शिवसेना नेताओं ने कांग्रेस पर कसा तंज, कहा- ‘कांग्रेस एक सीट जीतकर जश्न मना रही, पहले आत्ममंथन करे’

Mumbai , 29 अक्टूबर . Maharashtra में विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद शिवसेना के नेताओं ने कांग्रेस पर हमला बोला है. शिवसेना नेताओं ने कांग्रेस की चुनावी स्थिति, उसकी Political रणनीति और नतीजों के बाद जश्न मनाने के तरीके पर सवाल उठाए.
वहीं, शिवसेना के प्रवक्ताओं ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सहयोगियों के बीच चुनावी समन्वय की कमी को भी स्वीकार किया. नेताओं ने कहा कि गठबंधन की एकजुटता बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि आपसी मतभेदों का फायदा विपक्षी दल उठा सकते हैं.
शिवसेना के प्रवक्ता संजय निरुपम ने विधान परिषद चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पांच सीटों के चुनाव परिणामों के बाद भाजपा के एक सहयोगी दल की ओर से शिवसेना पर लगाए गए आरोपों का पार्टी खंडन करती है. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि चुनाव के दौरान तीनों सहयोगी दलों के बीच समन्वय की कमी रही.
निरुपम ने कहा कि गठबंधन में समन्वय स्थापित करने की पहली और सबसे बड़ी जिम्मेदारी बड़े दल की होती है. इस मामले में भारतीय जनता पार्टी की जिम्मेदारी अधिक थी.
उन्होंने कहा कि जब तक तीनों सहयोगी दल एकजुट रहेंगे, तब तक उनकी Political ताकत बनी रहेगी. लेकिन यदि वे एक-दूसरे के खिलाफ लड़ेंगे, तो उनकी कमजोरियां सामने आएंगी. ऐसी स्थिति का फायदा महाविकास अघाड़ी, शरद पवार और कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों के नेता उठा सकते हैं.
संजय निरुपम ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि चार राज्यों में विधान परिषद सदस्यों के चुनाव के दौरान 28 सीटों पर मुकाबला हुआ. कांग्रेस केवल एक सीट जीत पाई, फिर भी पार्टी इस बात का जश्न मना रही है कि वह अपना खाता खोलने में सफल रही.
उन्होंने कांग्रेस के इस तर्क पर भी सवाल उठाया कि पार्टी ने सभी 28 सीटों पर चुनाव नहीं लड़ा था, बल्कि केवल 10 से 11 सीटों पर ही उम्मीदवार उतारे थे. निरुपम ने कहा कि यदि कांग्रेस खुद को एक बड़ी राष्ट्रीय पार्टी मानती है और देश में सत्ता हासिल करने का सपना देखती है, तो उसे सीमित सीटों पर चुनाव लड़ने के कारणों पर विचार करना चाहिए.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को 11 सीटों में से केवल एक सीट मिलना इस बात का संकेत है कि देश के मतदाताओं, विशेषकर शिक्षित और शहरी मतदाताओं ने पार्टी को नकार दिया है. कांग्रेस अपनी हार पर आत्ममंथन करने के बजाय भाजपा की कुछ सीटें कम होने पर अधिक खुश हो रही है. उन्होंने इसे नकारात्मक राजनीति का उदाहरण बताया.
कांग्रेस के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए शाइना एनसी ने भी कहा कि चार राज्यों में हुए चुनावों में 28 सीटों में से कांग्रेस केवल एक सीट जीत सकी. उन्होंने कांग्रेस की बैलेट पेपर संबंधी मांगों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन मुद्दों को उठाने के बावजूद पार्टी का चुनावी प्रदर्शन कमजोर रहा है.
शिवसेना नेता आनंद दुबे ने चुनाव आयोग और Supreme Court के बीच फॉर्म-6 को लेकर उठे सवाल पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि Supreme Court ने चुनाव आयोग से पूछा है कि लोगों से फॉर्म-6 क्यों भरवाया जा रहा है. चुनाव आयोग इस सवाल का जवाब देगा.
उन्होंने कहा कि शिवसेना Government का हिस्सा होने के साथ-साथ एक Political दल भी है, इसलिए Supreme Court और चुनाव आयोग के बीच चल रही बातचीत पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा. दुबे ने विपक्ष को सलाह दी कि यदि उसे कोई आपत्ति है, तो वह अदालत या चुनाव आयोग के समक्ष अपनी बात रखे.
कांग्रेस के जश्न पर प्रतिक्रिया देते हुए दुबे ने आरोप लगाया कि पार्टी का रवैया ऐसा है, मानो उसने सभी 28 सीटें जीत ली हों और भाजपा तथा एनडीए पूरी तरह कमजोर हो गए हों. उन्होंने महात्मा गांधी के नाम का उल्लेख करते हुए कांग्रेस के Political चरित्र और विश्वसनीयता पर सवाल उठाए.
शिवसेना की विधान परिषद सदस्य मनीषा कायंदे ने अमरावती संभाग के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से किरण सरनाइक के दोबारा चुने जाने पर खुशी जताई. उन्होंने कहा कि सरनाइक एक बार फिर शिवसेना की सीट से निर्वाचित हुए हैं. कायंदे ने इस जीत के लिए शिक्षकों का आभार व्यक्त किया और उनके समर्थन को महत्वपूर्ण बताया.
शिवसेना के प्रवक्ता आनंद परांजपे ने कहा कि विधान परिषद के चुनावों में महायुति गठबंधन से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद थी. अगर सही तालमेल होता, तो नतीजे 5-0 रहे होते. दुर्भाग्य से, गठबंधन केवल दो सीटें ही जीत सका, जबकि महा विकास अघाड़ी ने तीन सीटें जीतीं. अगर भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के बीच सही तालमेल होता, तो चुनाव के नतीजे 5-0 होते. सही तालमेल सुनिश्चित करना भाजपा की जिम्मेदारी थी.
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एसएके/एबीएम


