अमेरिका बना भारत का सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता, आयात में हिस्सेदारी बढ़कर 67 प्रतिशत पहुंची: हरदीप सिंह पुरी

New Delhi, 7 अगस्त . केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने Friday को कहा कि अमेरिका अब India को तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया है. पिछले कुछ महीनों में India के एलपीजी आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है और अब यह लगभग 67 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है.

India की ऊर्जा आपूर्ति रणनीति पर बात करते हुए पुरी ने कहा कि Government ने पहले ही अमेरिका से देश की कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 10 प्रतिशत आयात करने का फैसला किया था. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय किसी भू-Political संकट या होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित व्यवधान की आशंका के कारण नहीं लिया गया था, बल्कि यह India की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का हिस्सा था.

मंत्री ने बताया कि उस समय इस फैसले को लेकर कई सवाल उठे थे, क्योंकि India पहले से ही अपने नजदीकी देशों और क्षेत्रों से एलपीजी आयात करता रहा है. हालांकि समय के साथ India के आयात ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिला और अमेरिका देश का प्रमुख एलपीजी आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा.

हरदीप सिंह पुरी ने कहा, “आज मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि India के कुल एलपीजी आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 67 प्रतिशत हो गई है.”

उन्होंने कहा कि India ने Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व में ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. Government केवल पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भर रहने के बजाय ऊर्जा आपूर्ति के विविधीकरण पर जोर दे रही है.

ऊर्जा क्षेत्र में हाल ही में घोषित 84,000 करोड़ रुपए के ‘समुद्र मंथन’ मिशन का उल्लेख करते हुए पुरी ने कहा कि यह परियोजना India में गहरे समुद्री क्षेत्रों में हाइड्रोकार्बन खोज गतिविधियों को अभूतपूर्व गति देगी.

उन्होंने कहा, “समुद्र मंथन मिशन केवल एक निवेश नहीं है, बल्कि India के ऊर्जा भविष्य में विश्वास का सबसे बड़ा प्रमाण है. यह मिशन देश के ऊर्जा क्षेत्र में परिवर्तनकारी अध्याय लिखेगा और India को वैश्विक ऊर्जा मानचित्र पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा.”

मंत्री ने कहा कि दशकों तक ऊर्जा सुरक्षा को केवल तेल और गैस जैसे हाइड्रोकार्बन स्रोतों के नजरिए से देखा जाता था, लेकिन आज India इस सोच से आगे बढ़ चुका है.

उनके अनुसार, India ने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने, मजबूत ऊर्जा अवसंरचना विकसित करने, भरोसेमंद अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां बनाने, रणनीतिक भंडार तैयार करने और वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने जैसे कई कदम उठाए हैं, जिससे बाहरी परिस्थितियों और वैश्विक संकटों का असर आम नागरिकों पर कम करने में मदद मिली है.

उन्होंने कहा कि India का लक्ष्य केवल ऊर्जा आयात करना नहीं, बल्कि एक ऐसी ऊर्जा व्यवस्था तैयार करना है जो सुरक्षित, टिकाऊ और आत्मनिर्भर हो. इसी दिशा में Government एलएनजी, एलपीजी, जैव ईंधन, हरित हाइड्रोजन और घरेलू तेल-गैस उत्पादन को बढ़ावा देने पर लगातार काम कर रही है.

डीबीपी

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