
New Delhi, 24 अगस्त . मॉरीशस की वित्तीय सेवा एवं आर्थिक योजना मंत्री ज्योति जीतून ने कहा है कि यदि न केवल India और मॉरीशस के बीच, बल्कि व्यापक स्तर पर ब्रिक्स देशों और अफ्रीकी महाद्वीप के साथ भी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार शुरू होता है, तो यह संबंधित अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है. उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक और भू-Political परिस्थितियों में डॉलर जैसी हार्ड करेंसी पर निर्भरता कम करना विकासशील देशों के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर सकता है.
न्यूज एजेंसी को दिए एक विशेष साक्षात्कार में जीतून ने कहा कि वर्तमान समय में भू-राजनीति और वैश्विक दक्षिण को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है, ऐसे में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार का मुद्दा और अधिक प्रासंगिक हो गया है.
उन्होंने बताया कि मॉरीशस बैंक और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पिछले वर्ष भारतीय रुपए और मॉरीशस रुपए के लिए एक क्लियरिंग व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे.
मंत्री ने कहा, “हार्ड करेंसी के बजाय यदि हम अपनी स्थानीय मुद्राओं में सीधे व्यापार कर सकें, तो इससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को लाभ होगा. मॉरीशस बैंक और आरबीआई इस व्यवस्था को लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं. इससे विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता कम होगी और वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में हमारी अर्थव्यवस्थाओं को महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी.”
ज्योति जीतून ने से India की आर्थिक प्रगति और Prime Minister Narendra Modi के ‘विकसित India 2047’ विजन की सराहना करते हुए कहा कि यह मॉरीशस के लिए प्रेरणा का स्रोत है.
उन्होंने कहा, “जब यह यात्रा शुरू हुई थी, तब India दुनिया की 10वीं या 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था. आज India चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और जल्द ही तीसरे स्थान पर पहुंचने की उम्मीद है. India की विकास गाथा स्वयं अपनी कहानी कहती है.”
उन्होंने कहा कि व्यापक आर्थिक सहयोग एवं साझेदारी समझौते (सीईसीपीए) के लागू होने के बाद India और मॉरीशस के बीच व्यापार में वृद्धि हुई है, हालांकि अभी इसमें और विस्तार की काफी संभावनाएं हैं.
मॉरीशस की सीमित आबादी (करीब 12 लाख) का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश का घरेलू बाजार छोटा है, लेकिन व्यापार लगातार बढ़ रहा है. उनके अनुसार, सबसे बड़ा अवसर भारत-मॉरीशस-अफ्रीका आर्थिक गलियारे में मौजूद है.
उन्होंने बताया कि मॉरीशस अफ्रीकी संघ, सदर्न अफ्रीकन डेवलपमेंट कम्युनिटी (एसएडीसी) और कॉमन मार्केट फॉर ईस्टर्न एंड सदर्न अफ्रीका (कोमेसा) का सदस्य है. ऐसे में मॉरीशस India और अफ्रीका के बीच व्यापार और निवेश का एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार बन सकता है.
उन्होंने कहा, “अफ्रीका तेज आर्थिक विकास का अनुभव कर रहा है और निवेश आकर्षित कर रहा है. इसकी बड़ी आबादी इसे India की तरह एक विशाल बाजार बनाती है. हम India और अफ्रीका को और अधिक जोड़ने तथा मॉरीशस को व्यापक व्यापारिक मंच के रूप में विकसित करने पर काम कर रहे हैं.”
हाल ही में दोहरा कराधान बचाव समझौते (डीटीएए प्रोटोकॉल) के अनुमोदन पर बोलते हुए जीतून ने कहा कि इससे निवेशकों को अधिक निश्चितता और विश्वास मिलेगा.
उन्होंने कहा, “अब हमें पूरा विश्वास है कि हम मॉरीशस-India कर संधि और आर्थिक संबंधों को लेकर निवेशकों को स्थिरता, पूर्वानुमेयता और भरोसा प्रदान कर सकते हैं.”
India और मॉरीशस के बीच ऊर्जा सहयोग पर टिप्पणी करते हुए मंत्री ने कहा कि पिछले सप्ताह केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की मॉरीशस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण समझौते किए.
उन्होंने बताया कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन ऑफ मॉरीशस के बीच ईंधन आपूर्ति संबंधी बिक्री और खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं.
ज्योति जीतून ने कहा, “हम इसे सिर्फ व्यापारिक संबंध नहीं, बल्कि एक व्यापक आर्थिक साझेदारी के रूप में देखते हैं, जो मॉरीशस को महत्वपूर्ण ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करती है.”
उन्होंने कहा कि ईरान से जुड़े संघर्ष और बढ़ते भू-Political तनाव के कारण दुनिया भर में ईंधन आपूर्ति और कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. ऐसे समय में India के साथ यह Governmentी स्तर का समझौता मॉरीशस के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.
मंत्री ने कहा, “वैश्विक स्तर पर आपूर्ति शृंखलाएं प्रभावित हुई हैं और लागत बढ़ी है. ऐसे माहौल में इंडियन ऑयल के माध्यम से लागू यह Governmentी व्यवस्था मॉरीशस-India संबंधों का एक अत्यंत मूल्यवान और रणनीतिक हिस्सा है.”
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डीबीपी