
Mumbai , 18 सितंबर . Chief Minister देवेंद्र फडणवीस ने Friday को कहा कि Maharashtra Government ने सूखे से निपटने और किसानों की सहायता के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं.
उन्होंने बताया कि हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में सूखे की समग्र स्थिति और संभावित वित्तीय सहायता पर औपचारिक रूप से चर्चा की गई.
वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और Samajwadi Party (एसपी) के प्रमुख शरद पवार के पत्र का जवाब दे रहे थे, जिसमें उन्होंने Maharashtra में सूखे जैसी स्थिति के लिए तत्काल राज्य Government के हस्तक्षेप का अनुरोध किया था.
फडणवीस ने कहा कि राज्य Government का कृषि ऋण माफी कार्यक्रम सक्रिय रूप से चल रहा है. तीन लाभार्थियों की सूचियां प्रकाशित की जा चुकी हैं और सभी पात्र किसानों को सहायता मिले, यह सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त सूचियां तैयार की जा रही हैं. राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) प्रोटोकॉल के अनुसार 5 अक्टूबर से किए गए फसल क्षति आकलन (पंचनामा) केंद्रीय वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए प्रस्तुत किए जाएंगे.
उन्होंने आगे कहा कि Government सूखे की स्थिति को गंभीरता से ले रही है और प्रभावित क्षेत्रों में चारा शिविरों और पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था कर रही है. पवार के पत्र का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन इस मुद्दे का Politicalरण किए बिना रचनात्मक सुझावों को शामिल करने के लिए तैयार है.
उपChief Minister एकनाथ शिंदे ने Maharashtra में वर्षा की स्थिति की समीक्षा की और सूखे के कारण फसलों को हुए भारी नुकसान का सामना कर रहे किसानों को आश्वस्त किया. उन्होंने कहा कि Government सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पूर्ण सहायता प्रदान करेगी.
पवार की सूखा घोषित करने और तत्काल राहत सहायता वितरित करने की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए शिंदे ने स्वीकार किया कि विदर्भ और मराठवाड़ा के कुछ हिस्सों में सूखे के कारण खड़ी फसलें जल गई हैं. वास्तविक नुकसान के आधार पर सहायता वितरित करने के लिए फसल नुकसान का आकलन किया जा रहा है.
इससे पहले, पवार ने खड़ी फसलों, पीने के पानी की कमी और पशुओं के लिए चारे की कमी पर चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि इस वर्ष राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश न होने के कारण, किसान समुदाय एक बड़े संकट का सामना कर रहा है. सोयाबीन, कपास, बाजरा, मक्का, अरहर, मूंग और उड़द जैसी खड़ी फसलें सूख गई हैं, और कीटों का प्रकोप भी बढ़ गया है. परिणामस्वरूप, कृषि, पीने के पानी और चारे की आपूर्ति की स्थिति और भी खराब होने वाली है.
उन्होंने औपचारिक प्रक्रियात्मक मानदंडों को दरकिनार करते हुए तत्काल सूखा घोषित करने, सबसे अधिक प्रभावित तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित करने और राहत उपायों को बिना विलंब के लागू करने की मांग की. पवार ने प्रभावित किसानों के लिए कम से कम 50,000 रुपए प्रति हेक्टेयर की वित्तीय सहायता, भूमिहीन कृषि श्रमिक परिवारों के लिए 25,000 रुपए के विशेष सहायता पैकेज और नई फसल के लिए ऋण सुनिश्चित करने हेतु कृषि ऋण माफी को तत्काल लागू करने की भी मांग की.
जमीनी हकीकत बताते हुए पवार ने जोर दिया कि कम वर्षा ने मराठवाड़ा और राज्य के अन्य हिस्सों में फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे किसान संकट में हैं.
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एमएस/