मैसूर दशहरा विवाद: शाही परिवार बोला- सरकार को केवल सुझाव दिए थे, आदेश नहीं

मैसूर, 4 नवंबर . मैसूर दशहरा समारोह के आयोजन को लेकर जारी विवाद के बीच पूर्व मैसूर शाही परिवार की सदस्य प्रमोदा देवी वाडियार ने Wednesday को कहा कि राज्य Government को भेजे गए उनके पत्र में केवल सुझाव दिए गए थे, कोई निर्देश नहीं. वहीं, Chief Minister डीके शिवकुमार ने कहा कि वह उनकी चिंताओं पर गौर करेंगे और उनसे बात भी करेंगे.
मैसूर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रमोदा देवी ने कहा कि उनके सुझावों का उद्देश्य आने वाले वर्षों में दशहरा उत्सव का आयोजन सुचारु और बिना किसी परेशानी के कराना है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इन सुझावों को मानना या न मानना पूरी तरह Government पर निर्भर है और उन्होंने Government को कोई आदेश नहीं दिया था.
उन्होंने यह भी साफ किया कि शाही परिवार ने किसी भी तरह से कर्नाटक Government को दोषी नहीं ठहराया है. उनकी आपत्ति विशेष रूप से दशहरा समारोह के दौरान Police की मौजूदगी और उसके व्यवहार को लेकर थी.
दशहरा उत्सव के मुख्य आकर्षण स्वर्ण हौदा (गोल्डन हाउदाह) के मुद्दे पर प्रमोदा देवी ने दोहराया कि यह शाही परिवार की निजी संपत्ति है. उन्होंने कहा कि न तो स्वर्ण हौदा और न ही शाही सिंहासन किसी Governmentी कानून के दायरे में आते हैं. ये पहले भी शाही परिवार के थे और आगे भी उसी के रहेंगे.
Government द्वारा स्वर्ण हौदा के उपयोग के बदले किए जाने वाले भुगतान पर उन्होंने कहा कि इसे रॉयल्टी नहीं कहा जाना चाहिए. उन्होंने बताया कि दशहरा जुलूस में स्वर्ण हौदा के उपयोग के लिए Government पहले शाही परिवार से अनुमति मांगती है और उसी संदर्भ में भुगतान किया जाता है.
उन्होंने यह भी कहा कि दशहरा जुलूस में स्वर्ण हौदा को ले जाने वाले हाथी के चयन में महल प्रशासन को विश्वास में लिया जाना चाहिए.
प्रमोदा देवी ने कहा, “यह केवल शाही परिवार के अधिकारों का मामला नहीं है, बल्कि हाथी और लाखों लोगों की सुरक्षा का भी सवाल है. महावत या हाथी की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए.”
उन्होंने पूर्व की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि जुलूस के लिए हाथी को अंतिम रूप देने से पहले महल से सलाह-मशविरा किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि चयनित हाथी की जानकारी महल को देना अधिकारियों की जिम्मेदारी है.
इस बीच, Chief Minister डीके शिवकुमार ने प्रमोदा देवी की नाराजगी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस मसले की पूरी जानकारी नहीं है.
उन्होंने कहा, “कर्नाटक का शाही परिवार हमारे लिए अत्यंत सम्मानित है. मैं केवल मीडिया में आई बातों के आधार पर प्रतिक्रिया नहीं दे सकता. मैं पूरे मामले को देखूंगा और उनसे बात करूंगा.”
इससे पहले प्रमोदा देवी वाडियार ने प्रेस बयान और पत्र जारी कर मैसूर दशहरा 2026 के आयोजन पर गंभीर आपत्ति जताई थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि विभिन्न Governmentी विभागों और Police के बीच समन्वय की कमी रही और कई महत्वपूर्ण जानकारियां शाही परिवार को समय पर नहीं दी गईं.
उन्होंने बताया था कि किस हाथी को स्वर्ण हौदा उठाने के लिए चुना गया है, यह जानने के लिए भी उन्हें कार्यक्रम से पांच दिन पहले वन विभाग के अधिकारियों से संपर्क करना पड़ा.
प्रमोदा देवी ने कुछ द्वारों पर Policeकर्मियों के कथित रूखे और अहंकारी व्यवहार तथा समारोह के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों पर भी आपत्ति जताई थी.
वहीं, मंत्री यतींद्र सिद्दारमैया ने कहा था कि मैसूर महल और उसका प्रशासन राज्य Government के अधिकार क्षेत्र में आते हैं तथा शाही परिवार को सम्मान के तौर पर आवासीय सुविधा उपलब्ध कराई गई है.
उन्होंने यह भी कहा कि Government अंबारी (स्वर्ण हौदा) का उपयोग मुफ्त में नहीं करती और इसके लिए सभी आधिकारिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है.
जब भाजपा नेताओं, विशेषकर बीवाई विजयेंद्र, ने यतींद्र सिद्धारमैया से माफी मांगने की मांग की, तो उन्होंने माफी से इनकार कर दिया. उनका कहना था कि मैसूर महल और उससे जुड़ी जमीनें राज्य Government की संपत्ति हैं और उनकी टिप्पणी प्रमोदा देवी वाडियार के सार्वजनिक बयान के जवाब में की गई थी.
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एएमटी/डीकेपी


