समावेशी शिक्षा के लिए 60 हजार स्कूलों व 72 लाख से अधिक शिक्षकों से संवाद

New Delhi, 8 अक्टूबर . विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक देशव्यापी पहल की है. इसके तहत देशभर के स्कूलों में प्रशस्त पोर्टल के माध्यम से समावेशी शिक्षा पर 30 मिनट के जागरूकता एवं अभिमुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की इस पहल में अब तक विभिन्न राज्यों के 60 हजार से अधिक स्कूलों ने भाग लिया है. वहीं, इस अभियान के तहत अब तक 72 लाख से अधिक शिक्षक संवेदनशील बनाए जा चुके हैं. शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य स्कूल में समावेशी वातावरण तैयार करना है. स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने यह शुरुआत इसलिए की है ताकि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की जरूरतों को शिक्षक, विशेष शिक्षक और स्कूल के अन्य कर्मचारी बेहतर तरीके से समझ सकें.

इसके साथ ही बच्चों के लिए सुरक्षित, सुगम और सहयोगपूर्ण माहौल बनाने में स्कूल का हर कर्मचारी अपनी भूमिका निभा सके. व्यावहारिक उदाहरणों और संवादात्मक गतिविधियों के माध्यम से कार्यक्रम को सफल बनाने का प्रयास किया जा रहा है. इनके जरिए स्कूल कर्मचारियों को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के साथ उचित और सम्मानजनक व्यवहार के बारे में जानकारी दी गई. यह कार्यक्रम 12 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है. इसमें स्कूल प्रमुखों, शिक्षकों, विशेष शिक्षकों के साथ-साथ आया, ड्राइवर, क्लर्क कर्मचारी और छात्रावास के वार्डन सहित गैर-शिक्षण कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है.

शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि वे पिछले तीन महीनों से प्रशस्त पोर्टल के माध्यम से सामान्य शिक्षकों को समावेशी शिक्षा के प्रति लगातार जागरूक कर रहे हैं. प्रशस्त एक स्कूल-आधारित डिजिटल माध्यम है, जिसके जरिए दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत आने वाली संभावित दिव्यांगता की स्थितियों वाले बच्चों की प्रारंभिक पहचान में मदद मिलती है. इसमें दो हिस्सों वाली जांच सूची है. इसके जरिए शिक्षक बच्चों में दिखाई देने वाले संकेतों के आधार पर प्रारंभिक जांच कर सकते हैं. इसके बाद विशेष शिक्षक संबंधित मामलों की पुष्टि करते हैं और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया में मदद करते हैं. देशव्यापी अभियान में 60 हजार से अधिक स्कूलों की भागीदारी हुई है.

मंत्रालय के अनुसार, अक्टूबर के दौरान इसमें और अधिक स्कूलों के जुड़ने की उम्मीद है. इस पहल का महत्वपूर्ण संदेश यह है कि समावेशी शिक्षा केवल शिक्षक या विशेष शिक्षक की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे स्कूल की साझा जिम्मेदारी है. स्कूल की कक्षा से लेकर कार्यालय, परिवहन और स्कूल के अन्य सामान्य स्थानों तक बच्चे का हर अनुभव उसके समावेशन को प्रभावित करता है. मंत्रालय के मुताबिक, यह अभियान राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप सभी बच्चों के लिए समान, सुगम और समावेशी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है.

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जीसीबी/डीएससी

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