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Sunday, 25 October 2026
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‘सिर्फ प्रोडक्ट ही फेल नहीं, उससे जुड़ी कंपनियां भी फेल’, सुधांशु त्रिवेदी का राहुल गांधी पर जोरदार तंज

‘सिर्फ प्रोडक्ट ही फेल नहीं, उससे जुड़ी कंपनियां भी फेल’, सुधांशु त्रिवेदी का राहुल गांधी पर जोरदार तंज

New Delhi, 23 अक्टूबर . भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने Friday को प्रेस कॉन्फ्रेंस में Prime Minister Narendra Modi द्वारा हाल ही में दिए गए बयान ‘राहुल गांधी भारतीय राजनीति के फेल प्रोडक्ट’ पर बात की. इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपने विदेश दौरों के दौरान संदिग्ध लोगों से मिलते हैं और देश लौटने के बाद India विरोधी प्रचार करते हैं.

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “सत्ता से बाहर रहते हुए ‘जल बिन तड़पती मछली’ जैसी कांग्रेस पार्टी है. कांग्रेस पार्टी का मूल मंत्र सत्ता में रहते हुए लूट-खसोट करना, समाज में फूट डालना और भारतीय धर्म व संस्कृति के प्रति दिल में घृणा है. इसके ड्राइविंग इंजन दुर्भाग्य से देश में विपक्ष के नेता भी हैं. यह एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है, शायद देश से कहीं ज्यादा कांग्रेस पार्टी के लिए, क्योंकि वह इस समय देश से चंपत होकर, सूत्रों के अनुसार चंपा में विचरण कर रहे हैं. चंपा वियतनाम का प्राचीन नाम है. वे देश और अपनी खुद की पार्टी, दोनों के लिए एक पहेली बन गए हैं. जहां Prime Minister मोदी का ट्रैक रिकॉर्ड उपलब्धियों से भरा है, वहीं राहुल गांधी का ट्रैक रिकॉर्ड कांग्रेस पार्टी के लिए समस्याओं से भरा हुआ है. आज, कांग्रेस पार्टी ने न केवल अपने भविष्य को खतरे में डाला है, बल्कि देश के संवैधानिक ढांचे को भी दांव पर लगा दिया है.”

BJP MP सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “मैं इस दावे के समर्थन में तथ्य और सबूत पेश करूंगा कि वह (राहुल गांधी) एक ‘फेल प्रोडक्ट’ हैं. हमारी पीढ़ी के लोगों को शायद याद हो या बाकी लोगों ने इसके बारे में पढ़ा हो कि उन्हें दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज में एक राष्ट्रीय स्तर के तीरंदाज और शूटिंग एथलीट के तौर पर दाखिला मिला था. लेकिन, उसके बाद वह अपने निशाने चूकते रहे और देश ने शूटिंग में उनकी कोई खास उपलब्धि नहीं देखी. यह उनकी पहली विफलता थी. इसके बाद, अपने परिवार की परंपरा का पालन करते हुए, वह उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड चले गए. 1996 से 1999 के बीच उन्होंने ‘मॉनिटर’ नाम की एक ब्रिटिश कंपनी के लिए काम किया, जो बाद में बंद हो गई. इसके बाद वह ‘बैकऑप्स’ नाम की दूसरी ब्रिटिश कंपनी में पार्टनर बने और 2003 से 2009 तक उसके डायरेक्टर रहे, बाद में वह कंपनी भी बंद हो गई. यहां सिर्फ ‘प्रोडक्ट’ ही फेल नहीं हो रहा, बल्कि उससे जुड़ी कंपनियां भी फेल हो रही हैं.”

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “2014 में कांग्रेस पार्टी ने राहुल गांधी को अपना अघोषित नेता बना दिया और Lok Sabha में पार्टी अपनी अब तक की सबसे निचली संख्या पर आ गई. बचपन में हम सपना देखते थे कि एक दिन भाजपा अपने दम पर स्पष्ट बहुमत हासिल करेगी और Prime Minister मोदी के नेतृत्व में वह सपना सच हो गया. हम यह भी सोचते थे कि क्या कांग्रेस कभी 100 सीटों से नीचे जा सकती है. 2014 में यह 50 सीटों से भी नीचे आ गई. इसके बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस में कई प्रयोग किए. राहुल गांधी ने यूथ कांग्रेस चुनाव को लोकतांत्रिक करने की बात कही थी. इसके बाद पूरे देश ने देखा कि यूथ कांग्रेस में भीड़ तंत्र और एआई समिट में नग्न प्रदर्शन के अलावा कुछ नहीं दिखा. एक प्रयोग किया कि कांग्रेस के अंदर उम्मीदवार चुनाव के जरिए तय होंगे. यह भी प्रयोग पूरी तरह विफल हुआ. कांग्रेस ने राहुल गांधी को यूथ लीडर के रूप में लॉन्च किया, लेकिन पूरी तरह फेल हुए. 2019 में हिंदू दिखाने का प्रयोग भी फेल हुआ. 2024 में सद्दाम हुसैन जैसी दाढ़ी रखकर India विरोधियों के स्वर में स्वर मिलाया और पूरा प्रयास किया, लेकिन कांग्रेस तीन अंकों में सीट जीत नहीं पाई.”

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “जब-जब राहुल गांधी बाहर जाते हैं तो संदिग्ध लोगों से मिलकर आते हैं. यहां आकर India विरोधी प्रचार करते हैं. पूरे विश्व में उपद्रवी ही प्रदर्शन करते हैं, लेकिन India में ही नेता प्रतिपक्ष Supreme Court और संसद में प्रदर्शन करते हैं. राहुल गांधी अनाप-शनाप बयान देते हैं. संसद की वह घटना याद कीजिए, जब Prime Minister मोदी को गले लगाने के बाद वे (राहुल गांधी) अपनी सीट पर लौटे और अपनी आंखों से एक इशारा किया. क्या आपको लगता है कि यह किसी व्यक्ति से अपेक्षित परिपक्वता, गंभीरता और स्थिरता को दर्शाता है? मैं सबूत दे रहा हूं.

उन्होंने आगे कहा, “पूर्व अमेरिकी President बराक ओबामा ने अपनी किताब ‘अ प्रॉमिस्ड लैंड’ में 2010 की अपनी India यात्रा के दौरान राहुल गांधी से हुई मुलाकात के बारे में लिखा है. अध्याय 24 में उन्होंने गांधी के बारे में लिखा है कि उनमें ‘एक तरह की घबराहट और अपरिपक्वता थी, वे किसी ऐसे छात्र की तरह लग रहे थे, जिसने अपना कोर्स वर्क तो पूरा कर लिया हो और वह शिक्षकों को प्रभावित करने के लिए उत्सुक हो, लेकिन गहराई में देखें तो उसमें उस विषय में महारत हासिल करने की न तो क्षमता थी और न ही कोई जुनून.’”

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ओपी/एबीएम

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