
New Delhi, 5 सितंबर . राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के राज्यसभा सदस्य मनोज कुमार झा ने देश में धार्मिक तनाव, कानून-व्यवस्था, शिक्षा और Political माहौल को लेकर केंद्र Government और भाजपा पर तीखे सवाल दागे हैं. अलग-अलग मुद्दों पर प्रतिक्रिया देते हुए मनोज कुमार झा ने कहा कि देश में ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, जिसमें लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों के लिए जगह लगातार कम होती जा रही है.
सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने के मुद्दे पर सांसद मनोज कुमार झा ने से बात करते हुए कहा कि वह इस बात से परेशान हैं कि देश को किस दिशा में ले जाया जा रहा है.
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के विदेश दौरे में दिए गए सकारात्मक संदेशों का जिक्र करते हुए सवाल किया कि क्या India लौटने के बाद वही भाषा और भावना कायम रहती है.
मनोज कुमार झा ने Pakistan में मंदिर में तोड़फोड़ की घटना पर India की ओर से जताई गई चिंता का उल्लेख करते हुए कहा कि दक्षिण एशिया में धार्मिक स्थलों पर हमले की घटनाएं चिंता का विषय हैं. झा ने कहा कि India क्षेत्र का सबसे बड़ा देश है और उसे उदाहरण पेश करना चाहिए. उन्होंने मौजूदा माहौल को ‘‘बर्बादी का नुस्खा’’ बताते हुए कहा कि देश को सांस लेने का मौका दिया जाना चाहिए.
दिल्ली में एक्टिविस्ट स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े मामले पर मनोज कुमार झा ने Police की कार्रवाई में देरी पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि इसे केवल आरोप नहीं कहा जाना चाहिए और दावा किया कि वीडियो में संबंधित व्यक्ति ने खुद बात स्वीकार की थी. इसके बावजूद Police को कार्रवाई करने में कई घंटे लगे. उन्होंने इसे गणतंत्र की मौजूदा स्थिति से जोड़ते हुए कहा कि यह आम जनता के लिए चिंता का विषय होना चाहिए.
श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के शताब्दी समारोह में Prime Minister Narendra Modi की मौजूदगी पर भी मनोज कुमार झा ने टिप्पणी की. शिक्षक दिवस के संदर्भ में उन्होंने मोदी के 2013 में दिल्ली विश्वविद्यालय में दिए गए भाषण को याद किया और कहा कि उस समय कही गई बातों और आज के बयानों की तुलना Prime Minister को खुद करनी चाहिए.
उन्होंने सवाल पूछने की संस्कृति को लोकतंत्र और शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में इसे कमजोर किया गया है. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और शिक्षाविद पाउलो फ्रेरे का उल्लेख करते हुए शिक्षा में आलोचनात्मक सोच और सवाल करने की भूमिका पर जोर दिया.
हल्द्वानी के ‘शुद्धिकरण’ विवाद में उत्तराखंड भाजपा नेताओं के खिलाफ जीरो First Information Report के मुद्दे पर झा ने ‘मध्ययुगीन बर्बरता’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई और नागरिकों के बीच समानता तथा संवैधानिक मर्यादा की बात कही.
वहीं, पश्चिम बंगाल में आरएसएस से जुड़े 1,000 नए विद्या भारती स्कूल खोले जाने के मुद्दे पर झा ने पाठ्यक्रम और वैचारिक प्रभाव को लेकर सवाल उठाए.
उन्होंने पूछा कि इन स्कूलों में संविधान, महात्मा गांधी और स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को किस तरह पढ़ाया जाएगा. साथ ही उन्होंने आशंका जताई कि कहीं शिक्षा के माध्यम से देश को नाथूराम गोडसे की विचारधारा के अनुरूप परिभाषित करने की कोशिश तो नहीं की जा रही.
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एसएके/वीसी