Skip to content
Wednesday, 21 October 2026
Hindi Daily Kiran India, Rajasthan, business, sports, tech और अन्य श्रेणियों की ताज़ा हिन्दी ख़बरें।
BREAKING
कानून,राष्ट्रीय

सौरव दास और आशुतोष रांका पर हाईकोर्ट की टिप्पणी- ‘आप जेन-जी नहीं’, सीजेपी नेताओं ने वापस ली याचिका

सौरव दास और आशुतोष रांका पर हाईकोर्ट की टिप्पणी ‘आप जेन जी नहीं’, सीजेपी नेताओं ने वापस ली याचिका

सौरव दास और आशुतोष रांका पर हाईकोर्ट की टिप्पणी- ‘आप जेन-जी नहीं’, सीजेपी नेताओं ने वापस ली याचिका

New Delhi, 21 अक्टूबर . ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका ने न्यायिक हिरासत के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका को Wednesday को वापस ले लिया. विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) की कोर्ट ने उन्हें 21 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ सौरभ और आशुतोष दिल्ली हाईकोर्ट गए थे.

दिल्ली हाईकोर्ट में Wednesday को सुनवाई के दौरान सौरभ दास और आशुतोष रांका की उम्र का जिक्र हुआ. याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने बताया कि सौरव दास 27 साल और आशुतोष रंका 31 साल के हैं. इसके बाद हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, “तो ये जेन-जी नहीं हैं.” जज ने यह भी पूछा कि ‘मिलेनियल्स’ और ‘जेन-जी’ की उम्र का दायरा क्या है?

सौरभ दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत से जुड़ी याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा कि जब शांति भंग होने की आशंका होती है, तो आप कौन हैं, क्या करते हैं और आपकी मंशा क्या है, ये सभी सवाल अहम हो जाते हैं. विरोध करने का अधिकार है, इसमें कोई संदेह नहीं. लेकिन जब मजिस्ट्रेट शांति भंग होने की आशंका पर विचार करता है, तो ये सभी सवाल महत्वपूर्ण हो जाते हैं.

कोर्ट ने कहा कि पहले यह छात्रों का प्रदर्शन था, जिसमें बच्चे और छात्र शामिल थे. अब प्रदर्शन का मुद्दा बदल गया है. लोग वही हैं, लेकिन उनकी मांग और प्रदर्शन का उद्देश्य बदल गया है. इसलिए यह सवाल भी अहम हो जाता है कि आप असल में कौन हैं और आपकी पहचान क्या है? आपका संगठन क्या है? उसका असली मकसद क्या है? कोर्ट ने आगे कहा कि जब शांति भंग होने की आशंका हो, तो इन सभी सवालों का महत्व बढ़ जाता है.

हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी ग्रुप के लोग बार-बार अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन करते हैं, तो यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि उनके प्रदर्शन का उद्देश्य क्या है. साथ ही, कोर्ट ने स्पष्ट करते हुए कहा कि वो इन मुद्दों पर अभी सुनवाई नहीं कर रहा है. अभी अदालत के सामने सीमित सवाल यह है कि बॉन्ड देने की शर्त लागू करने की मांग उचित है या नहीं.

इसके बाद कोर्ट में सौरभ दास और आशुतोष रांका के वकील ने अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी. इसके बाद हाईकोर्ट ने वकील को याचिका वापस लेने की इजाजत दी. इसी के साथ सौरव दास और आशुतोष रांका ने एसईएम कोर्ट के न्यायिक हिरासत के आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल अपनी याचिका वापस ले ली.

–

डीसीएच/

Share