
Patna, 21 जून . आरा एनकाउंटर मामले पर विवाद उत्पन्न होने के बाद सत्यता और सच्चाई सामने लाने के लिए बिहार के Chief Minister सम्राट चौधरी द्वारा उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से न्यायिक जांच कराने का निर्णय स्वागत योग्य है.
बिहार Police एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार सिंह के अनुसार, देश के शीर्ष राष्ट्रीय समाचार चैनलों द्वारा दिल्ली से आरा मुद्दे पर डिबेट में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया. मैंने यह कहते हुए आमंत्रण अस्वीकार कर दिया कि अब मामला न्यायिक जांच के अधीन है, इसलिए इस पर कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा.
परंतु एक बात अवश्य कहना चाहूंगा कि जब भी Police कोई सराहनीय कार्य करती है तो जिले के Police अधीक्षक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वयं टीम लीडर के रूप में उसका श्रेय लेते हैं. थानाध्यक्ष, इंस्पेक्टर, दरोगा को साथ खड़ा करके और डीएसपी को बैठाकर हर जिले में एसपी दिखाई देते हैं. अच्छे कार्यों के लिए Government/Police मुख्यालय द्वारा एसपी को सम्मानित किया जाता है. Police की कई बड़ी उपलब्धियों में टीम लीडर के रूप में जिले के एसपी President वीरता पदक भी प्राप्त करते रहे हैं.
यह सर्वविदित है कि अपराधियों के विरुद्ध जिले में कोई भी छापेमारी या रणनीतिक कार्रवाई Police अधीक्षक की निगरानी, सूचना एवं निर्देशन में ही होती है. आरा का मामला तो दो दिनों से सुर्खियों में था, जिसकी मॉनिटरिंग निश्चित रूप से जिले के एसपी के संज्ञान और निर्देशन में हो रही होगी. घटना की पल-पल की जानकारी उपस्थित डीएसपी और थानाध्यक्ष द्वारा एसपी एवं वरीय अधिकारियों को दी जा रही होगी. वैसे तो ऐसे मामलों में एसपी की उपस्थिति स्वयं होनी चाहिए थी, हथियार लहराते भरत तिवारी द्वारा भी अनेक बार एसपी-डीएम को बुलाने की बात कही जा रही थी.
हमें पूर्ण विश्वास है कि न्यायिक जांच सभी बिंदुओं पर निष्पक्ष रूप से होगी और सत्य सामने आएगा. यदि जांच में Police दोषी पाई जाती है तो घटना से जुड़े सभी Policeकर्मियों, निर्देश देने वाले एवं मॉनिटरिंग करने वाले अधिकारियों को भी उत्तरदायी ठहराया जाना चाहिए. यदि एनकाउंटर सही पाया जाता है तो सभी को निर्दोष माना जाना चाहिए. बिहार में सुशासन स्थापित करने के लिए थाना क्षेत्र में अपनी जान जोखिम में डालकर कर्तव्य निर्वहन करने वाले कनीय Police अधिकारी और कर्मी ही ही बलि का बकरा नहीं बनने चाहिए. श्रेय और आरोप, दोनों का निर्धारण जिले के एसपी से लेकर कनीय Policeकर्मियों तक, सभी के लिए समान रूप से होना चाहिए.
Policeकर्मी भी समाज का हिस्सा हैं, किसी के भाई तो किसी के बेटे, किसी के पिता तो किसी के संबंधी. आम जनता की सुरक्षा और कानून की रक्षा के लिए हर मौसम, हर कठिन परिस्थिति में जान की बाजी लगाकर कर्तव्य करते हैं. आम जनता को भी Police का सहयोग करना चाहिए और अपराधियों की सूचना देनी चाहिए. न्याय के साथ विकास की Government हमेशा कायम रहे, यह हम सभी के सामूहिक प्रयास से ही संभव है.
वैसे न्यायिक जांच की घोषणा के बाद इस पर अब राजनीति नहीं होनी चाहिए. जांच पर विश्वास करते हुए जांच परिणाम का इंतजार करना चाहिए. मेरा मानना है कि निर्दोष फंसना नहीं चाहिए और दोषी कोई भी हो, बचना नहीं चाहिए.
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डीकेपी/