केरल में सर्जिकल लापरवाही के बाद सख्ती, नई गाइडलाइंस से अस्पतालों की जवाबदेही तय

तिरुवनंतपुरम, 20 अप्रैल . केरल की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली ने दो परेशान करने वाली घटनाओं के बाद लोगों का भरोसा फिर से जीतने की दिशा में कदम बढ़ाया है. इन घटनाओं में, अलग-अलग प्रक्रियाओं के दौरान महिला मरीजों के पेट के अंदर सर्जिकल औजार छूट गए थे, जिन्हें बाद में हटाया गया.

लगातार हुई इन लापरवाही ने लोगों में चिंता पैदा कर दी और स्वास्थ्य विभाग को तुरंत कार्रवाई करने पर मजबूर कर दिया.

इसके जवाब में, विभाग ने एक विस्तृत दिशानिर्देश जारी किया है, जिसका उद्देश्य सर्जिकल गलतियों को खत्म करना और सभी अस्पतालों में जवाबदेही को सख्त करना है.

एक मुख्य निर्देश के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि हर मरीज को एक रिस्टबैंड (कलाई बैंड) पहनाया जाए, जिस पर सर्जरी से जुड़ी पूरी जानकारी लिखी हो.

इसके अलावा, जिस खास अंग का ऑपरेशन होना है, उसे ऑपरेशन थिएटर में किसी भी तरह की गलतफहमी से बचने के लिए पहले से ही साफ तौर पर चिह्नित किया जाना चाहिए.

दिशानिर्देश ऑपरेशन थिएटर के अंदर मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर भी सख्त रोक लगाते हैं. इसका कारण यह बताया गया है कि ऑपरेशन के दौरान पूरा ध्यान केंद्रित रहना चाहिए और संक्रमण-मुक्त प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन होना चाहिए.

खास बात यह है कि नए नियम सभी प्रक्रियाओं पर समान रूप से लागू होते हैं, चाहे उनका पैमाना कुछ भी हो. इनमें छोटी-बड़ी, दोनों तरह की सर्जरी शामिल हैं.

सर्जरी से पहले की जांच-पड़ताल की एक विस्तृत प्रक्रिया को अनिवार्य कर दिया गया है. डॉक्टरों और नर्सों के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि मरीजों के इनपेशेंट नंबर और केस रिकॉर्ड पूरी तरह से भरे हुए हों. वार्ड के डॉक्टर और इंचार्ज नर्स को सर्जरी से पहले एक चेकलिस्ट भरने के बाद उस पर हस्ताक्षर करने होंगे. इसके बाद, ऑपरेशन थिएटर की देखरेख करने वाले नर्सिंग अधिकारी द्वारा इस चेकलिस्ट की समीक्षा की जाएगी और उस पर उनके भी हस्ताक्षर लिए जाएंगे.

सभी कदम पूरे होने के बाद ही मरीज को सर्जरी के लिए ऑपरेशन थिएटर में ले जाया जा सकता है. ये दिशानिर्देश सर्जिकल औजारों की जवाबदेही पर भी जोर देते हैं.

अस्पतालों के लिए यह अनिवार्य है कि वे हर सर्जरी से पहले और बाद में सभी सर्जिकल औजारों और इस्तेमाल होने वाली चीजों की पूरी गिनती करें.

सर्जरी शुरू होने से पहले, औजारों के नाम और उनकी संख्या एक व्हाइटबोर्ड पर प्रदर्शित की जानी चाहिए. सर्जरी खत्म होने के बाद, इनकी दोबारा जांच की जाएगी और चेकलिस्ट को संबंधित अधिकारी के पास जमा कराया जाएगा.

अधिकारियों का कहना है कि इस नए ढांचे को इसलिए तैयार किया गया है ताकि जिम्मेदारियों में पूरी स्पष्टता बनी रहे. इससे किसी भी गलती को नजरअंदाज करना या अपनी गलती का ठीकरा किसी और पर फोड़ना मुश्किल हो जाएगा.

चिकित्सा लापरवाही के एक बेहद चौंकाने वाले मामले में, अलाप्पुझा के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय निकालने की सर्जरी) करवाने के लगभग पांच साल बाद, एक 51 वर्षीय महिला के पेट के अंदर से सर्जिकल कैंची मिली थी.

पुन्नाप्रा की रहने वाली उषा जोसेफकुट्टी का 10 मई, 2021 को एक ऑपरेशन हुआ था. तब से, उन्हें लगातार पेट दर्द और पेशाब में खून आने की समस्या हो रही थी. उनकी इस परेशानी का कारण कई सालों तक पता नहीं चल पाया, जब तक कि फरवरी में, एक यूरोलॉजिस्ट की सलाह पर किए गए एक्सरे में यह सामने नहीं आया कि उनके शरीर के अंदर एक ‘मेट्जेनबॉम कैंची’ फंसी हुई है. बाद में फरवरी में एक और सर्जरी करके उस औजार को बाहर निकाला गया, जिससे सर्जिकल प्रोटोकॉल में एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया.

इससे पहले कोझिकोड की रहने वाली हर्षिना के साथ ऐसी ही घटना हुई थी. यह घटना 30 नवंबर, 2017 की है, जब हर्षिना का कोझिकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल में तीसरा सिजेरियन ऑपरेशन हुआ था. ऑपरेशन के दौरान, कथित तौर पर सर्जिकल चिमटी की एक जोड़ी उनके पेट के अंदर ही छूट गई थी.

कई सालों तक उन्हें गंभीर शारीरिक परेशानी और जटिलताओं का सामना करना पड़ा, जिसके बाद आखिरकार सितंबर 2022 में उस औजार का पता चला और उसे बाहर निकाला गया. हर्षिना अभी भी कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं और इस लापरवाही के कारण उन्हें हुई लंबे समय की तकलीफ के लिए जवाबदेही और न्याय की मांग कर रही हैं.

एएसएच/एबीएम

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