एआई भारत के लिए बड़ा मौका, रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद करेगा : इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स

New Delhi, 16 फरवरी . एआई India के लिए बड़ा मौका है. अगर India को इसमें यूजर की जगह क्रिएटर की भूमिका निभानी है, तो एआई के माध्यम से ऐसे समाधानों को विकसित करना होगा, जिनकी दुनिया में आवश्यकता है. इससे रोजगार के अवसर बढ़ाने में भी मदद मिलेगी. यह जानकारी Monday को इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में एक्सपर्ट्स की ओर से दी गई.

समाचार एजेंसी से बात करते हुए कोरोवर एआई और भारतजीपीटी एआई के संस्थापक और सीईओ अंकुश सभरवाल ने कहा,”मौजूदा समय में जो भी ऐप्स आ रहे हैं उनमें एआई का उपयोग हो रहा है. आगे इसमें और बढ़ोतरी होगी. ऐसे हम सभी धीरे-धीरे एआई के यूजर बनेंगे. ऐसे में एआई India के लिए क्रिएटर बनने का बड़ा अवसर है, क्योंकि इससे सॉल्यूशंस बनाना आसान हो गया है, अब केवल इंजीनियर ही नहीं कोई व्यक्ति भी ऐप बना सकता है. इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं.”

खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के राष्ट्रीय तकनीकी समन्वयक संजय सेठी ने कहा कि यहां सभी संख्या में लोग एआई के प्रभावों को समझने आए हैं. कृषि क्षेत्र में एआई काफी बदलाव ला सकता है. यह मौसम को समझने, खेती के समय सही आवश्यकताओं का अनुमान लगाने और खाद्य श्रृंखला को छोटा करने में काफी मदद कर सकता है. उन्होंने आगे कहा कि आने वाले दो से तीन वर्षों में कृषि क्षेत्र पर एआई का प्रभाव अधिक देखने को मिलेगा.

इस एआई समिट में युवा भी बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं.

युवा इनोवेटर अखिला पसुपुलेटी ने को बताया, “मेरे सॉल्यूशंस का नाम ‘देश के हाथ’है. यह एक एआई-आधारित ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है, जहां हम 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के विभिन्न हस्तशिल्प उत्पाद पेश करते हैं. इससे बिचौलियों की समस्या हल हो जाती है. हम सीधे कारीगरों को लाभ पहुंचाते हैं और ग्राहकों को कारीगरों से जोड़ते हैं.”

एक अन्य युवा सृष्टि पुरोहित कहती, “मेरा इनोवेशन मूल रूप से क्रॉनिक फैटीग सिंड्रोम से पीड़ित रोगियों के लिए एक वेब ऐप है. यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें लगातार थकान, नींद की समस्या रहती है और बहुत दर्द होता है. इसका प्रबंधन करना बहुत कठिन है और India में सामाजिक कारणों के चलते इसे अकसर कमजोरी कहा जाता है. इसलिए मैंने क्रॉनिक फैटीग सिंड्रोम से पीड़ित रोगियों को अपनी स्थिति को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद करने के लिए, मैंने एनरविजन विकसित किया है.”

सुभांगी सिंह ने को बताया, “मेरे इनोवेशन का नाम आईजीएसएस है, जिसका पूरा नाम इंटेलिजेंट ग्रेन स्टोरेज सिस्टम है. दरअसल, India में हर साल लाखों टन अनाज भंडारण के खराब तरीकों के कारण बर्बाद हो रहा है. India में अभी भी बड़ी संख्या में अवैज्ञानिक और अपरंपरागत भंडारण विधियों का प्रयोग किया जा रहा है. इसी समस्या को दूर करने के लिए मैंने अपना आविष्कार, इंटेलिजेंट ग्रेन स्टोरेज सिस्टम बनाया है. यह अनाज भंडारण क्षेत्र की वास्तविक समय में निगरानी करता है और जोखिम का पहले से ही अनुमान लगाकर यह सुनिश्चित करता है कि स्वचालित नियंत्रण प्रणाली लागू हो और पर्यवेक्षक को त्वरित चेतावनी दी जाए ताकि वे समय रहते तत्काल कार्रवाई कर सकें.”

एबीएस/

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