8.7 करोड़ एमएसएमई दे रहे देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार, 38 करोड़ लोगों की आजीविका का बने सहारा: मंत्री

New Delhi, 27 जून . केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने Saturday को कहा कि देश के 8.7 करोड़ एमएसएमई India की आर्थिक प्रगति को नई गति दे रहे हैं. उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 31 प्रतिशत, विनिर्माण उत्पादन में 35 प्रतिशत और निर्यात में लगभग 45 प्रतिशत का योगदान दे रहा है. साथ ही, यह 38 करोड़ लोगों की आजीविका का भी प्रमुख आधार बन चुका है. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि Prime Minister Narendra Modi के दूरदर्शी नेतृत्व में संभव हुई है.

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में एमएसएमई क्षेत्र को मिलने वाला बैंक लोन 10 लाख करोड़ रुपए था, जो दिसंबर 2025 तक बढ़कर 37 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो Government की उद्यमियों को सशक्त बनाने की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है. शोभा करंदलाजे ने यह बातें ‘एमएसएमई दिवस 2026’ समारोह में भाग लेते हुए कहीं.

उन्होंने बताया कि इस अवसर पर पीएमईजीपी 2.0, एमएसएमई समाधान 2.0, पीएमएस 2.0, एमएसएमई ग्लोबल मार्ट 2.0 और टेस्टिंग सेंटर पोर्टल की शुरुआत की गई है. इन पहलों के माध्यम से उद्यमियों के लिए लोन, बाजार और गुणवत्ता संबंधी सेवाओं तक पहुंच पहले से कहीं अधिक आसान होगी. उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के जरिए Government एमएसएमई क्षेत्र को और मजबूत बनाते हुए ‘विकसित India 2047’ के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है.

शोभा करंदलाजे ने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास इंजन है और उद्यमी इस विकास यात्रा के असली चालक हैं.

उन्होंने कहा कि एमएसएमई मंत्रालय उद्यमियों को डिजिटल सहायता, कौशल विकास, नई तकनीक और विपणन से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है. उन्होंने कहा कि उद्यमी India के विकास में Government के साझेदार हैं. उनके अनुसार, एमएसएमई केवल उद्योगों का समूह नहीं है, बल्कि यह सपनों को साकार करने, नए विचारों को कारोबार में बदलने और मेहनत के जरिए लाखों लोगों का जीवन बदलने का माध्यम है.

एमएसएमई मंत्रालय के सचिव भरत खेड़ा ने कार्यक्रम के दौरान एमएसएमई क्षेत्र की प्रगति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया. उन्होंने India की आर्थिक वृद्धि में इस क्षेत्र की भूमिका पर प्रकाश डाला और मंत्रालय द्वारा संचालित प्रमुख योजनाओं और पहलों की जानकारी दी. साथ ही, उन्होंने एमएसएमई क्षेत्र के विकास में योगदान देने वाले सभी हितधारकों की सराहना की.

इस अवसर पर मंत्रालय ने एमएसएमई पोर्टलों पर बहुभाषी सुविधा भी शुरू की. इसके तहत एमएसएमई से जुड़े सभी प्रमुख पोर्टलों और वेबसाइटों पर 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में सेवाएं उपलब्ध होंगी.

नई सुविधा में एआई-आधारित वॉयस शिकायत निवारण प्रणाली और दस्तावेजों के अनुवाद की सुविधा भी शामिल है. मंत्रालय का कहना है कि इससे डिजिटल सेवाओं तक पहुंच आसान होगी और देश भर के उद्यमियों को अपनी भाषा में Governmentी सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा.

डीबीपी

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