शी जिनपिंग-ट्रंप की मुलाकात पूरी दुनिया के लिए अहम, बड़े समझौते की उम्मीद कम : अशोक सज्जनहार

New Delhi, 21 सितंबर . पूर्व राजनयिक अशोक सज्जनहार ने चीन के President शी जिनपिंग और अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात को वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण बताया है.

उन्होंने कहा कि अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी और चीन दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. ऐसे में दोनों देशों के नेताओं के बीच होने वाली बातचीत का असर केवल अमेरिका और चीन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ेगा. अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा केवल व्यापार और अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है. दोनों देशों के बीच वैश्विक प्रभाव को लेकर भी होड़ चल रही है. अमेरिका फिलहाल दुनिया की सबसे प्रभावशाली शक्तियों में से एक है, जबकि चीन अपनी आर्थिक और रणनीतिक ताकत बढ़ाकर वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. चीन 2049 तक खुद को बड़ी वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

पूर्व राजनयिक के मुताबिक, शी जिनपिंग और ट्रंप की मुलाकात महत्वपूर्ण जरूर होगी, लेकिन इससे किसी बहुत बड़े समझौते या घोषणा की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए. दोनों पक्ष व्यापारिक संबंधों को खराब नहीं होने देने और आपसी आर्थिक सहयोग बनाए रखने पर जोर दे सकते हैं. अमेरिका की ओर से चीन पर अमेरिकी कृषि उत्पादों, एयरक्राफ्ट और अन्य सामान की खरीद बढ़ाने का दबाव भी रहने की संभावना है.

अमेरिकी टैरिफ नीति का जिक्र करते हुए अशोक सज्जनहार ने कहा कि सीनेटर लिंडसे ग्राहम से जुड़े 100 प्रतिशत टैरिफ के प्रस्ताव जैसे कदम President ट्रंप को बातचीत में महत्वपूर्ण दबाव बनाने का साधन दे सकते हैं. उनके मुताबिक, अमेरिका इस स्थिति का इस्तेमाल अपने पक्ष में बेहतर व्यापारिक समझौता हासिल करने के लिए करने की कोशिश कर सकता है. दूसरी ओर चीन के President शी जिनपिंग की कोशिश हो सकती है कि अमेरिका ताइवान को हथियारों की आपूर्ति कम करे या बंद करे. वहीं, अमेरिका चीन पर रूस और ईरान को लेकर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने के लिए दबाव डाल सकता है, ताकि मौजूदा संघर्षों और तनाव को कम करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सके.

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव पर सज्जनहार ने कहा कि मौजूदा स्थिति काफी जटिल हो गई है. President ट्रंप पहले भी ईरान को लेकर कड़ी चेतावनियां दे चुके हैं, लेकिन आगे वास्तव में क्या कदम उठाए जाते हैं, इसे देखना महत्वपूर्ण होगा. उन्होंने अमेरिकी आर्थिक दबाव का भी जिक्र करते हुए कहा कि कठोर आर्थिक कदमों की चेतावनियों का असर हमेशा अपेक्षा के अनुसार नहीं रहा है.

हूती हमलों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर पूर्व राजनयिक ने कहा कि शिपिंग, पाइपलाइन और रिफाइनरी जैसे महत्वपूर्ण ढांचे पर हमले वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए चिंता पैदा कर सकते हैं. अगर स्थिति और बिगड़ती है तो इसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता और कीमतों पर पड़ सकता है. उन्होंने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए जाने की संभावना का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर भारत, चीन, तुर्किये और हंगरी जैसे देशों पर ऐसे उपाय लागू होते हैं तो वैश्विक तेल बाजार पर दबाव बढ़ सकता है. तेल आपूर्ति में कमी का सबसे गंभीर असर विकासशील देशों पर पड़ सकता है.

उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जिनपिंग और ट्रंप की बातचीत इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, ताइवान, रूस, ईरान और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे जुड़े हुए हैं. दोनों नेताओं की बातचीत से किसी बड़े समझौते की बजाय तनाव कम करने और व्यापारिक संबंधों को नियंत्रण में रखने की दिशा में आगे बढ़ने के संकेत मिल सकते हैं.

–

एएमटी/एबीएम

Leave a Comment