
कोच्चि, 26 सितंबर . केरल हाईकोर्ट ने Saturday को राज्य Government के उस फैसले पर सवाल उठाए, जिसमें सीएमआरएल-एक्सलॉजिक मामले में ‘प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट’ के तहत जांच के लिए Enforcement Directorate (ईडी) की सिफारिश पर First Information Report दर्ज करने के बजाय शुरुआती जांच का आदेश दिया गया था.
मामले में पूर्व Chief Minister और विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन, उनकी बेटी वीना विजयन और उनके पति, पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक पीए. मोहम्मद रियास शामिल हैं.
जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने कहा कि कोर्ट इस कानूनी सवाल की जांच करेगा कि क्या राज्य Police के पास पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) की धारा 66(2) के तहत ईडी से जानकारी मिलने के बाद शुरुआती जांच करने का अधिकार था या क्या उसके लिए First Information Report दर्ज करना जरूरी था.
कोर्ट ने ईडी को राज्य Police प्रमुख को भेजा गया कम्युनिकेशन सीलबंद लिफाफे में पेश करने का निर्देश दिया और मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए 29 सितंबर की तारीख तय की.
ईडी ने First Information Report दर्ज करने में देरी का कड़ा विरोध किया. उसके वकील ने कोर्ट को बताया कि एजेंसी ने अपनी जांच के दौरान कथित अपराधों के बारे में जानकारी राज्य Police प्रमुख के साथ साझा की थी और उस जानकारी से ऐसे अपराधों का पता चला जिनकी जांच राज्य Police या विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो को करनी चाहिए थी.
ईडी का कहना था कि ऐसी जानकारी मिलने के बाद राज्य Police के पास शुरुआती जांच करने का कोई विकल्प नहीं था और First Information Report दर्ज की जानी चाहिए थी.
कोर्ट ने खास तौर पर पूछा कि जब पीएमएलए की धारा 66(2) के तहत जानकारी भेजी जाती है, तो क्या राज्य Police के पास First Information Report दर्ज करने के अलावा कोई और विकल्प होता है.
एडवोकेट जनरल के. जाजू बाबू ने शुरुआती जांच का आदेश देने के Government के फैसले का बचाव किया. उन्होंने तर्क दिया कि तुरंत First Information Report दर्ज करने की कोई जरूरत नहीं थी और Police पहले जानकारी की पुष्टि कर सकती थी.
उन्होंने याचिका की स्वीकार्यता पर भी सवाल उठाया और कहा कि यह जनहित याचिका (पीआईएल) जैसी थी, लेकिन इसे निजी स्वार्थ के लिए दायर किया गया था.
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि Government द्वारा गठित क्राइम ब्रांच एसआईटी में विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो को शामिल नहीं किया गया था, जबकि ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत अपराधों का आरोप लगाया था.
ईडी ने कहा कि उसकी जांच में ऐसे लेन-देन का पता चला है, जिनकी संभावित ‘प्रेडिकेट ऑफेंस’ (मूल अपराध) के तौर पर जांच की जानी चाहिए. इसके बाद एजेंसी ने पीएमएलए की धारा 66(2) के तहत राज्य Police प्रमुख को पत्र लिखकर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत कार्रवाई को कहा था.
राज्य Government ने कानूनी सलाह लेने के बाद नौ सदस्यीय क्राइम ब्रांच एसआईटी से 30 दिन की शुरुआती जांच का आदेश दिया था. Government का कहना है कि Supreme Court के फैसलों के मुताबिक, उचित मामलों में First Information Report दर्ज करने से पहले शुरुआती जांच की जा सकती है.
हाईकोर्ट ने पीएमएलए कार्यवाही के लिए ‘प्रेडिकेट ऑफेंस’ (मूल अपराध) की जरूरत का भी जिक्र किया और ईडी से उसकी कार्रवाई के कानूनी आधार के बारे में सवाल किया.
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डीके/एबीएम