
कोल्लम, 27 सितंबर . India के उपPresident सीपी राधाकृष्णन ने Sunday को केरल के कोल्लम स्थित माता अमृतानंदमयी मठ, अमृतपुरी में माता अमृतानंदमयी देवी के 73वें जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित ‘विश्व सेवा दिनम्’ समारोह में भाग लिया. उन्होंने अम्मा के सेवा, प्रेम और करुणा के संदेश की सराहना करते हुए कहा कि सेवा India की सभ्यतागत चेतना का अभिन्न अंग है.
समारोह के दौरान उपPresident ने मठ की कई मानवीय पहलों का शुभारंभ किया. उन्होंने नेपाल में बाढ़ राहत कार्यों के लिए दो करोड़ रुपए की सहायता राशि India में नेपाल के राजदूत सुरेंद्र थापा को सौंपी. इसके अलावा उन्होंने अमृता अस्पताल, कोच्चि और फरीदाबाद में वंचित वर्ग के लाभार्थियों को निशुल्क सर्जरी के प्रमाण-पत्र तथा मछुआरा परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान की.
उपPresident ने ‘अमृतकुटीरम्’ की 30वीं वर्षगांठ पर प्रकाशित स्मारिका का भी विमोचन किया. यह स्मारिका India और श्रीलंका में 50,000 घरों के निर्माण की उपलब्धि को समर्पित है. इस अवसर पर आश्रम के तीन नए प्रकाशनों, ‘द हनुमान चालीसा’, ‘द ओशन ऑफ ग्रेस’ और ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ का भी विमोचन किया गया.
समारोह को संबोधित करते हुए उपPresident राधाकृष्णन ने कहा कि अम्मा के 73वें जन्मदिवस पर अमृतपुरी में उपस्थित होना उनके लिए ‘गहन सौभाग्य और अपार प्रसन्नता’ की बात है. उन्होंने माता अमृतानंदमयी देवी को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करते हुए राष्ट्रसेवा के लिए उनके दीर्घायु होने की कामना की.
उपPresident ने कोयंबटूर के एक कार्यक्रम का स्मरण करते हुए कहा कि जब उन्होंने अम्मा को वहां आमंत्रित किया था, तब उनके दर्शन और आशीर्वाद के लिए उमड़े हजारों लोगों की लंबी कतार आज भी उनकी स्मृति में है.
अम्मा के जीवन और सेवाकार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उनका जीवन प्रेम, करुणा और नि:स्वार्थ सेवा का संदेश है. उनका जीवन हमें India के उस शाश्वत सत्य की याद दिलाता है, जिसमें सेवा केवल एक कार्य नहीं, बल्कि जीवन जीने की पद्धति और मानवता के साथ एकात्मता की अभिव्यक्ति है.
उन्होंने कहा कि अम्मा ने बचपन से ही अपने आसपास के लोगों की पीड़ा को महसूस किया और भोजन, वस्त्र, स्नेह तथा करुणा के माध्यम से उनकी सहायता की. इस सेवा के मूल में यह आध्यात्मिक समझ निहित है कि सभी प्राणियों में एक ही दिव्य चेतना विद्यमान है.
उपPresident ने स्वास्थ्य सेवा को माता अमृतानंदमयी मठ के मानवीय कार्यों के सबसे प्रेरणादायी आयामों में से एक बताया. उन्होंने कहा कि 1998 से India में 890 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की परोपकारी चिकित्सा सेवाएं प्रदान की गई हैं, जिनसे निशुल्क उपचार और सर्जरी के माध्यम से 64 लाख से अधिक मरीज लाभान्वित हुए हैं.
फरीदाबाद स्थित अमृता अस्पताल के अगस्त 2022 में हुए उद्घाटन को याद करते हुए उन्होंने Prime Minister Narendra Modi के उस कथन का उल्लेख किया, जिसमें अम्मा को ”प्रेम, करुणा, सेवा और त्याग” की प्रतिमूर्ति तथा India की आध्यात्मिक परंपरा की संवाहक बताया गया था.
उपPresident राधाकृष्णन ने कहा कि सेवा का अर्थ भविष्य के लिए अवसरों का निर्माण करना भी है. उन्होंने बताया कि मठ की ओर से विश्वभर में 55,000 से अधिक छात्रवृत्तियां प्रदान की गई हैं. इसके साथ ही टैबलेट आधारित शिक्षा, स्कूल के बाद ट्यूशन, वयस्क साक्षरता और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसी पहलें वंचित समुदायों के लिए नए अवसर पैदा कर रही हैं.
उन्होंने विशेष रूप से अमृताश्री के माध्यम से किए जा रहे महिला सशक्तीकरण के प्रयासों की सराहना की. उन्होंने कहा कि गरीब और कमजोर वर्ग की लगभग 2.5 लाख महिलाओं को स्टार्ट-अप पूंजी, व्यावसायिक प्रशिक्षण और माइक्रोफाइनेंस के माध्यम से सहायता प्रदान की गई है तथा 15,000 से अधिक स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं.
उपPresident ने कहा, ”जब कोई महिला आर्थिक रूप से सशक्त होती है, तो उसका प्रभाव केवल उस महिला तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा परिवार और समुदाय मजबूत होता है.” उन्होंने कहा कि नारी शक्ति का अर्थ केवल भागीदारी नहीं, बल्कि सशक्तीकरण गरिमा, अवसर और नेतृत्व है.
उपPresident ने कहा कि गांव की एक छोटी बच्ची की करुणा से शुरू हुई सेवा की यात्रा आज India और दुनिया भर में लाखों लोगों के जीवन को छूने वाले मानवीय आंदोलन का रूप ले चुकी है.
उन्होंने बेघर लोगों के लिए 50,000 से अधिक घरों के निर्माण, हजारों बच्चों को छात्रवृत्ति, एक लाख से अधिक जरूरतमंद लोगों को पेंशन तथा आजीविका से जुड़ी विभिन्न पहलों का उल्लेख किया.
सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि ये आंकड़े प्रभावशाली हैं, लेकिन इस सेवा की वास्तविक महानता इन आंकड़ों के पीछे मौजूद लोगों के जीवन में है. सेवा को केवल आंकड़ों के संदर्भ में नहीं, बल्कि उससे मानव जीवन में आने वाले परिवर्तन के आधार पर समझा जाना चाहिए.
उपPresident ने कहा कि सेवा की भावना की वास्तविक परीक्षा अक्सर संकट के समय होती है. उन्होंने हिंद महासागर की सुनामी, Gujarat भूकंप, उत्तराखंड बाढ़, केरल बाढ़, कोविड-19 महामारी और वायनाड भूस्खलन जैसी आपदाओं के दौरान मठ द्वारा किए गए राहत एवं मानवीय कार्यों का उल्लेख किया.
उन्होंने केंद्र Government के नमामि गंगे कार्यक्रम में मठ के 100 करोड़ रुपए के योगदान, वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान और सतत ग्रामीण जीवन से संबंधित विभिन्न पहलों की भी सराहना की.
अमला भारतम् अभियान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसके तहत देशभर में बड़ी संख्या में स्वच्छता अभियान चलाए गए हैं. इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र के बिलियन ट्री कैंपेन के अंतर्गत विश्वभर में 10 लाख से अधिक पेड़ लगाए गए हैं.
उपPresident ने कहा कि अम्मा के कार्यों को प्रेरित करने वाली भावना India के सभ्यतागत मूल्यों से गहराई से जुड़ी हुई है. उन्होंने कहा कि सेवा की कोई जाति, पंथ, भाषा, क्षेत्र या राष्ट्रीयता नहीं होती. सेवा केवल एक पहचान को स्वीकार करती है और वह है मानवता. यही विश्व सेवा दिनम् का मूल दर्शन है.
विश्व के सामने मौजूद संघर्ष, मानवीय संकट, प्राकृतिक आपदाओं, विस्थापन, गरीबी, अकेलेपन और पर्यावरणीय चुनौतियों का उल्लेख करते हुए श्री राधाकृष्णन ने कहा कि आज मानवता को केवल तकनीकी प्रगति की आवश्यकता नहीं है. हमें करुणामय प्रगति की आवश्यकता है.
उपPresident ने कहा कि India विकसित India के संकल्प की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. विकास के लिए बुनियादी ढांचा, प्रौद्योगिकी, निवेश, नवाचार और आर्थिक वृद्धि आवश्यक हैं, लेकिन इसके साथ ही विकास का मानवीय चेहरा होना भी उतना ही जरूरी है.
उन्होंने कहा, ”विकसित India की ओर बढ़ते हुए हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि आधुनिकता और हमारे सभ्यतागत मूल्य साथ-साथ आगे बढ़ें.”
उन्होंने ”विकास भी, विरासत भी” को मार्गदर्शक मंत्र बताते हुए कहा कि विकसित India को ऐसा समावेशी India बनाना होगा, जिसमें कोई भी पीछे न छूटे.
अपने संबोधन के अंत में उपPresident ने माता अमृतानंदमयी देवी को श्रद्धापूर्वक प्रणाम किया और कहा कि अम्मा एक चमत्कार हैं और उन्हें समाज तथा राष्ट्र की सेवा में हमारा मार्गदर्शन करते रहना चाहिए. उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह महान सेवा आंदोलन आने वाले समय में भी लाखों लोगों के जीवन को छूता रहेगा और सेवा अधिक शांतिपूर्ण, टिकाऊ तथा करुणामय विश्व की आधारशिला बनेगी.
कार्यक्रम में केरल और तमिलनाडु के Governor राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, केरल के Chief Minister वीडी सतीशन, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी, केरल विधानसभा अध्यक्ष तिरुवंचूर राधाकृष्णन, केरल Government के मंत्री, केरल उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति गोपीनाथ, सांसद एनके प्रेमचंद्रन और शशि थरूर, India में नेपाल के राजदूत सुरेंद्र थापा सहित विधायक, स्वामीजी, श्रद्धालु और स्वयंसेवक उपस्थित थे.
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एएमटी/वीसी