रेजीनगर उपचुनाव से पहले हुमायूं कबीर ने पुलिस पर लगाए पक्षपात के आरोप

New Delhi, 15 सितंबर . पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा के बाद Political माहौल गर्म हो गया है. आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) अध्यक्ष और रेजीनगर के विधायक हुमायूं कबीर ने Police प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि वह Wednesday को हाईकोर्ट में रिट पिटीशन दाखिल करेंगे.

हुमायूं कबीर ने एक हालिया गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर कोई कानून या Police व्यवस्था के खिलाफ काम करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई करना Police का अधिकार है. इसलिए वह गिरफ्तारी के मामले पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे.

हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि उपचुनाव की घोषणा के बाद प्रशासन और Police उनके तथा उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को निशाना बना रही है. उन्होंने कहा कि रेजीनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव घोषित होने के बाद सागरपाड़ा, रेजीनगर और बेलडांगा थाना क्षेत्रों में केवल उनके समर्थकों पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि अन्य Political दलों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया जा रहा.

हुमायूं कबीर ने आरोप लगाया कि जिले के Police अधीक्षक निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहे हैं. भाजपा जो कह रही है, Police उसी के अनुसार कार्रवाई कर रही है और Governmentी ताकत का इस्तेमाल लोगों पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी Political दलों और उम्मीदवारों को शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव लड़ने और प्रचार करने का समान अधिकार होना चाहिए. इसी संदेश को वह चुनाव आयोग और देश की सभी Political पार्टियों तक पहुंचाना चाहते हैं.

हुमायूं कबीर ने यह भी कहा कि वह इस मामले को लेकर Wednesday को हाईकोर्ट जाएंगे और अपनी रिट याचिका दायर करेंगे. उनका कहना है कि चुनाव लड़ना, प्रचार करना और मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लेना सभी नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है.

भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने बिहार के बांकीपुर उपचुनाव का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि वहां भाजपा के वरिष्ठ नेता और कई बार विधायक रह चुके उम्मीदवार चुनाव हार गए थे. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि प्रशासनिक मशीनरी से चुनाव जिताए जा सकते हैं, तो भाजपा वहां क्यों हार गई.

कबीर ने कहा कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होने चाहिए तथा किसी भी दल को प्रशासनिक दबाव के जरिए फायदा पहुंचाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए.

केके/वीसी

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