
New Delhi, 28 सितंबर . केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने Monday को उन करदाताओं को बड़ी राहत दी है, जिनके खातों का ऑडिट आयकर अधिनियम, 1961 के तहत अनिवार्य है. बोर्ड ने आकलन वर्ष 2026-27 के लिए आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 कर दी है.
सीबीडीटी द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इस फैसले के साथ टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की निर्धारित तिथि भी 30 सितंबर से बढ़ाकर 21 अक्टूबर 2026 कर दी गई है. इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना अलग से जारी की जाएगी.
पिछले कुछ सप्ताहों से चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संगठनों और कर विशेषज्ञों द्वारा समयसीमा बढ़ाने की मांग की जा रही थी. उनका कहना था कि ऑडिट प्रक्रियाओं को पूरा करने, विभिन्न वित्तीय और कर रिकॉर्ड्स का मिलान करने तथा आवश्यक खुलासों (डिस्क्लोजर) का सत्यापन करने के लिए अधिक समय की आवश्यकता है.
सीबीडीटी का मानना है कि समयसीमा बढ़ाने से करदाताओं और ऑडिटरों को ऑडिट प्रक्रिया पूरी करने तथा आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर आवश्यक रिपोर्ट और रिटर्न दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा. इससे अनुपालन को आसान बनाने और कारोबार सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी.
इस बीच, प्रत्यक्ष कर संग्रह (डारेक्ट टैक्स कलेक्शन) के मोर्चे पर Government को मजबूत वृद्धि मिली है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में 1 अप्रैल से 17 सितंबर के बीच शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 13 प्रतिशत बढ़कर 12.12 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया.
इसी अवधि में सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 15 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 14.3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया. आंकड़े बताते हैं कि कॉरपोरेट टैक्स संग्रह 19.48 प्रतिशत बढ़कर लगभग 5.56 लाख करोड़ रुपए रहा, जबकि व्यक्तिगत आयकर और हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) से प्राप्त कर संग्रह 6 प्रतिशत बढ़कर 6.16 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया.
वहीं सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) संग्रह में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 53 प्रतिशत बढ़कर 40,214 करोड़ रुपए पहुंच गया.
Government द्वारा जारी किए गए टैक्स रिफंड में भी तेज वृद्धि देखी गई. 1 अप्रैल से 17 सितंबर के दौरान रिफंड जारी करने की राशि 29 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 2.2 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच गई.
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डीबीपी