
New Delhi, 11 अक्टूबर . कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से Sunday को से दिल्ली के प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई. इस दौरान सीजेपी के सह-संयोजक और प्रवक्ता आशुतोष रांका ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, केंद्र Government और दिल्ली Police पर कई गंभीर आरोप लगाए.
सीजेपी के सह-संयोजक और प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि पिछले 72 घंटों में देश में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जिनकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. उन्होंने कहा कि यह लड़ाई चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ है. आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी देश को बचाने और आगे बढ़ाने की है लेकिन वह समझौता कर चुका है. उन्होंने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार भाजपा को जिताने के लिए काम कर रहे हैं.
आशुतोष रांका ने कहा कि Saturday को अभिजीत की दादी का निधन हो गया. जब अभिजीत को इस बारे में बताया गया, तब भी दिल्ली Police ने अमानवीय व्यवहार किया.
आशुतोष रांका ने कहा, “जब उन्हें उनकी मौत के बारे में बताया गया तो दिल्ली Police ने बहुत ही अमानवीय तरीके से व्यवहार किया. मुझे शर्म आती है कि इस देश की राजधानी की Police ने इस तरह का व्यवहार किया. जब दिपके को उनकी दादी की मौत के बारे में बताया गया, तब भी दिल्ली Police के जवान कैमरे और माइक लेकर वहां खड़े थे. उन्होंने इस घटना को भी तमाशा बनाने की कोशिश की.”
उन्होंने बताया कि दिपके बार-बार बोलते रहे कि उनके माता-पिता बहुत जल्दी बेहला हो जाते हैं, वे हार्ट के मरीज हैं. उन्होंने Police से कहा कि उन्हें अपने कजन से बात करने दीजिए जो अभी गांव में मौजूद है. वह उससे बात करना चाहते हैं, समझना चाहते हैं कि क्या हुआ लेकिन दिल्ली Police का दिल नहीं पसीजा. उन्होंने कहा कि देश में इस तरह के हालात पैदा हो गए हैं कि किसी के करीबी के जाने के बाद भी लोग पूरी तरह से संवेदनहीन हो गए हैं.
आशुतोष रांका ने कहा, “जिस तरह से चार पूर्व Chief Minister अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, माणिक Government और पिनाराई विजयन कल इस देश के छात्रों और युवाओं के साथ सड़कों पर उतरे, देश के लोगों के लोकतंत्र को बचाने के लिए उन्होंने जो लड़ाई लड़ी, उसके लिए हम उनका दिल से धन्यवाद करते हैं.”
वहीं, सौरव दास ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उन्हें आरकेपुरम थाने में रखा गया था जबकि आशुतोष रांका और अभिजीत दिपके को कहीं और रखा गया था. उन्होंने दावा किया कि तीनों को अलग-अलग जगह रखा गया था.
सौरव दास ने Police द्वारा उनके फोन कब्जे में लेकर सबूत प्लांट किए जाने की आशंका जताई. साथ ही, उन्होंने यह भी आशंका जताई कि Police ने उनके फोन की जांच की है. सौरव दास ने कहा, “देश भर में खुली इमरजेंसी जैसी स्थिति है. ऐसे हालात आखिरी बार 1975 में तानाशाही शासन के दौरान देखे गए थे.”
सौरव दास ने दावा किया कि पिछले तीन से चार दिनों में जो हुआ है, उसमें पूरी दिल्ली को छावनी में बदल दिया गया है. 30 हजार से 40 हजार सुरक्षा कर्मियों को बुलाया गया है. नक्सल प्रभावित इलाकों, बंगाल और कश्मीर से जवानों को, जिसमें सीमा क्षेत्रों से बीएसएफ के जवानों को एयरलिफ्ट करके दिल्ली लाया गया है. 40 हजार से ज्यादा जवानों को तैनात किया गया है और शहर में भारी पाबंदियां लगा दी गई हैं.
उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ी समस्या पैदा कर रहा है. अगर आप प्रदर्शनकारियों और आंदोलन के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाना चाहते हैं, तो आप सिर्फ प्रदर्शनकारियों के लिए ही मुश्किलें नहीं बनाते बल्कि उन आम नागरिकों के लिए भी समस्याएं पैदा करते हैं जो शायद प्रदर्शन में हिस्सा भी नहीं ले रहे हैं. इससे आंदोलन की नकारात्मक छवि बनती है और दिल्ली में ठीक यही हो रहा है. 57 मेट्रो स्टेशन बंद करना, दूसरे राज्यों से दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रोकना, राजधानी एक्सप्रेस को रद्द करना और दुकानों को बंद करना, यह सब आम लोगों को प्रभावित कर रहा है. आज Sunday है और कई लोग सामान्य रूप से अपने काम से बाहर निकलते. दुकानों को बंद करने का क्या मतलब है.
सौरव दास ने दावा किया कि इस Government का अंत नजदीक है. उन्होंने Government पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने का आरोप लगाया.
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वीकेयू/पीएम