
नई दिल्ली, 6 अक्टूबर . उपPresident सीपी राधाकृष्णन ने Tuesday को New Delhi के कुतुब इंस्टीट्यूशनल एरिया में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह को संबोधित किया. उन्होंने इस अवसर पर स्नातक छात्रों, उनके अभिभावकों, संकाय सदस्यों और विश्वविद्यालय समुदाय को बधाई दी.
उन्होंने उपस्थित लोगों को ‘नशीली दवाओं के बहिष्कार’ की शपथ दिलाई और मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक प्रदान किए.
सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि अब समय आ गया है कि यह संस्थान संस्कृत अध्ययन के लिए एक अग्रणी अंतरराष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित करे और इसके संस्थापक, पूर्व Prime Minister लाल बहादुर शास्त्री के दृष्टिकोण को साकार करे. शास्त्री जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने कहा कि उनका अमर नारा ‘जय जवान, जय किसान’ मात्र एक नारा नहीं था, बल्कि India के अपनी सीमाओं की रक्षा करने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के संकल्प को दर्शाता था.
उपPresident ने एनएएसी की सर्वोच्च ग्रेड (ए++) प्राप्त करने और भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध क्षेत्रों में अनुसंधान करने के लिए विश्वविद्यालय की सराहना की. उन्होंने कहा कि यद्यपि प्रत्येक भारतीय भाषा ने राष्ट्र को समृद्ध किया है, संस्कृत India की अनेक भाषाओं के मोतियों को एक भव्य माला में पिरोने वाला ‘सुनहरा धागा’ है.
उन्होंने सुभाषितों के माध्यम से परिसर में संस्कृत को जीवित रखने के विश्वविद्यालय के प्रयासों, विद्यापीठ पंचांग के प्रकाशन की 44 साल पुरानी परंपरा और प्राकृत एवं वास्तु शास्त्र सहित शास्त्रीय विषयों के शिक्षण की भी प्रशंसा की.
सीपी राधाकृष्णन ने इस बात पर जोर दिया कि India का विकास उसकी सभ्यतागत विरासत से जुड़ा रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि Prime Minister मोदी के नेतृत्व में कई पहलों ने संस्कृत के पुनरुत्थान और भारतीय ज्ञान प्रणाली के संवर्धन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है. उन्होंने ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ और अष्टदशी योजना का जिक्र करते हुए कहा कि दुर्लभ संस्कृत ग्रंथों को लुप्त नहीं होने देना चाहिए, बल्कि उनका संरक्षण, अध्ययन और भावी पीढ़ियों के लिए सुलभ बनाना चाहिए.
उपPresident ने India की पांडुलिपि विरासत के साथ विद्वतापूर्ण जुड़ाव बढ़ाने का आह्वान करते हुए विश्वविद्यालय के शिक्षकों और छात्रों से अप्रकाशित संस्कृत पांडुलिपियों की खोज, संरक्षण, आलोचनात्मक संपादन और प्रकाशन का बीड़ा उठाने का आग्रह किया. ज्ञान भारतम मिशन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पांडुलिपि संरक्षण और प्रलेखन के लिए 500 करोड़ रुपए के प्रारंभिक कोष के साथ शुरू की गई यह पहल India की विशाल पांडुलिपि विरासत को India और विश्व के लोगों तक पहुंचा रही है.
स्नातक छात्रों को संबोधित करते हुए सीपी राधाकृष्णन ने उनसे आजीवन सीखने और अपने आचार्यों और माता-पिता द्वारा प्रदत्त मूल्यों को आगे बढ़ाने का आग्रह किया. कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में, उन्होंने उनसे संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करने का आह्वान किया.
उपPresident ने युवाओं से मादक पदार्थों के सेवन से दूर रहने और अनुशासन, खेलकूद, अच्छी संगति और सार्थक गतिविधियों को चुनने का आग्रह किया. उन्होंने छात्रों को social media का विवेकपूर्ण और संयमित उपयोग करने, पढ़ने, सीखने, कौशल विकास और वास्तविक संबंध बनाने में समय लगाने की सलाह भी दी.
समारोह के दौरान, उपPresident ने तीन प्रकाशन ‘अम्नाय कल्पतरु’, ‘विद्यामित्रम’ और ‘शोध प्रभा’ (जुलाई-सितंबर 2026) भी जारी किए.
इस समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मुरली मनोहर पाठक, विशिष्ट विद्वान, आचार्य, अधिकारी, संकाय सदस्य, कर्मचारी, छात्र, अभिभावक और संस्कृत प्रेमी उपस्थित थे.
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एएसएच/एबीएम