कतर में अमेरिकी वीजा का इंतजार कर रहे अफगान नागरिक लौट सकते हैं स्वदेश: अफगान विदेश मंत्रालय

काबुल, 25 अप्रैल . अफगानिस्तान की सत्तारूढ़ तालिबान Government ने Saturday को दावा किया कि देश में कोई सुरक्षा खतरा नहीं है और किसी भी नागरिक को सुरक्षा कारणों से देश छोड़ने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ रहा है. Government ने कहा कि कतर में अमेरिकी वीजा प्रक्रिया का इंतजार कर रहे अफगान नागरिक चाहें तो पूरे भरोसे और शांति के साथ अपने देश लौट सकते हैं.

अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल कहार बल्खी ने यह बयान उन मीडिया रिपोर्टों के जवाब में दिया, जिनमें कहा गया था कि कतर में अमेरिकी वीजा की प्रतीक्षा कर रहे करीब 1100 अफगान नागरिकों को कांगो स्थानांतरित किया जा सकता है.

अफगान मीडिया आउटलेट अमू टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, कतर के कैंप अस सयलियाह (सीएएस) में 1100 से अधिक अफगान नागरिक अनिश्चितता की स्थिति में हैं. इनमें कई ऐसे लोग शामिल हैं, जिन्हें 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद निकाला गया था. इनमें अमेरिकी सेना के पूर्व सहयोगी, दुभाषिए, अफगान विशेष बलों के सदस्य और उनके परिवार शामिल हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी प्रशासन इन लोगों में से कुछ को डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो भेजने पर विचार कर रहा है. हालांकि, कई अमेरिकी सांसदों और सीनेटरों ने इस प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कहा है कि इससे इन लोगों पर नए खतरे मंडरा सकते हैं.

बताया गया कि कतर में रह रहे कई अफगान नागरिक अमेरिका में पुनर्वास के लिए सुरक्षा जांच पूरी कर चुके हैं, लेकिन एक साल से अधिक समय से अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता में हैं.

इन घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया देते हुए काबुल प्रशासन ने कहा कि अफगानिस्तान सभी अफगानों की साझा मातृभूमि है और चिंतित लोगों समेत समान परिस्थिति में रह रहे सभी नागरिकों का स्वागत करता है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बयान में कहा, “अफगानिस्तान में किसी प्रकार का सुरक्षा खतरा नहीं है और किसी को भी सुरक्षा कारणों से देश छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जा रहा है.”

उन्होंने कहा कि जो अफगान नागरिक किसी अन्य देश जाना चाहते हैं, वे उचित समय पर कानूनी और सम्मानजनक माध्यमों से यात्रा कर सकते हैं.

इस सप्ताह की शुरुआत में अफगानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत रिचर्ड बेनेट ने उन खबरों पर चिंता जताई थी, जिनमें कहा गया था कि यूरोपीय अधिकारी अफगान प्रवासियों की वापसी पर चर्चा के लिए तालिबान प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर सकते हैं.

बेनेट ने कहा था कि अफगान नागरिकों की वापसी अंतरराष्ट्रीय कानून के ‘नॉन-रिफाउलमेंट’ सिद्धांत का उल्लंघन हो सकती है, क्योंकि अफगानिस्तान में महिलाओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पूर्व Governmentी कर्मचारियों के खिलाफ व्यापक मानवाधिकार उल्लंघन की आशंकाएं बनी हुई हैं.

डीएससी

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