
कोलकाता, 20 मई . भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को चेक बाउंस मामले में बड़ी राहत मिली है. शमी को अलीपुर कोर्ट ने उनकी अलग रह रही पत्नी हसीन जहां द्वारा दायर चेक बाउंस मामले में बरी कर दिया है.
क्रिकेटर मोहम्मद की पूर्व पत्नी हसीन जहां ने आरोप लगाया था कि शमी द्वारा घर के खर्च के लिए दिया गया 1 लाख रुपए का चेक बाउंस हो गया था. Wednesday को अलीपुर कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए इस मामले में सभी आरोपों से बरी कर दिया है.
‘ ’ से बात करते हुए, शमी के वकील सलीम रहमान ने कहा, “क्रिकेटर मोहम्मद शमी को चार साल पुराने उस मामले में बरी कर दिया गया है, जिन्हें उनकी पत्नी ने दायर किया था.” इस मामले की सुनवाई Wednesday को अलीपुर में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में हुई, जहां शमी को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया.
उल्लेखनीय है कि साल 2018 में, हसीन जहां ने आरोप लगाया था कि शमी ने उन्हें घरेलू खर्चों के लिए 1 लाख रुपए का चेक दिया था, जो बाद में बैंक में जमा करने पर बाउंस हो गया. इसके बाद उन्होंने कोर्ट का रुख किया और शमी के खिलाफ मामला दर्ज कराया. इस मामले के अलावा, उन्होंने शमी और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ कई अन्य शिकायतें भी दर्ज कराई थीं.
Wednesday को शमी कोर्ट में पेश हुए. फैसले के बाद मीडिया से बात करते हुए शमी ने कहा कि उन्हें पहले से ही पता था कि फैसला उनके पक्ष में आएगा, क्योंकि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया. उन्होंने कहा, “मुझे जितने भी पैसे देने थे, मैंने उसका एक-एक रुपया चुका दिया है. चाहे मैदान के अंदर की बात हो या बाहर की, मैं हमेशा हर स्थिति को अपनी पूरी क्षमता से संभालने की कोशिश करता हूं.”
शमी फिलहाल इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में Lucknow सुपर जायंट्स (एलएसजी) का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से अपनी अलग रह रही पत्नी के साथ चल रहे कानूनी विवादों के चलते वे लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं.
भरण-पोषण और गुजारा भत्ते को लेकर शमी और हसीन जहां के बीच चल रही कानूनी लड़ाई अभी भी जारी है. कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, शमी फिलहाल हसीन जहां को प्रतिमाह 1.5 लाख रुपए और अपनी बेटी की देखभाल और परवरिश के लिए 2.5 लाख रुपए का भुगतान करते हैं.
बाद में हसीन जहां ने Supreme Court का रुख किया और यह दलील दी कि यह राशि घरेलू खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है. शीर्ष अदालत ने शमी और पश्चिम बंगाल Government, दोनों को नोटिस जारी किए हैं. सुनवाई के दौरान, अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि क्या एक मां और बेटी के भरण-पोषण के लिए प्रति माह 4 लाख रुपए की राशि अपर्याप्त है.
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आरएसजी