
वाशिंगटन, 8 दिसबंर . अमेरिका के नए रक्षा प्राधिकरण बिल में India को इंडो–प्रशांत क्षेत्र और परमाणु नीति में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है. इस विधेयक में कहा गया है कि अमेरिका India के साथ मिलकर उसकी परमाणु दायित्व नीति पर लगातार बातचीत करेगा और India को उन चुनिंदा देशों में शामिल करेगा जो चीन की चुनौती से निपटने के लिए नई रक्षा व्यवस्था तैयार कर रहे हैं.
अमेरिकी कांग्रेस के नेताओं ने वित्त वर्ष 2026 के लिए राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम (एनडीएए) का संयुक्त मसौदा जारी किया है. इस अधिनियम में India को अमेरिका की कई रणनीतियों में विशेष स्थान दिया गया है-जैसे नागरिक परमाणु सहयोग, रक्षा सह-उत्पादन और समुद्री सुरक्षा. यह बिल छह दशकों से हर साल पारित होता रहा है. इस सप्ताह के अंत में बिल हाउस से पारित होने की उम्मीद है.
बिल में एक महत्वपूर्ण प्रावधान है कि अमेरिका और India मिलकर एक संयुक्त परामर्श तंत्र स्थापित करेंगे. यह तंत्र 2008 के नागरिक परमाणु समझौते के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा करेगा. इसके साथ ही India के घरेलू परमाणु दायित्व नियमों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाने पर भी चर्चा की जाएगी और इन मुद्दों पर द्विपक्षीय और बहुपक्षीय राजनयिक जुड़ाव के लिए “एक रणनीति विकसित करने” का भी काम सौंपा गया है.
अमेरिका को पांच वर्षों तक हर साल कांग्रेस में इस समीक्षा की रिपोर्ट देनी होगी.
बिल के अन्य भाग में India को वैश्विक नागरिक परमाणु सहयोग में “सहयोगी देश” के रूप में रखा गया है. इसके अलावा, यह कानून प्रशासन को अमेरिकी परमाणु निर्यात का विस्तार करने के लिए 10-वर्षीय रणनीति स्थापित करने और रूस तथा चीन से होने वाली प्रतिस्पर्धा का विश्लेषण करेगा.
इंडो–प्रशांत क्षेत्र से जुड़े प्रावधानों में India को प्राथमिक सहयोगियों की सूची में रखा गया है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, फिलीपींस और न्यूजीलैंड भी शामिल हैं. इन देशों के साथ मिलकर रक्षा उद्योग, आपूर्ति श्रृंखला और नई तकनीक पर संयुक्त काम आगे बढ़ाया जाएगा.
अमेरिकी रक्षा मंत्री को अधिकार होगा कि वे समझौते करें, विशेषज्ञ सहायता दें, और उद्योग व शिक्षण संस्थानों को जोड़ें ताकि संयुक्त उत्पादन और विकास को बढ़ावा दिया जा सके.
संसद ने यह भी कहा है कि अमेरिका क्वाड्रीलेटरल सुरक्षा संवाद सहित India के साथ अपना जुड़ाव बढ़ाए, ताकि इंडो–प्रशांत क्षेत्र को स्वतंत्र और खुला रखा जा सके. इसमें सैन्य अभ्यास, रक्षा व्यापार, मानवीय सहायता और समुद्री सुरक्षा शामिल हैं. चीन को रोकने के लिए अमेरिका अपनी क्षेत्रीय उपस्थिति और साझेदारी भी बढ़ाएगा.
विधेयक में भारतीय महासागर क्षेत्र के लिए एक विशेष राजदूत बनाने की मंजूरी भी दी गई है, जिसका काम होगा कि वह इस क्षेत्र में अमेरिका की कूटनीति का समन्वय करे और चीन के प्रभाव को संतुलित करने की रणनीति बनाए.
इन सभी कदमों से यह स्पष्ट होता है कि India अब अमेरिका की क्षेत्रीय रणनीति का सिर्फ लाभार्थी नहीं है, बल्कि एक महत्वपूर्ण साझेदार भी है. हाल के वर्षों में भारत–अमेरिका रक्षा संबंध काफी मजबूत हुए हैं.
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एएस/