
New Delhi, 18 जून . पश्चिम बंगाल विधानसभा का बजट सत्र Thursday को Governor आरएन रवि के अभिभाषण के साथ शुरू हुआ. इसके साथ ही राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) Government के तहत पहली बार बजट पेश करने की उल्टी गिनती भी शुरू हो गई है.
इस समय सबकी नजरें स्वप्न दासगुप्ता पर टिकी हो सकती हैं, वे 22 जून को बजट भाषण देंगे. स्वप्न दासगुप्ता एक अनुभवी पत्रकार, कमेंटेटर और सांसद हैं और अब राज्य के वित्त मंत्री हैं.
दासगुप्ता से उम्मीद है कि वे बजट में व्यावहारिकता और वैचारिक स्पष्टता का मेल लाएंगे.
राष्ट्रीय राजनीति और आर्थिक कमेंट्री में उनके अनुभव के कारण वे राज्य की अर्थव्यवस्था की मैक्रो-इकोनॉमिक जरूरतों और माइक्रो-लेवल की चिंताओं, दोनों को समझने की स्थिति में हैं. वे ‘इस समय के अहम व्यक्ति’ साबित हो सकते हैं, क्योंकि वे Chief Minister सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाले प्रशासन की ओर से शासन में क्षमता और विश्वसनीयता दिखाने की कोशिश को सामने रखेंगे.
अगर नए वित्त मंत्री ऐसा बजट पेश कर पाते हैं जो वित्तीय अनुशासन और विकास-उन्मुख उपायों के बीच संतुलन बनाए रखे और साथ ही आम बंगालियों की उम्मीदों को भी पूरा करे तो यह राज्य की आर्थिक-राजनीति में एक अहम मोड़ साबित होगा.
लगभग आधी सदी तक, राज्य की वित्तीय नीति या तो लेफ्ट फ्रंट या तृणमूल कांग्रेस द्वारा तय की गई, जिन्होंने राज्य की अनदेखी करने के लिए पिछली केंद्र Governmentों को लगातार दोषी ठहराया है.
अब, ‘डबल-इंजन’ Government के आने के बाद समाज के हर वर्ग- आम आदमी से लेकर उद्योगपतियों तक में यह उम्मीद है कि क्या यह बजट अतीत से सचमुच अलग होगा.
दासगुप्ता के काम पर कड़ी नजर रहेगी, क्योंकि पश्चिम बंगाल दशकों से आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है. इसकी अर्थव्यवस्था लंबे समय से संरचनात्मक समस्याओं से जूझ रही है. बेरोजगारी, बुनियादी ढांचे की रुकावटें, पर्याप्त सहायता सुविधाओं की कमी और बंदरगाह के आधुनिकीकरण व कनेक्टिविटी में देरी ने कथित तौर पर निवेश को धीमा कर दिया है.
राज्य पर कर्ज का बोझ एक और बड़ी चिंता माना जाता है, क्योंकि लगातार Governmentों ने कल्याणकारी योजनाओं के लिए कर्ज पर बहुत ज्यादा निर्भरता दिखाई है.
कृषि क्षमता से कम उत्पादकता और आधुनिक सिंचाई सुविधाओं की कमी से जूझ रही है. इस बीच, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर दशकों से बड़े निवेश की कमी और उद्योगों के पलायन के बाद अपनी स्थिति को फिर से मजबूत करने के लिए संघर्ष कर रहा है.
आम आदमी की मांग साफ है, बढ़ती कीमतों से राहत और रोजगार के बेहतर अवसर. खाने-पीने की चीजों और ईंधन की महंगाई ने घरों के बजट पर बुरा असर डाला है, और उम्मीद है कि भाजपा Government सब्सिडी या खास कल्याणकारी उपायों की घोषणा करेगी.
बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएं भी लोगों की इच्छाओं की सूची में सबसे ऊपर हैं, खासकर अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों में जहां Governmentी सेवाएं अभी भी ठीक नहीं हैं.
कारोबारी और व्यापारी टैक्स सिस्टम को आसान बनाने और बेहतर लॉजिस्टिक्स चाहते हैं. व्यापारी समुदाय लंबे समय से नौकरशाही की बाधाओं और नियमों को ठीक से लागू न किए जाने की शिकायत करता रहा है.
ऐसा बजट जो प्रक्रियाओं को आसान बनाए, अनुपालन की लागत कम करे और ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाए, वह उन्हें खुश कर सकता है.
उद्योगपति बड़े और ठोस संकेतों की उम्मीद कर रहे हैं. वे ऐसी जमीन अधिग्रहण नीतियां चाहते हैं जो पारदर्शी और निवेशकों के अनुकूल हों, बिजली की दरें प्रतिस्पर्धी हों और कुछ खास सेक्टर के लिए प्रोत्साहन मिलें.
इसका मकसद Prime Minister Narendra Modi की उस बात के अनुरूप होना चाहिए जिस पर उन्होंने जोर दिया है कि India के विकसित राष्ट्र बनने के सफर के लिए बिहार और Odisha (अंग, बंग, कलिंग) के साथ-साथ एक मजबूत बंगाल भी जरूरी है.
इस क्षेत्र के रणनीतिक महत्व पर जोर इस विश्वास को दिखाता है कि इसमें दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रवेश द्वार बनने की क्षमता है. यह इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या राज्य Government निवेश के लिए एक स्थिर और भरोसेमंद माहौल बना पाती है.
नए Chief Minister सुवेंदु अधिकारी के लिए, यह बजट एक Political संदेश देने का भी मौका होगा. ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से हटाने के बाद, उनके प्रशासन को यह साबित करना होगा कि वे प्रभावी ढंग से शासन कर सकते हैं और विकास कर सकते हैं.
बजट को सिर्फ आवंटन और घाटे के नजरिए से ही नहीं देखा जाएगा; यह Government की मंशा के बारे में भी होगा. इसे इस आधार पर परखा जाएगा कि Government इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश को प्राथमिकता देती है या कल्याणकारी योजनाओं पर ज्यादा जोर देती है; क्या वह कर्ज की समस्या से सीधे निपटती है या मुश्किल फैसलों को टालती है.
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एएसएच/डीकेपी