
Bengaluru, 9 दिसंबर . राज्य में किसानों के प्रति उदासीनता दिखाने को लेकर कांग्रेस के नेतृत्व वाली Government पर हमला करते हुए कर्नाटक भाजपा के वरिष्ठ नेता ने Tuesday को आरोप लगाया कि राज्य Government के ढाई साल के शासन के दौरान 2,422 किसानों ने आत्महत्या की है और किसानों की आत्महत्या के मामले में कर्नाटक देश में दूसरे स्थान पर है.
राज्य विधानसभा में बोलते हुए, विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भाजपा नेता आर. अशोक ने कहा, “ढाई साल में 2,422 किसानों ने आत्महत्या की है. इनमें से 32 गन्ना किसान हैं. पूरे देश में कर्नाटक का हिस्सा 22.5 प्रतिशत है, जो दूसरे स्थान पर है. तमिलनाडु का हिस्सा 5.9 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश का आठ प्रतिशत है. यह इस (कांग्रेस) Government का रिपोर्ट कार्ड है.”
उन्होंने कहा, “राज्य में 86.81 लाख किसान परिवार हैं. कुल आबादी का लगभग 70 प्रतिशत किसान परिवारों से है. कृषि विभाग की विजन रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य सुरक्षा बनाए रखी जाएगी. आप चाहे जो भी सवाल करें, Chief Minister सिद्धारमैया कहते हैं कि कर्नाटक में सभी महिला मुखियाओं को हर महीने 2,000 रुपए दिए जाते हैं.”
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में शराब की कीमतें बढ़ाकर परिवारों को पैसे दिए जा रहे हैं.
भाजपा नेता अशोक ने आगे कहा, “वे अभी भी गारंटी के भ्रम से बाहर नहीं निकले हैं. गारंटी के कारण खजाना खाली होने से उन्होंने सूखे से पीड़ित लोगों को राहत नहीं दी गई.”
उन्होंने आरोप लगाया, “Chief Minister सिद्धारमैया ने उत्तर कर्नाटक और किसानों से जुड़े मामलों पर अपने वादे के मुताबिक काम नहीं किया है. इस (कांग्रेस) Government में कोई संवेदनशीलता नहीं है.”
उन्होंने कहा कि Chief Minister सिद्धारमैया बार-बार दावा करते हैं कि यह एक ऐसी Government है जो वादे के मुताबिक काम करती है. उन्होंने कहा कि 20 मई, 2008 को सिद्धारमैया ने कहा था कि किसानों की उपज की कीमत उत्पादन लागत के आधार पर तय की जानी चाहिए और 5,000 करोड़ रुपए का एक रिवॉल्विंग फंड स्थापित किया जाना चाहिए. अपने ढाई साल के कार्यकाल में Chief Minister सिद्धारमैया ने यह काम नहीं किया है.
कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य Government पर निशाना साधते हुए भाजपा नेता अशोक ने कहा, “राज्य विधानसभा चुनावों से पहले घोषणापत्र में कहा गया था कि प्राकृतिक आपदा प्रबंधन के लिए 5,000 करोड़ रुपए का फंड स्थापित किया जाएगा. उत्तर कर्नाटक के कई हिस्सों में बाढ़ आने के बावजूद कोई फंड नहीं दिया गया.”
उन्होंने आगे कहा, “कहा गया था कि लोन चुकाने की तारीख आगे बढ़ा दी जाएगी. कहा गया था कि दूध पर इंसेंटिव बढ़ाकर 7 रुपए कर दिया जाएगा. कहा गया था कि नॉर्थ कर्नाटक के अंगूर किसानों को 500 करोड़ रुपए दिए जाएंगे. लेकिन, इस Government ने किसानों का साथ नहीं दिया है.”
भाजपा नेता अशोका ने कहा, “कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि केंद्र Government गन्ने का दाम तय करती है. Supreme Court ने आदेश दिया है कि राज्य Government को अतिरिक्त रकम देनी चाहिए. राज्य के मंत्रियों या Chief Minister को Prime Minister से अपील करनी चाहिए. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने शिष्टाचार के तौर पर एयरपोर्ट पर Prime Minister Narendra Modi से मुलाकात की और एक अपील सौंपी. उन्होंने यह साबित करने के लिए ऐसा किया कि उन्होंने अपील सौंप दी है.”
इस बीच, Chief Minister सिद्धारमैया ने Tuesday को राज्य विधानसभा में चेतावनी दी कि विपक्ष को झूठे बयान देने से जितना हो सके बचना चाहिए और आलोचना तथ्यों पर आधारित करनी चाहिए. उन्होंने सलाह दी कि जवाब देते समय विपक्षी सदस्यों को भटकना नहीं चाहिए और सदन की गरिमा बनाए रखनी चाहिए.
नॉर्थ कर्नाटक से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान, विपक्ष के नेता आर. अशोका ने आरोप लगाया कि राज्य Government ने किसानों को मुआवजा नहीं दिया है और उसके पास ऐसा करने के लिए फंड नहीं है. इस पर दखल देते हुए, राज्य के राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने जवाब दिया कि पिछले साल 38 लाख किसानों को मुआवजा दिया गया था.
उन्होंने आगे कहा कि केंद्र Government से बार-बार अपील करने के बावजूद, अब तक एक भी रुपया जारी नहीं किया गया है और राज्य ने किसानों को 2,245 करोड़ रुपएका मुआवजा दिया है.
इन टिप्पणियों के बाद, सत्ता पक्ष और विपक्षी पार्टी के नेताओं के बीच तीखी बहस हुई, जिससे स्पीकर यूटी. खादर को सदन को 10 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा.
जब सदन फिर से शुरू हुआ तो Chief Minister सिद्धारमैया ने कहा कि जब विपक्ष के नेता या सदन के नेता राज्य विधानसभा को संबोधित कर रहे हों तो बीच में टोकना गलत है. उन्होंने कहा कि लोग पहले से ही विधायी बहसों की गिरती गुणवत्ता से असंतुष्ट हैं. संवैधानिक नियमों के अनुसार, बोलने वालों को बीच में नहीं टोका जाना चाहिए.
उन्होंने जोर दिया कि जब विपक्षी सदस्य बोल रहे हों तो कोई अनावश्यक रुकावट नहीं होनी चाहिए और सदस्यों को तभी बोलना चाहिए जब वे अपनी बात पूरी कर लें.
सीएम सिद्धारमैया ने जोर देकर कहा कि किसी को भी सदन की कार्यवाही में बाधा नहीं डालनी चाहिए.
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एएमटी/डीकेपी