मुसलमान अब अवसरवाद की राजनीति समझ चुका है, साजिद रशीदी ने सोनिया गांधी और अखिलेश पर साधा निशाना

New Delhi, 7 नवंबर . अयोध्या में राम मंदिर जाने के Samajwadi Party प्रमुख अखिलेश यादव के प्रस्तावित दौरे पर ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के प्रमुख मौलाना साजिद रशीदी ने जोरदार हमला बोला है. उन्होंने कहा कि 2027 का विधानसभा चुनाव नजदीक है, इसलिए उन्हें राम याद आ रहे हैं, असल में ये लोग नकली हिंदू हैं.
New Delhi में से बातचीत में मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि अखिलेश यादव का मीडिया और social media पर एक बयान चल रहा है, जिसमें वे कहते हैं कि वे किसी देवी-देवता को नहीं मानते. इतने वर्षों तक आप राम मंदिर नहीं गए और अब 2027 के चुनाव करीब आ रहे हैं तो आप राम मंदिर जा रहे हैं. आपकी पार्टी ने हाल ही में एक नारा दिया था कि ‘हम भगवान कृष्ण को लाएंगे.’ अगर आप भगवान कृष्ण को लाने वाले हैं तो फिर आप भगवान राम के पास क्यों जा रहे हैं? सबसे बड़ा सवाल यह है कि आप उन देवी-देवताओं को ‘लाने’ की बात कैसे कर सकते हैं, जिन्हें हम भगवान मानकर पूजते हैं? कितनी ओछी हरकत है और कितनी घटिया बात है. ये सब नकली हिंदू हैं, बस दिखावे के लिए हिंदू हैं. असल में, अखिलेश यादव नास्तिक हैं, वे किसी भी देवी-देवता को नहीं मानते.
मौलाना ने कहा कि मुलायम सिंह यादव के एक बयान को याद रखना चाहिए जो पिता का न हुआ वह किसी का नहीं हो सकता है.
अखिलेश यादव को लेकर भाजपा चीफ नितिन नवीन के बयान पर मौलाना ने कहा कि अखिलेश यादव अवसरवादी नेता हैं. समाजवादी जानबूझकर बने हुए हैं. यह सिर्फ अपने फायदे के लिए अपनी बात करते हैं. लाल टोपी भी पहन लेते हैं, यह सब अवसरवाद है, 2027 का चुनाव नजदीक है, इसीलिए वे सभी काम करेंगे, आजम खान से भी जेल में मिलकर आए थे. सपा के लोग तो आजम खान को गृहमंत्री बनाने की बात करने लगते हैं, मुसलमान अब समझ गया है और अखिलेश यादव का अवसरवाद 2027 के विधानसभा चुनाव में उन्हें ले डूबेगा.
बाबरी मस्जिद को गिराए जाने का दृश्य देखकर रोने के बारे में सीपीपी अध्यक्ष सोनिया गांधी की टिप्पणी पर मौलाना साजिद रशीदी ने तंज कसा.
उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी के ये मगरमच्छ के आंसू हैं क्योंकि केंद्र में Government उन्हीं की थी, अगर वे चाहते तो इसे बचा सकते थे. इसके बाद भी 2014 तक कांग्रेस Government सत्ता में रही. कांग्रेस ने न तो इसे बचाने की कोई कोशिश की और न ही इसे फिर से बनाने का प्रयास किया. इसके अलावा जैसा कि Supreme Court ने भी कहा था कि इस साजिश में शामिल लोगों को सजा मिलनी चाहिए, लेकिन कांग्रेस Government ने उन्हें सजा दिलाने के लिए कुछ नहीं किया. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आपकी Government सत्ता में थी और बाबरी मस्जिद को गिराया गया, तो आपको सिर्फ आंसू नहीं बहाने चाहिए थे, बल्कि आपको इसे फिर से बनवाना चाहिए था. मुसलमानों ने कांग्रेस को इसलिए ठुकरा दिया क्योंकि उन्होंने अपनी आंखों के सामने बाबरी मस्जिद को गिरते हुए देखा और कोई कदम नहीं उठाया. अगर कांग्रेस अपने गुनाहों का प्रायश्चित करना चाहती है और मुसलमानों को फिर से अपने साथ लाना चाहती है, तो अभी एक मौका है. इसका एकमात्र तरीका यह है कि वे बाबरी मस्जिद को फिर से बनवाने का वादा करें, सत्ता में आने पर इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दें और उत्तर प्रदेश में किसी मुस्लिम को Chief Minister बनाने की बात करें, तभी शायद मुसलमान उन्हें माफ कर दें.
उन्होंने कहा कि यह संवैधानिक हो सकता था, क्योंकि जब 2019 में Supreme Court ने कहा कि साजिश में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए तो 2014 तक आपकी Government सत्ता में थी और आप उन्हें संवैधानिक तरीके से सजा दे सकते थे. आप उस मस्जिद का संवैधानिक तरीके से पुनर्निर्माण भी करवा सकते थे. यह असंवैधानिक नहीं था, असंवैधानिक तो वह तरीका था जिससे बाबरी मस्जिद को गिराया गया था. चूंकि Supreme Court ने कहा है कि 1992 में बाबरी मस्जिद को गैर-कानूनी तरीके से गिराया गया था, इसलिए आप कानूनी तौर पर इसका पुनर्निर्माण करवा सकते थे. यह आपके लिए एक सुनहरा मौका था. अब तो यह उस मशहूर कहावत जैसा है, सांप के निकल जाने के बाद जमीन पीटने का कोई फायदा नहीं. अब ऐसे बयान देकर, आप जानबूझकर उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोटों का फायदा उठाना चाहते हैं लेकिन मुसलमानों के लिए यह इतना गहरा जख्म था कि वे इसे कभी नहीं भूल पाएंगे.
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डीकेएम/वीसी


