जनआंदोलनों की आड़ में साधे जा रहे राजनीतिक हित, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पर भड़के अशोक पंडित

Mumbai , 8 जून . फिल्म निर्माता-निर्देशक और सामाजिक कार्यकर्ता अशोक पंडित ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के आंदोलन पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि इस आंदोलन के पीछे वास्तविक न्याय की चिंता है या कुछ और Political एजेंडा, यह देखने की जरूरत है. उनका मानना है कि जनआंदोलनों की आड़ में Political हित साधे जा रहे हैं.

अशोक पंडित ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हुए लिखा कि जितना ज्यादा वह इस पार्टी को देखते हैं, उतना ही इसके इरादों पर उनका शक बढ़ता जाता है. उन्होंने इसके पैटर्न को नजरअंदाज करना मुश्किल बताया और कहा कि वह सिर्फ सवाल उठा रहे हैं. पंडित ने 2010 के अन्ना हजारे आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि आजादी के बाद सिस्टम के खिलाफ यह सबसे बड़ा जन आंदोलन था. पूरा देश एकजुट हुआ था. बदलाव की बड़ी उम्मीद जगी थी. अन्ना हजारे की अगुवाई में समाज सुधारकों, बुद्धिजीवियों और आम लोगों का बड़ा समूह इकट्ठा हुआ था. उस आंदोलन से अरविंद केजरीवाल एक प्रमुख चेहरा बनकर उभरे. लेकिन बाद में स्थिति बदल गई.

अशोक पंडित का आरोप है कि अन्ना हजारे के आंदोलन को केजरीवाल ने अपनी निजी Political महत्वाकांक्षा के लिए इस्तेमाल कर लिया. उन्होंने दावा किया कि जिसे नए India का चेहरा बताया गया, वही व्यक्ति बाद में शराब तस्करी के मामले में फंस गए और जेल भी गए.

उन्होंने पेपर लीक जैसे मुद्दों पर भी बात की. उन्होंने कहा कि पेपर लीक स्कैंडल बेहद निंदनीय है और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता. दोषियों को सजा मिलनी चाहिए. लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) अपने Political एजेंडे के कारण असली मुद्दों को छोटा कर रही है. उन्होंने आगे कहा कि इस आंदोलन के कई प्रमुख चेहरों का ट्रैक रिकॉर्ड संदिग्ध है. एक प्रमुख आवाज ने उमर खालिद की तारीफ की है, जबकि सोनम वांगचुक जैसे अन्य लोग भी जांच के दायरे में रहे हैं. उनका कहना है कि यह आंदोलन अब आम नागरिकों के विद्रोह से ज्यादा “टुकड़े-टुकड़े गैंग” के रीयूनियन जैसा लग रहा है.

अशोक पंडित ने दिल्ली चुनाव में हार के बाद केजरीवाल की Political स्थिति का भी जिक्र किया. उनका कहना है कि केजरीवाल अपनी कम होती Political पूंजी को बचाने के लिए नया मुद्दा चाहते हैं. पंजाब, Gujarat और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में आने वाले चुनावों को देखते हुए वे गुस्से की लहर खड़ी करके फायदा उठाना चाहते हैं. पंडित ने कहा कि केजरीवाल, राहुल गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी समेत कई विपक्षी नेता अब असली जनता का समर्थन न मिलने पर ऐसे आंदोलनों के सहारे Political अहमियत हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं.

उन्होंने चेतावनी दी कि चुनावों के नजदीक आने पर देशभर में ऐसे विरोध प्रदर्शन अचानक बढ़ सकते हैं. साथ ही उन्होंने किसान आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले भी विदेशी हस्तियों, टूलकिट और हाईवे पर Political नाटक देखे जा चुके हैं, जो चुनाव खत्म होते ही गायब हो गए थे. उन्होंने कहा कि वास्तव में मुखौटे बदलते रहते हैं, लेकिन असली चेहरा वही रहता है.

एमटी/एएस

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