भ्रष्टाचार जांच मामले में पंजाब सरकार की याचिका पर 8 अक्टूबर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

चंडीगढ़, 7 अक्टूबर . पंजाब Government और पंजाब एवं Haryana हाई कोर्ट के बीच भ्रष्टाचार जांच मामले को लेकर कानूनी लड़ाई अब Supreme Court पहुंच गई है. इस मामले में Supreme Court Thursday को पंजाब Government की याचिका पर सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ करेगी.

पंजाब Government ने हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को राज्य Government और Chief Minister कार्यालय से जुड़े कुछ लोगों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने तथा दो महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया था.

यह आदेश पंजाब एवं Haryana हाई कोर्ट ने अधिवक्ता निखिल सराफ द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया था.

हाई कोर्ट की खंडपीठ ने सीबीआई को मामले में First Information Report दर्ज कर तत्काल जांच शुरू करने के निर्देश दिए थे. अदालत ने जांच एजेंसी से कहा था कि वह पूरे मामले की जांच कर दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे.

याचिका में आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों के तबादले और तैनाती से लेकर टेंडर, लाइसेंस, मंजूरियां तथा विभिन्न Governmentी पदों पर नियुक्तियों में कथित तौर पर भ्रष्टाचार और अवैध लेनदेन का नेटवर्क सक्रिय था. याचिका में वरिष्ठ प्रशासनिक और Police अधिकारियों के तबादलों को प्रभावित करने के आरोप भी लगाए गए हैं.

हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सीबीआई जांच का आदेश दिया था.

वहीं, पंजाब Government ने इस आदेश का विरोध करते हुए Supreme Court का रुख किया है. राज्य Government का कहना है कि नवंबर 2020 में तत्कालीन कांग्रेस Government ने पंजाब में सीबीआई को दी गई सामान्य सहमति (जनरल कंसेंट) वापस ले ली थी. इसी आधार पर Government हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दे रही है.

इससे पहले पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भी कहा था कि राज्य Government हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील करेगी.

Supreme Court में होने वाली सुनवाई पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इससे यह तय होगा कि हाई कोर्ट द्वारा निर्देशित सीबीआई जांच आगे बढ़ेगी या नहीं. मामले का Political और कानूनी महत्व देखते हुए इस सुनवाई को बेहद अहम माना जा रहा है.

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एएमटी/एमएस

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