
New Delhi, 13 अक्टूबर . विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं के Supreme Court की ओर मार्च करने और केरल कांग्रेस की ओर से मुख्य न्यायाधीश को लेकर की गई टिप्पणी की आलोचना की. इसके अलावा, उन्होंने प्रदर्शनकारियों की तुलना भगवान शिव की बारात से किए जाने पर भी आपत्ति जताई और कांग्रेस नेतृत्व से माफी मांगने को कहा. बंसल ने आरोप लगाया कि विपक्ष अपने प्रदर्शन के जरिए न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है. उसकी गतिविधियां लोकतांत्रिक और संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं हैं.
विनोद बंसल ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि यदि Supreme Court किसी पक्ष की बात स्वीकार नहीं करता या मुलाकात के लिए समय नहीं देता, तो बड़ी संख्या में लोग अदालत की ओर मार्च करते हैं. इतनी बड़ी भीड़ के साथ Supreme Court की रजिस्ट्री तक पहुंचना अप्रत्याशित घटना है. क्या विपक्ष शक्ति प्रदर्शन के जरिए सर्वोच्च न्यायालय पर दबाव बनाना चाहता है. इस तरह की गतिविधियां न्यायपालिका की सर्वोच्चता को चुनौती देने जैसी हैं. संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सम्मान बनाए रखना जरूरी है और Political विरोध के दौरान भी लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन होना चाहिए.
वीएचपी प्रवक्ता ने केरल कांग्रेस की उस पोस्ट की भी निंदा की, जिसमें मुख्य न्यायाधीश को इस्तीफा देने की बात कही गई थी. उन्होंने इस्तेमाल की गई भाषा पर आपत्ति जताते हुए कहा कि देश के मुख्य न्यायाधीश न्याय व्यवस्था के सर्वोच्च पद पर हैं और उनके प्रति इस तरह की टिप्पणी उचित नहीं है. बंसल ने कांग्रेस से सवाल किया कि वह किस आधार पर मुख्य न्यायाधीश के इस्तीफे की मांग कर रही है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को इस मामले में माफी मांगनी चाहिए. कांग्रेस पहले शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री और Prime Minister को निशाना बनाती रही है और अब मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को लेकर भी विवादित टिप्पणियां कर रही है.
विनोद बंसल ने प्रदर्शनकारियों की तुलना भगवान शिव की बारात और उनके तांडव से किए जाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि हिंदू आस्था और विश्वास से जुड़े प्रतीकों का इस तरह इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से इस टिप्पणी के लिए माफी मांगने की मांग करते हुए कहा कि Political विरोध के लिए धार्मिक आस्थाओं का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए. भगवान शिव की बारात एक पवित्र धार्मिक प्रतीक है और उसकी तुलना Political प्रदर्शन से करना अनुचित है.
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की गतिविधियां देश में अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश का हिस्सा हैं. बांग्लादेश और नेपाल की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए वीएचपी प्रवक्ता ने कहा कि India में ऐसी स्थिति स्वीकार नहीं की जानी चाहिए. उन्होंने Government और जनता से इस तरह की गतिविधियों पर ध्यान देने की अपील की. उन्होंने आगे कहा कि संविधान और लोकतंत्र की बात करने वाले Political दलों को स्वयं भी संवैधानिक प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का सम्मान करना चाहिए.
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पीएसके