यूपी में कांग्रेस को मिली मजबूती, ‘आप’ महिला विंग की प्रमुख और बीएसपी नेता समेत कई दिग्गज हुए शामिल

New Delhi, 8 अक्टूबर . उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा सियासी बल मिला है. अलग-अलग Political दलों के कई प्रमुख नेता और समाजसेवी Thursday को कांग्रेस में शामिल हो गए. दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने सभी को औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता दिलाई.

कांग्रेस में शामिल होने वालों में सबसे बड़ा नाम आम आदमी पार्टी की महिला विंग की उत्तर प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य नीलम यादव का है. नीलम यादव लंबे समय से यूपी में ‘आप’ के महिला संगठन को संभाल रही थीं. इसके अलावा गाजियाबाद से बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के पूर्व उम्मीदवार परमानंद गर्ग, India Government के पूर्व अधिकारी दुर्गा प्रसाद और बिजनौर के नूरपुर से बुनकर समुदाय के बड़े प्रतिनिधि और समाजसेवी हाजी इमामुद्दीन अंसारी भी कांग्रेस में शामिल हुए हैं.

इन नेताओं के कांग्रेस में आने को पार्टी यूपी में संगठनात्मक मजबूती के तौर पर देख रही है. नीलम यादव के आने से महिला वोट बैंक और शहरी संगठन को मजबूती मिलने की उम्मीद है, जबकि परमानंद गर्ग और हाजी इमामुद्दीन अंसारी के जुड़ने से क्रमशः वैश्य और बुनकर समुदाय में कांग्रेस की पकड़ मजबूत होगी.

नए सदस्यों का स्वागत करते हुए उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने भाजपा Government पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि लोग हर दिन बड़ी संख्या में कांग्रेस से जुड़ रहे हैं, क्योंकि वे भाजपा के ‘कुशासन’ से तंग आ चुके हैं. जनता महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से त्रस्त है और विकल्प के तौर पर कांग्रेस की ओर देख रही है.

गौतम ने कहा कि आज देश के लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए कांग्रेस ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और Lok Sabha में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में ‘इंडिया’ गठबंधन के साथ मिलकर लड़ रही है. उन्होंने कहा कि देश इस समय ‘तानाशाही और अघोषित इमरजेंसी’ जैसी स्थिति का सामना कर रहा है.

जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए उन्होंने केंद्र Government और दिल्ली Police पर भी निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के लिए 10 दिन पहले आवेदन जमा करने का Police का नया निर्देश नागरिकों के मौलिक अधिकारों और बोलने व अभिव्यक्ति की संवैधानिक आजादी का सीधा उल्लंघन है. Government लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने की कोशिश कर रही है.

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एससीएच/डीकेपी

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