खसरे की चपेट में बांग्लादेश, यूनुस सरकार की नीतिगत बदलाव बना कारण

ढाका, 2 मई . बांग्लादेश इस समय खसरे (मीजल्स) की गंभीर महामारी से जूझ रहा है. मार्च मध्य से अब तक देश में 32,000 से अधिक संदिग्ध मामले और 250 से ज्यादा मौतें दर्ज की गई हैं, जिनमें अधिकांश छोटे बच्चे शामिल हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रकोप के चलते देशभर के अस्पतालों में अफरा-तफरी का माहौल है. पिछले महीने ढाका के संक्रामक रोग अस्पताल में बच्चों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. कई बच्चे सांस लेने के लिए संघर्ष करते दिखे, जबकि कुछ निढाल अवस्था में पड़े थे. बेड की कमी के कारण कई मरीजों का इलाज फर्श पर करना पड़ा.

‘साइंस एडवाइजर’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह महामारी जुलाई 2024 के विरोध प्रदर्शनों के बाद वैक्सीन खरीद व्यवस्था में आई “विनाशकारी टूट” का नतीजा है, जिससे देशभर में टीकों की भारी कमी हो गई और टीकाकरण दर में तेज गिरावट आई.

विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों में कुपोषण की ऊंची दर और कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था ने मौतों की संख्या बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है. इससे यह भी सामने आया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में हुई प्रगति कितनी जल्दी कमजोर पड़ सकती है.

2024 में व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद पूर्व Prime Minister शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम Government बनी थी. रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि इस Government के 18 महीने के कार्यकाल में वैक्सीन कवरेज व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई.

रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 में अंतरिम Government ने यूनिसेफ के माध्यम से वैक्सीन खरीद की व्यवस्था समाप्त कर खुली निविदा प्रणाली लागू कर दी. इस प्रक्रिया में Government आपूर्तिकर्ताओं से बोलियां मंगाती है और प्रस्तावों का मूल्यांकन कर ऑर्डर देती है.

यूनिसेफ ने इस कदम का कड़ा विरोध किया था और चेतावनी दी थी कि इससे टीकाकरण व्यवस्था बाधित हो सकती है तथा महामारी फैल सकती है. बांग्लादेश में यूनिसेफ की प्रतिनिधि राना फ्लावर्स ने कहा कि उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों को बार-बार आगाह किया था और तत्कालीन अंतरिम स्वास्थ्य सलाहकार नूरजहां बेगम से भी इस फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा था.

रिपोर्ट में कहा गया है कि निविदा प्रक्रिया नौकरशाही देरी में फंस गई, जिससे वैक्सीन आपूर्ति ठप हो गई और देशभर में स्टॉक खत्म होने लगा. इससे नियमित टीकाकरण बुरी तरह प्रभावित हुआ.

खसरा-रूबेला (एमआर) का विशेष टीकाकरण अभियान, जो पहले 2024 में होना था और Political अशांति के कारण 2025 तक टाल दिया गया था, उसे भी रद्द कर दिया गया. मार्च के अंत तक Governmentी आंकड़ों में सामने आया कि 2025 में केवल 59 प्रतिशत पात्र बच्चों को ही खसरे का टीका लग पाया.

बांग्लादेश स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के पूर्व रोग नियंत्रण निदेशक बे-नजीर अहमद ने चेतावनी दी कि मौजूदा गति से चल रहा आपातकालीन टीकाकरण अभियान महामारी को जल्दी नहीं रोक पाएगा.

ढाका स्थित महामारी विज्ञान, रोग नियंत्रण एवं अनुसंधान संस्थान (आईईडीसीआर) के सलाहकार मोहम्मद मुश्तुक हुसैन ने कहा कि बांग्लादेश Government को स्थिति की गंभीरता देखते हुए औपचारिक रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करना चाहिए.

उन्होंने कहा, “यह पहले से ही आपात स्थिति है, फिर इसे आधिकारिक रूप से घोषित करने में हिचकिचाहट क्यों?”

डीएससी

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