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Wednesday, 28 October 2026
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यूपी चुनाव 2027: रामपुर (सदर) का किला उपचुनाव में भाजपा ने ढहाया, 2022 में भाजपा ने जीती थीं सिर्फ दो सीटें

यूपी चुनाव 2027: रामपुर (सदर) का किला उपचुनाव में भाजपा ने ढहाया, 2022 में भाजपा ने जीती थीं सिर्फ दो सीटें

Lucknow, 28 अक्टूबर . उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर Political पार्टियां अपनी तैयारियों में जुटी हुई हैं. रामपुर जिले में विधानसभा सीटों की स्थिति को देखने के लिए पिछले चुनाव के नतीजों पर नजर डालना आवश्यक है.

रामपुर जिले में विधानसभा की पांच सीटें; रामपुर (सदर), स्वार, चमरौआ, बिलासपुर और मिलक हैं. इस जिले की सबसे हाई प्रोफाइल सीट रामपुर (सदर) है.

रामपुर (सदर): इस सीट पर Samajwadi Party के कद्दावर नेता आजम खान का एकछत्र राज रहा है. वे यहां से 10 बार विधायक चुने गए हैं. पिछली बार (2022) आजम खान सपा के टिकट पर करीब 59.72 प्रतिशत वोट हासिल कर एकतरफा जीत दर्ज की थी लेकिन कानूनी मामलों में सजा की वजह से आजम खान की विधायकी रद्द हो गई थी, जिसके बाद यहां उपचुनाव हुआ. उपचुनाव में यह सीट भाजपा के पास चली गई. भाजपा के आकाश सक्सेना (हनी) उपचुनाव में जीत दर्ज कर यहां से विधायक हैं.

रामपुर (सदर) मुस्लिम बहुल इलाका माना जाता है. यहां 50 प्रतिशत से अधिक आबादी मुस्लिम मतदाताओं की है. इसके अलावा यहां वैश्य, पंजाबी, ब्राह्मण, दलित और ओबीसी के मतदाता चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के आजम खान ने भाजपा के आकाश सक्सेना को 55,141 वोटों से हराया था. आजम खान को 131,225 मिले थे. दूसरे नंबर पर रहे आकाश सक्सेना को 76,084 वोट मिले थे. तीसरे नंबर पर बसपा के सदाकत हुसैन थे. उनको 4,940 वोट मिले थे. रामपुर (सदर) में हुए उपचुनाव में भाजपा के आकाश सक्सेना ने सपा के मो. असिम राजा को 34,136 वोटों से हराया. आकाश सक्सेना को 81,432 वोट मिले जबकि सपा के असिम राजा को 47,296 वोट मिले थे. उपचुनाव में भाजपा ने सपा से यह सीट छीन ली थी.

स्वार: रामपुर जिले की यह सीट भी हाई प्रोफाइल है. इस विधानसभा सीट को मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है. यहां मुस्लिम मतदाताओं की आबादी लगभग 60 प्रतिशत से अधिक है. इसके अलाना सैनी (ओबीसी) दूसरी सबसे बड़ी आबादी है. इस सीट पर दलित, सिख, लोधी, जाट और क्षत्रिय मतदाता भी इस सीट पर जीत-हार तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं. यह सीट भी आजम खान के परिवार का गढ़ बनी थी. आजम खान के बेटे मोहम्मद अब्दुल्ला ने यहां से लगातार दो बार (2017, 2022) में चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे.

अब्दुल्ला आजम को सजा होने के बाद उनकी सदस्यता रद्द हो गई. 2023 में स्वार सीट पर उपचुनाव हुआ, जिसके बाद यहां का समीकरण बदल गया. यह सीट एनडीए के पास आ गई. उपचुनाव में स्वार से अपना दल (सोनेलाल) के प्रत्याशी शफीक अहमद अंसारी ने सपा की अनुराधा चौहान को 8,724 वोटों से हराकर जीत दर्ज की. एनडीए उम्मीदवार शफीक अहमद अंसारी को 68,630 वोट मिले, जबकि सपा की अनुराधा चौहान को 59,906 वोट मिले थे. इस सीट पर तीसरे नंबर पर पीस पार्टी की नाजिया सिद्दिकी थीं. उनको 4,688 वोट मिले थे.

चमरौआ: इस सीट पर Samajwadi Party (सपा) का कब्जा है. 2017 और 2022 के चुनाव में सपा के प्रत्याशी लगातार इस सीट से जीत रहे हैं. पिछली बार (2022) के चुनाव में सपा के नसीर अहमद खान ने भाजपा के मोहन कुमार लोधी को 34,290 वोटों से हराया था. नसीर अहमद खान को 100,976 वोट मिले थे. वहीं, मोहन कुमार लोधी को 66,686 वोट मिले थे. तीसरे नंबर पर कांग्रेस के अली यूसूफ अली थे. उनको 18,213 वोट मिले थे.

बिलासपुर: पिछली बार (2022) इस सीट पर दिलचस्प मुकाबले में भाजपा ने बाजी मारी थी. यहां से भाजपा के बलदेव सिंह औलख ने जीत दर्ज की थी. बलदेव औलख ने सपा के अमरजीत सिंह को सिर्फ 307 वोटों से हराया था. बलदेव सिंह औलख को 101,998 वोट मिले थे, वहीं सपा के अमरजीत सिंह को 1,01,691 वोट मिले थे. इस सीट पर तीसरे नंबर पर बसपा के राम अवतार कश्यप थे. उनको 18,870 वोट मिले थे.

बिलासपुर का चुनावी ताना-बाना बेहद दिलचस्प है. यहां किसी एक जाति का वर्चस्व नहीं है. सबसे अधिक लगभग 30-31 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं. इसके अलावा 15-20 प्रतिशत सिख मतदाताओं की आबादी है. बाकी आबादी में अनुसूचित जाति, मौर्य, सैनी, कश्यप, यादव और सवर्ण (ब्राह्मण, ठाकुर, बनिया) मतदाताओं की है.

मिलक (सुरक्षित): इस सीट पर भाजपा का कब्जा है. पिछली चुनाव (2022) में भाजपा की महिला प्रत्याशी राजबाला सिंह ने सपा के विजय सिंह को 5,912 वोटों से हराया था. भाजपा की राजबाला सिंह को 97,948 वोट मिले थे, जबकि सपा के विजय सिंह को 92,036 वोट मिले थे. इस सीट पर तीसरे नंबर पर बसपा के सुरेंद्र सिंह सागर थे. उनको 31,492 वोट मिले थे. मिलक (सुरक्षित) सीट पर दलित मतदाता, खासकर जाटव निर्णायक भूमिका में होते हैं. यहां मुस्लिम मतदाताओं की भी आबादी अच्छी खासी है. इसके अलावा सैनी (ओबीसी) जैसी पिछड़ी जातियां भी वोट बैंक के लिहाज से मजबूत स्थिति में हैं. इसके अलावा क्षत्रिय और ब्रह्मण मतदाताओं की भी संख्या अच्छी-खासी है, जो चुनाव की दिशा तय करते हैं.

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एसडी/पीएम

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