
गोरखपुर, 12 सितंबर . विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के नेता दयानंद शर्मा, बलिया विधायक हंसू राम और महामंडलेश्वर कनकेश्वरी नंद गिरी ने ‘कन्हैया और नंदी नहीं रहेंगे बंदी’ नारे के तहत आयोजित शोभायात्रा में हिस्सा लिया. शोभायात्रा में वीएचपी कार्यकर्ताओं के साथ महिलाओं और ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों ने भी भाग लिया. इस दौरान लोगों ने अयोध्या के बाद काशी और मथुरा को लेकर धार्मिक आंदोलन आगे बढ़ाने की बात कही.
वीएचपी नेता दयानंद शर्मा ने कहा कि इसे केवल एक शोभायात्रा नहीं, बल्कि अभियान के तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है. जिस तरह राम जन्मभूमि को लेकर आंदोलन हुआ और अयोध्या में मंदिर का निर्माण हुआ, उसी तरह मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर भी अभियान चलाया जाएगा. इस अभियान के माध्यम से उत्तर प्रदेश से लेकर देशभर के लोगों तक यह संदेश पहुंचाने का प्रयास है कि श्रीकृष्ण हिंदू समाज के आराध्य हैं और उनके जन्मस्थान मथुरा में मंदिर निर्माण की मांग को आगे बढ़ाया जाएगा.
उन्होंने उन लोगों की राय का भी जिक्र किया जो श्रीकृष्ण के मथुरा में जन्म लेने के दावे से असहमति जताते हैं. शर्मा ने कहा कि इस विषय पर हिंदू समाज अपनी आस्था और मान्यता के आधार पर आंदोलन को आगे बढ़ाएगा.
महामंडलेश्वर कनकेश्वरी नंद गिरी ने कहा कि शोभायात्रा का मुख्य उद्देश्य मथुरा से जुड़े अभियान को गति देना है. अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो चुका है और इसे वह वर्तमान पीढ़ी के लिए सौभाग्य मानती हैं. अब काशी और मथुरा प्रमुख धार्मिक मुद्दों के रूप में सामने हैं. सनातनी समाज को एकजुट होकर इन मुद्दों को लेकर आगे बढ़ना चाहिए. उन्होंने संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातनी समाज को एकजुट होकर आंदोलन में अपनी भूमिका निभानी होगी. धार्मिक ध्वज और सनातन परंपरा के साथ अभियान को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा.
बलिया विधायक हंसू राम ने बताया कि यह आयोजन महंत अवैद्यनाथ की पुण्यतिथि के अवसर पर किया गया. उन्होंने कहा कि उन्हें इस अवसर पर कार्यक्रम में शामिल होने का मौका मिला और वे इसे गौरव का विषय मानते हैं.
हंसू राम ने कहा कि ‘कन्हैया और नंदी अब नहीं रहेंगे बंदी’ के संदेश के साथ भव्य जुलूस का आयोजन किया गया है. यह आयोजन मथुरा से जुड़े मंदिर आंदोलन की शुरुआत के तौर पर देखा जाना चाहिए. आने वाले समय में मथुरा में भी भव्य मंदिर का निर्माण होगा. इस दिशा में आयोजित कार्यक्रम को आंदोलन के आगाज के रूप में देखा जाना चाहिए.
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पीएसके