
जिनेवा, 13 अक्टूबर . इंटरनेशनल कमिटी ऑफ द रेड क्रॉस (आईसीआरसी) की अध्यक्ष मिर्जना स्पोलजारिक ने चेतावनी दी है कि मिडिल ईस्ट इलाके में संघर्ष बढ़नेसे करोड़ों आम लोगों के लिए हालात बहुत बुरे हो जाएंगे.
स्पोलजारिक ने एक बयान जारी कर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं. ये बयान social media प्लेटफॉर्म एक्स पर भी शेयर किया गया. इसमें उन्होंने कहा, “मिडिल ईस्ट में सैन्य अभियान की आम लोगों को बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ रही है. हाल के दिनों में सऊदी अरब में हुई मौतें, घायल होते लोग और जबरदस्त तबाही इस बात का उदाहरण है कि लड़ाई-झगड़े या हमलों से आम लोगों पर कितना बुरा असर पड़ रहा है.”
आईसीआरसी चीफ ने कहा, “यमन के एडेन और सना भी में भी तबाही मची हुई है. लोगों की मौत, विस्थापन और आम लोगों के इस्तेमाल की चीजों (जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर) को नुकसान पहुंचाने का दायरा तेजी से बढ़ रहा है. पूरे मिडिल ईस्ट में बुनियादी ढांचों या फिर रिहायशी इलाकों पर बार-बार हमले हुए हैं और लोगों की जान गई है.”
स्पोलजारिक ने कहा कि आम लोगों और आम लोगों से जुड़ी चीजों पर हमले रोकना जरूरी है. उन्होंने आगे कहा, “लड़ाई में शामिल सभी पक्षों को आम नागरिकों, उनसे जुड़ी चीजों और सैन्य ठिकानों के बीच फर्क करना होगा. बंदरगाहों, हवाई अड्डों और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का गंभीर नतीजा उन समुदायों को भुगतना पड़ेगा जो उन पर आश्रित हैं.”
उनके मुताबिक, “लड़ाई और तेज होने से करोड़ों लोगों के लिए हालात बहुत बुरे हो जाएंगे. तनाव कम करने और आम लोगों को और नुकसान से बचाने के लिए तुरंत कोशिशें की जानी चाहिए.”
मिडिल ईस्ट काफी समय से सैन्य संघर्ष की आग में जल रहा है. वर्तमान अशांति मुख्य रूप से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और क्षेत्रीय संघर्षों के कारण गहरी हुई है. 28 फरवरी 2026 में ईरान पर अमेरिका और इजरायल की संयुक्त अटैक से हालात और बिगड़े. अभी तक टकराव की स्थिति बरकरार है. होर्मुज स्ट्रेट पर भी खतरा मंडरा रहा है. मैरीटाइम बाधित होने से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है.
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केआर/