छात्र प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई को लेकर बिहार सरकार ने Supreme Court में दाखिल किया हलफनामा, एके-47 से फायरिंग पर दी सफाई

New Delhi, 18 अगस्त . बिहार में छात्र प्रदर्शन के दौरान Police की कथित बर्बरता को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर राज्य Government ने Supreme Court में हलफनामा दाखिल कर Police पर ‘अनुचित बल’ के इस्तेमाल के आरोपों से इनकार किया है.

हलफनामे में बिहार Government ने कहा है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने पर Police ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाए थे. सीवान में Policeकर्मी द्वारा एके-47 से फायरिंग के मामले में राज्य Government ने कहा कि भीड़ में फंस जाने के बाद एक constable ने हवा में चार गोलियां चलाई थीं.

बिहार Government के मुताबिक, एके-47 से चली गोलियों से किसी प्रदर्शनकारी को चोट नहीं लगी. Government ने यह भी कहा कि हथियार का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था की स्थिति में नहीं किया जाना चाहिए. एके-47 को ‘प्लाटून स्तर का हथियार’ बताते हुए कहा गया है कि इसका इस्तेमाल विशेष अभियानों के लिए होता है. राज्य के डीजीपी ने एके-47 के इस्तेमाल को लेकर निर्देश भी जारी किए हैं. हालांकि, जिस constable ने फायरिंग की थी, उसे निलंबित कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है.

Government के अनुसार, हाथी चौक के पास एक एएसआई ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए अपनी 9 एमएम पिस्टल से दो राउंड फायर किए. इस दौरान तीन प्रदर्शनकारियों को गोली लगने से मामूली चोटें आईं. हालांकि, Government का कहना है कि इन तीनों को एके-47 से गोली नहीं लगी थी और वे उस स्थान पर भी मौजूद नहीं थे, जहां एके-47 से फायरिंग हुई थी. घटना की बैलिस्टिक जांच जारी है, जिससे हथियार के प्रकार, गोली चलने की दूरी और फायरिंग के एंगल जैसी जानकारियां जुटाई जा रही हैं.

हलफनामे के मुताबिक, 22 से 25 जुलाई 2026 के बीच बिहार में कुल 69 First Information Report दर्ज की गईं और करीब 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया. Supreme Court के निर्देश के तहत बिना आपराधिक इतिहास वाले 222 छात्र प्रदर्शनकारियों को जमानत पर रिहा किया गया, जबकि 75 किशोरों को किशोर न्याय बोर्ड के जरिए छोड़ा गया.

Government ने कहा है कि 18 साल से कम उम्र के ऐसे सभी बच्चों को, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, साधारण बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया है. Police का दावा है कि बिना आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ फिलहाल कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जा रही है. Government ने अपने जवाब में कहा है कि प्रदर्शन के दौरान गांधी मैदान, जहानाबाद, Patna, छपरा, भागलपुर, सीतामढ़ी, औरंगाबाद, कटिहार, किशनगंज और सीवान समेत कई स्थानों पर स्थिति हिंसक हुई.

छपरा में 25 जुलाई को दोपहर तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहने के बाद भीड़ में असामाजिक तत्वों के शामिल होने और तोड़फोड़ तथा पथराव शुरू करने का आरोप लगाया गया है. Government के अनुसार, इस दौरान 2 बीडीओ, 3 Police इंस्पेक्टर, 2 सब-इंस्पेक्टर और 11 constable घायल हुए. एक बीडीओ की आंख चली गई, जबकि दूसरे बीडीओ के सिर पर भारी वस्तु से गंभीर चोट लगी और उनकी हालत गंभीर बताई गई है.

राज्य Government ने दावा किया है कि पूरे प्रदर्शन के दौरान 157 Policeकर्मी और सात Governmentी कर्मचारी घायल हुए हैं. साथ ही, Police द्वारा आंसू गैस और वाटर कैनन के इस्तेमाल की बात भी Government ने स्वीकार की है और माना है कि इससे प्रदर्शनकारियों को चोटें आईं. Government ने हिंसा के लिए ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आसिया) और आरवाईए की ओर से दिए गए प्रदर्शन के आह्वान का भी उल्लेख किया है. वहीं, 24 जुलाई को कॉक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के आह्वान का बिहार में कोई खास असर नहीं होने का दावा किया गया है.

राज्य Government ने कहा है कि Supreme Court के निर्देशों के अनुसार सभी वीडियो फुटेज और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश अतिरिक्त डीजीपी को दिए गए हैं. प्रदर्शन के दौरान जुटाई गई प्रदर्शनकारियों की निजी जानकारी और डिजिटल डेटा को फिलहाल सार्वजनिक या social media पर साझा नहीं करने को कहा गया है. Government का कहना है कि छात्रों समेत प्रदर्शनकारियों की पहचान संबंधी जानकारी प्रकाशित नहीं की जा रही है. देशभर में छात्रों के प्रदर्शन में हुई Police की कार्रवाई के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर Tuesday को Supreme Court में सुनवाई होनी है.

ओपी/पीएम

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