सीबीआई के मुताबिक, उक्त ट्रांसपोर्टर ने आपूर्ति आदेश के अनुसार वास्तविक रूप से उठाई गई मात्रा से कम मात्रा की आपूर्ति की और 14.38 लाख रुपए की लागत से कुल 287.625 मीट्रिक टन (एमटी) थोक बिटुमेन का गबन किया.

सीबीआई ने जांच पूरी करने के बाद फरवरी 2002 में गुप्ता, शर्मा और दो अन्य Governmentी अधिकारियों, बाल्मीकि चौधरी, एक जूनियर इंजीनियर, और रघुनांदन सिंह, एक सहायक इंजीनियर/एसडीओ, के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया. इनमें से दोनों की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई.

कई वर्षों की कानूनी कार्रवाई के बाद, सीबीआई अदालत ने Thursday को अपना फैसला सुनाया, जिसमें बचे हुए आरोपियों को आपराधिक कदाचार और धोखाधड़ी का दोषी ठहराया गया.

बता दें कि Ahmedabad की एक विशेष सीबीआई अदालत ने Tuesday को तीन व्यक्तियों को 2011 में ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी) से लगभग 67 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने के आरोप में तीन साल की कैद की सजा सुनाई.

एएसएच/डीकेपी

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