
सलेम, 6 सितंबर . सलेम जिले के कई हिस्सों में मक्का उगाने वाले किसानों ने Governmentी सब्सिडी स्कीम के तहत तमिलनाडु कृषि विभाग द्वारा बांटे गए बीज की एक किस्म के प्रदर्शन पर चिंता जताई है. किसानों का कहना है कि कम पैदावार के कारण कई किसान अपनी खेती की लागत भी नहीं निकाल पाए हैं.
अत्तूर, पेथानाइकेनपालयम, वाज़ापाडी और आसपास के इलाकों के किसानों ने कहा कि पिछले सीजन में सप्लाई की गई किस्म सलेम की मिट्टी और मौसम के हिसाब से सही नहीं थी. उन्होंने Government से मांग की है कि या तो कोई दूसरी किस्म उपलब्ध कराई जाए या फिर पुरानी सब्सिडी व्यवस्था बहाल की जाए, जिसके तहत वे अपनी पसंद के बीज खरीद सकते थे.
सलेम जिला किसान कल्याण संघ के अध्यक्ष वी.एस. गोविंदराज ने बताया कि पिछले साल सब्सिडी वाले बीजों से किसानों को प्रति एकड़ मक्के की सिर्फ 15 बोरियां ही मिलीं जबकि बेहतर प्रदर्शन करने वाली किस्मों से लगभग 40 बोरियां मिलती हैं. उन्होंने कहा कि पहले मक्के की सफल फसल से किसान को लगभग 2 लाख रुपये का मुनाफा हो सकता था. हालांकि, सब्सिडी वाली किस्म का इस्तेमाल करने वाले किसानों को अपना खर्च निकालने में भी मुश्किल हुई. आम तौर पर लगभग 420 रुपये प्रति किलोग्राम की कीमत वाले ये बीज सब्सिडी के बाद किसानों को 320 रुपये में दिए जा रहे हैं.
खबर है कि कई किसान इस सीजन में फिर से वही किस्म खरीदने से हिचकिचा रहे हैं. गोविंदराज ने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर किसानों को चेतावनी दी जा रही है कि अगर उन्होंने बीज खरीदने से इनकार किया, तो Governmentी फायदों के लिए उनकी पात्रता पर असर पड़ सकता है. उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि सीमित शेल्फ-लाइफ वाले ये बीज अगर नहीं बिके, तो इनकी मियाद खत्म हो सकती है.
राज्य ने इस सीजन में सलेम के लिए सब्सिडी वाले मक्के के बीज की 58 टन मात्रा मंजूर की है, जिसमें पेथानाइकेनपालयम ब्लॉक के लिए 18.5 टन शामिल है. इनका वितरण मुख्य रूप से अत्तूर, गंगावल्ली, पेथानाइकेनपालयम, कोलाथूर और थलाइवासल में किया जा रहा है.
हालांकि, कृषि अधिकारियों ने ‘एडवांटा 762’ का बचाव करते हुए कहा कि केंद्र Government ने इसे पांच राज्यों में खेती के लिए मंजूरी दी है. नेशनल सीड्स कॉर्पोरेशन के जरिए सप्लाई किए जाने वाले इन बीजों का वितरण तमिलनाडु के 20 जिलों में किया जा रहा है. अधिकारियों ने बताया कि सलेम के लिए आवंटित बीज लगभग 1,866 हेक्टेयर जमीन के लिए पर्याप्त होंगे और वितरण से पहले हर बैच की जांच की गई थी, जिसमें बीज के अंकुरण का मानक 90 प्रतिशत पाया गया.
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक के. श्रीनिवासन ने पिछले साल कम पैदावार का मुख्य कारण अपर्याप्त बारिश को बताया. उन्होंने कहा कि अनुकूल परिस्थितियों में प्रमाणित एफ 1 किस्म से प्रति एकड़ लगभग 3.5 टन पैदावार मिल सकती है. किसानों द्वारा ‘एडवांटा 762’ खरीदने में हिचकिचाहट दिखाने के बाद विभाग ने सस्ती ‘डीएचएम 206’ किस्म भी उपलब्ध कराई है.
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ओपी/पीएम