
New Delhi, 30 सितंबर 2026 . Prime Minister Narendra Modi के दूरदर्शी नेतृत्व में केंद्र Government ने देश के करोड़ों अन्नदाताओं के आर्थिक सशक्तिकरण और उनकी आय में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय कैबिनेट बैठक में रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए सभी 6 अनिवार्य फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भारी बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए इसे देश के किसानों के हित में लिया गया ऐतिहासिक और क्रांतिकारी निर्णय बताया.
Union Minister शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि Prime Minister मोदी की किसान हितैषी नीतियों, वैज्ञानिकों के शोध और किसानों के अथक परिश्रम से आज India खाद्यान्न सुरक्षा के साथ-साथ पोषण सुरक्षा और पूर्ण आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से अग्रसर है. एक जमाना था जब देश आयातित गेहूं (पीएल-480) पर निर्भर था, लेकिन आज देश के अन्न भंडार लबालब भरे हुए हैं. कृषि मंत्री ने रेखांकित किया कि देश की 46 प्रतिशत आबादी की आजीविका कृषि पर आधारित है और 86 प्रतिशत किसान छोटे व सीमांत हैं, इसलिए Government का मूल ध्येय केवल उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि किसानों को उनकी मेहनत का पूरा और लाभकारी मूल्य दिलाना है.
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि Prime Minister Narendra Modi जी के नेतृत्व में Government का स्पष्ट नीतिगत फैसला है कि किसानों को उनकी औसत उत्पादन लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत या उससे अधिक का लाभ मिलना चाहिए. इसी क्रम में रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए घोषित एमएसपी में अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत पर 50 प्रतिशत से लेकर 106 प्रतिशत तक का मार्जिन दिया गया है. इसमें किसानों को सबसे अधिक मार्जिन गेहूं पर 106 प्रतिशत, रेपसीड एवं सरसों पर 96 प्रतिशत और मसूर पर 92 प्रतिशत सुनिश्चित किया गया है, जिससे किसानों की शुद्ध आय में सीधा इजाफा होगा.
कैबिनेट निर्णय के अनुसार सभी 6 रबी फसलों की संशोधित एमएसपी दरें और वृद्धि इस प्रकार निर्धारित की गई हैं: कुसुम: सबसे अधिक 675 रुपए प्रति क्विंटल की भारी वृद्धि, नई एमएसपी 7,215 रुपए प्रति क्विंटल. रेपसीड एवं सरसों: 413 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि, नई एमएसपी 6,613 रुपए प्रति क्विंटल. मसूर 390 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि, नई एमएसपी 7,390 रुपए प्रति क्विंटल. जौ: 136 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि, नई एमएसपी 2,286 रुपए प्रति क्विंटल. चना : 83 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि, नई एमएसपी 5,958 रुपए प्रति क्विंटल. गेहूं : 25 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी, नई एमएसपी 2,610 रुपए प्रति क्विंटल.
कांग्रेस नीत यूपीए Government के 10 वर्षों के कार्यकाल से तुलना करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यूपीए के 10 वर्षों (2004-05 से 2013-14) में 6 प्रमुख रबी फसलों की एमएसपी खरीद पर कुल 2.65 लाख करोड़ रुपए का भुगतान किसानों को किया गया था. वहीं, मोदी Government के कार्यकाल (2014-15 से 2025-26) में यह राशि तीन गुना से भी अधिक बढ़कर 8.36 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई है. इसी तरह रबी खरीद की कुल मात्रा भी यूपीए के समय के 2,302 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर मोदी Government में 3,921 लाख मीट्रिक टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है.
कृषि मंत्री ने बताया कि कांग्रेस Government के 10 वर्षों में देश में केवल 6 लाख मीट्रिक टन दलहन की खरीद की गई थी, जबकि मोदी Government में यह 35 गुना बढ़कर 2 करोड़ 20 लाख मीट्रिक टन के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुकी है. उन्होंने कहा कि देश वर्तमान में लगभग 60 लाख मीट्रिक टन दालों का आयात करता है और कनाडा जैसे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है. इस विदेशी निर्भरता को समाप्त करने और ‘राष्ट्रीय दलहन मिशन’ को गति देने के लिए ही मसूर (390/क्विंटल) और चना (83/क्विंटल) की एमएसपी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है.
शिवराज सिंह ने बताया कि घरेलू स्तर पर दलहन उत्पादन को तेजी से बढ़ाने के लिए कृषि मंत्रालय ने ‘राइस फेलो एरिया’ (धान कटाई के बाद खाली पड़े रहने वाले खेत) के उपयोग की विशेष योजना बनाई है. धान कटने के बाद जो जमीन खाली रह जाती है, उसमें किसानों को दलहनी फसलें लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. मोदी Government दलहन मिशन के अंतर्गत ऐसे किसानों को उन्नत बीज, तकनीकी परामर्श और कई तरह की वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है ताकि दलहन का रकबा तेजी से बढ़ सके.
शिवराज सिंह ने बताया कि खाद्य तेलों के आयात बिल को कम करने और देश को तिलहन में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सरसों और रेपसीड के समर्थन मूल्य में 413 रुपए प्रति क्विंटल की मजबूत बढ़ोतरी की गई है. इसके साथ ही असिंचित, कम उपजाऊ और विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों में पैदा होने वाली कुसुम (करड़ी) की फसल को बढ़ावा देने के लिए सबसे ज्यादा 675 रुपए प्रति क्विंटल का इजाफा किया गया है, जिससे दूरदराज और सीमांत क्षेत्रों के किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित हो सके.
कृषि मंत्री श्री चौहान ने रेखांकित किया कि एक समय India जौ के मामले में आत्मनिर्भर था, लेकिन घरेलू उत्पादन घटने के कारण वर्ष 2025-26 में देश को 1.13 लाख मीट्रिक टन जौ का आयात करना पड़ा. चूंकि जौ बेहद कम पानी में तैयार होने वाली टिकाऊ फसल है, इसलिए किसानों को इसके उत्पादन के लिए प्रेरित करने हेतु इसकी एमएसपी में 136 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि कर इसे 2,286 रुपए प्रति क्विंटल किया गया है.
शिवराज सिंह ने बताया कि कृषि मंत्रालय ने सभी राज्यों के अधिकारियों और मंत्रियों के साथ गहन विचार-विमर्श और दक्षिण, मध्य व उत्तर क्षेत्रों में सम्मेलनों के बाद ‘स्टेट-स्पेसिफिक रबी प्लान’ तैयार किया है. Maharashtra और कर्नाटक जैसे राज्यों के लिए, जहां सूखे की स्थिति है, सूखा-प्रतिरोधी फसलों और विशेष उपायों की योजना बनाई गई है. वहीं Madhya Pradesh, बिहार, छत्तीसगढ़, Jharkhand और पश्चिम बंगाल जैसे पर्याप्त जल उपलब्धता वाले राज्यों के लिए सघन उत्पादन केंद्रित रबी रणनीति लागू की जा रही है.
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व में केंद्र Government का हर कदम अन्नदाता के कल्याण, उनके जीवन स्तर में सुधार और देश को कृषि क्षेत्र में वैश्विक महाशक्ति बनाने के लिए समर्पित है.
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एएमटी/डीकेपी