
New Delhi, 31 अगस्त . जनवरी 2027 में आयोजित होने वाले ‘वाइब्रेंट Gujarat ग्लोबल समिट 2027’ की तैयारियों ने गति पकड़ ली है. इसी क्रम में New Delhi में आयोजित कर्टेन रेजर कार्यक्रम के दौरान उद्योग जगत के कई प्रमुख प्रतिनिधियों ने Gujarat को देश के सबसे आकर्षक निवेश गंतव्यों में से एक बताया. उद्योगपतियों का कहना है कि राज्य की उद्योग-अनुकूल नीतियां, तेज निर्णय प्रक्रिया और मजबूत बुनियादी ढांचा इसे निवेशकों की पहली पसंद बना रहे हैं.
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल कुमार मिंडा ने न्यूज एजेंसी से बातचीत में कहा कि वाइब्रेंट Gujarat केवल एक निवेश सम्मेलन नहीं, बल्कि एक ऐसा आर्थिक महोत्सव है जिसने पिछले डेढ़ दशक में देश और दुनिया के निवेशकों को Gujarat से जोड़ने का काम किया है. उन्होंने कहा कि Prime Minister Narendra Modi ने इसकी शुरुआत की थी और तब से यह लगातार विस्तार और सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंच रहा है.
मिंडा ने कहा, “कर्टेन रेजर कार्यक्रम में एक हजार से अधिक उद्योग प्रतिनिधियों और निवेशकों को आमंत्रित किया गया है. जो कंपनियां Gujarat में निवेश बढ़ाना चाहती हैं या नए प्रोजेक्ट स्थापित करने की योजना बना रही हैं, उनके लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है.”
उन्होंने आगे कहा कि धोलेरा में सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश बढ़ रहा है, जबकि साणंद में मारुति के नए ऑटोमोबाइल संयंत्र जैसी परियोजनाएं पूरे औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेंगी.
उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) India के विनिर्माण क्षेत्र की रीढ़ की हड्डी हैं और बड़े निवेशों के साथ इन इकाइयों को भी विस्तार के नए अवसर मिलेंगे. मिंडा ने Gujarat Government की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और तेज निर्णय लेने की क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि राज्य निवेशकों के लिए सकारात्मक और आशावादी माहौल प्रदान कर रहा है.
वहीं, डीसीएम श्रीराम लिमिटेड के चेयरमैन एवं सीनियर मैनेजिंग डायरेक्टर अजय एस. श्रीराम ने से बात करते हुए कहा कि वाइब्रेंट Gujarat ने वर्षों से राज्य को वैश्विक निवेश मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाई है. उन्होंने कहा कि आज हर राज्य निवेश आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा में है, ऐसे में Gujarat अपनी नीतियों और औद्योगिक माहौल के कारण अलग पहचान बनाए हुए है.
उन्होंने कहा, “उनकी कंपनी पिछले तीन दशकों से Gujarat में काम कर रही है. शुरुआत में स्थापित 100 टन क्षमता वाली कास्टिक सोडा इकाई आज बढ़कर 2,250 टन क्षमता तक पहुंच चुकी है. कंपनी ने राज्य में कई मूल्यवर्धित व्यवसाय विकसित किए हैं और आगे भी विस्तार की बड़ी योजनाएं हैं.”
अजय श्रीराम ने आगे कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में कंपनी ने Gujarat में लगभग 5,000 करोड़ रुपए का निवेश किया है. अब अगले चार से पांच वर्षों के दौरान सहयोगी कंपनियों और भागीदारों के साथ मिलकर 8,000 से 10,000 करोड़ रुपए तक अतिरिक्त निवेश करने की योजना पर काम किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि रोजगार सृजन और आर्थिक विकास किसी भी देश की प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इसी सोच के साथ कंपनी Gujarat में अपने कारोबार का विस्तार जारी रखेगी.
इसके अलावा, टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एवं प्रबंध निदेशक (एमडी) संजय बंगा ने से कहा कि टाटा पावर का Gujarat के साथ लंबे समय से मजबूत संबंध रहा है और कंपनी लगातार वाइब्रेंट Gujarat जैसे आयोजनों का हिस्सा रही है.
उन्होंने बताया कि Gujarat में कंपनी की 4,000 मेगावाट क्षमता वाली मुंद्रा परियोजना राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. इसके अलावा टाटा पावर के पास राज्य में लगभग 700 मेगावाट की सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाएं भी हैं.
संजय बंगा ने आगे से कहा कि Gujarat Government ने हाल ही में कंपनी को 3 गीगावाट अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के विकास के लिए भूमि आवंटित की है. उन्होंने राज्य Government के सहयोग और उद्योग समर्थक नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान आने वाली चुनौतियों का समाधान तेजी से किया जाता है, जिससे निवेशकों का विश्वास मजबूत होता है.
उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी ने Gujarat में एक संभावित जगह की पहचान की है, जहां तकनीकी और वाणिज्यिक व्यवहार्यता का अध्ययन किया जा रहा है. यदि सभी परीक्षण सफल रहते हैं, तो टाटा पावर Gujarat Government के सहयोग से राज्य में और निवेश करेगी तथा परमाणु ऊर्जा परियोजना पर भी काम आगे बढ़ाएगी.
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डीबीपी