
New Delhi, 9 सितंबर . केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने Wednesday को कहा कि India अपने लागत लाभ का फायदा उठाकर रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) के क्षेत्र में करीब 12 लाख करोड़ रुपए के बड़े अवसर हासिल कर सकता है. इसके लिए Governmentी समर्थन को उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों की क्षमताओं के साथ जोड़ने की जरूरत है.
social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर गोयल ने कहा कि India में शोध की लागत स्विट्जरलैंड या यूरोप की तुलना में करीब पांचवें या छठे हिस्से के बराबर हो सकती है. यह लागत लाभ India को वैश्विक इनोवेशन हब बनाने की दिशा में बड़ा अवसर प्रदान करता है.
उन्होंने कहा कि अगर Government करीब 1 लाख करोड़ रुपए के निवेश के साथ आरएंडडी कार्यक्रम शुरू करती है और उद्योग जगत भी इसमें बराबर का योगदान देता है, तो India अपने मेडिकल कॉलेजों, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) और अन्य उत्कृष्टता केंद्रों की क्षमताओं का इस्तेमाल करके 10-12 लाख करोड़ रुपए तक का शोध कार्य कर सकता है.
गोयल ने ‘एक्स’ पर साझा किए गए एक वीडियो में कहा, “अगर उद्योग बराबर का योगदान देता है और हम अपने अकादमिक संस्थानों का इस्तेमाल करते हैं, तो हम वास्तव में 10-12 लाख करोड़ रुपए का रिसर्च एंड डेवलपमेंट कर सकते हैं.”
उन्होंने India में उत्पाद डिजाइन, क्लीनिकल ट्रायल और चिकित्सा उपकरणों के निर्माण जैसे क्षेत्रों में मौजूद संभावनाओं का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि लागत में यह अंतर India को वैश्विक रिसर्च और इनोवेशन के लिए एक आकर्षक केंद्र बना सकता है.
गोयल इससे पहले भी India के हेल्थकेयर और फार्मास्युटिकल उद्योग से जेनेरिक दवाओं के क्षेत्र में मिली सफलता से आगे बढ़कर रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन पर अधिक ध्यान देने का आह्वान कर चुके हैं.
सितंबर की शुरुआत में India हेल्थ ग्लोबल एक्सपो 2026 को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि India को मजबूत और वैश्विक स्तर पर एकीकृत हेल्थकेयर सप्लाई चेन विकसित करने के साथ एक भरोसेमंद हेल्थकेयर साझेदार के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत करनी चाहिए.
उन्होंने कहा था, “दुनिया की फार्मेसी” के रूप में पहचाने जाने वाले India के पास नई दवाओं, बायोसिमिलर्स और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में विस्तार करने का बड़ा अवसर है.
गोयल ने फार्मास्युटिकल क्षेत्र से आरएंडडी और इनोवेशन को बढ़ावा देने वाली Governmentी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का भी आग्रह किया. इनमें रिसर्च एंड डेवलपमेंट इनोवेशन फंड जैसी पहल शामिल हैं.
उन्होंने कहा कि अगर India को 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनना है, तो उसे अपने उत्पाद खुद विकसित करने और उनका पेटेंट कराने की दिशा में आगे बढ़ना होगा.
गोयल ने एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) और प्रमुख शुरुआती कच्चे माल के क्षेत्र में घरेलू उत्पादन क्षमता को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया. उन्होंने वर्तमान में आयात किए जाने वाले उत्पादों के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने की बात कही.
उन्होंने कहा कि Government बल्क ड्रग पार्क और 100 नए औद्योगिक पार्क विकसित कर रही है. इन पार्कों में फार्मास्युटिकल और हेल्थकेयर कंपनियों के लिए समर्पित क्षेत्र उपलब्ध कराए जा सकते हैं.
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एबीएस