वसई-विरार में भक्ति और आस्था के साथ डेढ़ दिन के गणपति बप्पा को विदाई, 12987 प्रतिमाओं का विसर्जन

वसई-विरार, 16 सितंबर . गणपति बप्पा मोरया के जयघोष और श्रद्धा के माहौल के बीच वसई-विरार शहर महानगरपालिका क्षेत्र में डेढ़ दिन के गणपति बप्पा को भावपूर्ण विदाई दी गई. Tuesday को कुल 12,987 गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया. इस दौरान पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए अधिकांश प्रतिमाओं का विसर्जन कृत्रिम तालाबों में कराया गया.

महानगरपालिका द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, कुल विसर्जित प्रतिमाओं में से 11,974 गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन कृत्रिम तालाबों में किया गया. इनमें 11,847 घरेलू और 127 सार्वजनिक गणेश प्रतिमाएं शामिल थीं.

इसके अलावा जेटी, घूमते हौद और बंद पत्थर खदानों में कुल 1,013 प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ. इनमें 1,009 घरेलू और 4 सार्वजनिक गणेश प्रतिमाएं शामिल रहीं.

पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए वसई-विरार महानगरपालिका ने इस वर्ष व्यापक तैयारियां की थीं. शहर में 128 कृत्रिम विसर्जन तालाब, 2 बंद पत्थर खदानें, 5 जेटियां तथा 9 प्रभागों में 18 घूमते हौद उपलब्ध कराए गए थे.

विसर्जन स्थलों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंडप, आरती स्थल, प्रकाश व्यवस्था, मूर्ति संग्रह केंद्र, निर्माल्य कलश, चिकित्सा सहायता कक्ष और cctv निगरानी जैसी विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं.

पूरी व्यवस्था महापौर अजीव पाटील और आयुक्त पृथ्वीराज बीपी के मार्गदर्शन में की गई. अतिरिक्त आयुक्त संजय हेरवाडे और दीपक सावंत ने व्यवस्थाओं की निगरानी की.

महापौर अजीव पाटिल, उप-महापौर मार्शल लोपिस तथा आयुक्त पृथ्वीराज बीपी ने विभिन्न विसर्जन स्थलों का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया. वहीं सभागृह नेता प्रफुल्ल साने, स्थायी समिति सभापति प्रवीण शेट्टी, विपक्ष के नेता मनोज पाटिल सहित कई जनप्रतिनिधि भी विभिन्न स्थलों पर मौजूद रहे.

नागरिकों की सुविधा के लिए प्रत्येक विसर्जन स्थल का क्यूआर कोड आधारित गूगल लोकेशन उपलब्ध कराया गया था. वहीं बंद पत्थर खदानों में प्रतिमा विसर्जन के लिए कन्वेयर बेल्ट की विशेष व्यवस्था भी की गई थी. विसर्जन की प्रक्रिया Wednesday सुबह 6 बजे तक जारी रही.

महानगरपालिका ने बताया कि इस वर्ष शाडू मिट्टी से बनी पर्यावरण अनुकूल गणेश प्रतिमाओं की संख्या भी उल्लेखनीय रही. प्रशासन ने नागरिकों से आगामी पांच दिवसीय गणपति, गौरी विसर्जन, सात दिवसीय गणपति तथा अनंत चतुर्दशी के अवसर पर भी कृत्रिम तालाबों को प्राथमिकता देने और प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण में सहयोग करने की अपील की है.

वसई-विरार में इस बार गणेशोत्सव के दौरान श्रद्धा और उत्साह के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी प्रमुखता से देखने को मिला.

एएमटी/डीकेपी

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