म्यांमार में कथित आतंकी ट्रेनिंग का मामला: 6 यूक्रेनी नागरिकों को कोर्ट से जमानत

New Delhi, 23 सितंबर . दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने Wednesday को म्यांमार में सशस्त्र समूहों को कथित तौर पर हथियार और ड्रोन से जुड़ी ट्रेनिंग देने के मामले में गिरफ्तार छह यूक्रेनी नागरिकों को डिफॉल्ट बेल दे दी. प्रत्येक आरोपी को एक लाख रुपए का कैश बॉन्ड भरने का निर्देश दिया गया है. विशेष एनआईए जज प्रशांत शर्मा ने यह आदेश पारित किया.

छह यूक्रेनी नागरिकों की पहचान पेट्रो हुरबा, तारास स्लिवियाक, इवान सुकमानोवस्की, मारियन स्टेफांकिव, मक्सिम होंचरुक और विक्टर कामिंस्की के रूप में हुई है. इन्हें अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक के साथ मार्च 2026 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गिरफ्तार किया था.

कोर्ट ने छह यूक्रेनी नागरिकों को इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट से जुड़े अपराधों से भी मुक्त कर दिया है. यह कार्रवाई फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (एफआरआरओ) के समक्ष अपराधों के कंपाउंड होने के आधार पर की गई. एफआरआरओ ने प्रत्येक आरोपी पर 5.5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है.

कोर्ट ने इसी मामले में गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक की जमानत की शर्तों में भी बदलाव किया है. वैनडाइक को अब एक लाख रुपए का श्योरिटी बॉन्ड जमा करने से छूट दी गई है और उसे एक लाख रुपए का कैश बॉन्ड भरने पर रिहा किया जाएगा.

वैनडाइक ने अपने परिवार से मिलने के लिए अमेरिका जाने की अनुमति मांगते हुए भी कोर्ट में आवेदन दाखिल किया है. इस आवेदन पर 25 सितंबर को सुनवाई होगी. कोर्ट को एफआरआरओ की ओर से सीलबंद लिफाफे में एक रिपोर्ट भी मिली है.

इससे पहले 18 सितंबर को राउज एवेन्यू कोर्ट की विशेष एनआईए अदालत ने वैनडाइक को डिफॉल्ट बेल दी थी. उस समय कोर्ट ने एक लाख रुपए के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की एक जमानत यानी श्योरिटी की शर्त रखी थी. कोर्ट ने उसे दिल्ली में रहने और जांच अधिकारी के बुलाने पर जांच के लिए उपलब्ध रहने का निर्देश भी दिया था.

वैनडाइक ने जांच पूरी करने और निर्धारित समय में चार्जशीट दाखिल करने में देरी के आधार पर डिफॉल्ट बेल मांगी थी. 18 सितंबर के आदेश में कोर्ट ने यह भी कहा था कि इसी मामले में गिरफ्तार छह यूक्रेनी नागरिक अगर उचित जमानत आवेदन दाखिल करते हैं तो वे भी इसी आधार पर डिफॉल्ट बेल पाने के हकदार होंगे.

एनआईए ने इन सातों विदेशी नागरिकों को मार्च 2026 में गिरफ्तार किया था. जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि ये लोग म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों को हथियार और ड्रोन ऑपरेशन से संबंधित ट्रेनिंग देने से जुड़े थे. एजेंसी के मुताबिक, आरोपी India में टूरिस्ट वीजा पर आए थे और पूर्वोत्तर की ओर गए थे. उन पर मिजोरम से अवैध रूप से म्यांमार में प्रवेश करने का भी आरोप लगाया गया था.

एनआईए ने यह भी आरोप लगाया था कि म्यांमार में हथियारों और ड्रोन युद्ध से जुड़ी ट्रेनिंग दी गई तथा इसके लिए यूरोप से ड्रोन लाए गए थे. मामले में शुरुआत में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए थे. हालांकि, एनआईए की ओर से बाद में दाखिल चार्जशीट में यूएपीए की धाराएं नहीं लगाई गईं. आरोपियों के खिलाफ इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट से संबंधित धाराएं लगाई गईं. एजेंसी ने कहा कि कथित आतंकी गतिविधियों से जुड़े पहलू की जांच अभी जारी है और आगे सबूत मिलने पर पूरक चार्जशीट दाखिल की जा सकती है.

एएमटी/डीकेपी

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