भारत-घाना ग्लोबल साउथ की पुरानी आवाज, साथ करेंगे काम : जयशंकर

नई द‍िल्‍ली, 8 अक्टूबर . घाना यात्रा के दौरान व‍िदेश मंत्री सैमुअल ओकुडजेटो अबलाकवा के साथ बैठक के बाद विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि India और घाना ग्लोबल साउथ की पुरानी आवाज रहे हैं और दोनों देशों की चुनौतियां और पहल एक जैसी हैं, इसलिए कृषि, फार्मा, डिजिटल और रक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा.

वि‍देश मंत्रालय के अनुसार, मीड‍िया से बातचीत के दौरान मंत्री जयशंकर ने अपनी पहली घाना यात्रा पर खुशी जाह‍िर की. उन्‍होंने कहा क‍ि मेरी इस यात्रा का मुख्य मकसद पिछले साल Prime Minister Narendra Modi की ऐतिहासिक घाना यात्रा के बाद दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाना है.

जयशंकर ने कहा क‍ि अब जबकि हमने एक व्यापक साझेदारी कायम कर ली है, तो हमें इसे सही मायने में आगे बढ़ाना होगा. हमें सहयोग के नए क्षेत्र तलाशने होंगे और अपनी पुरानी साझेदारी को और मजबूत करना होगा. आज की हमारी बातचीत मुख्य रूप से इसी पर केंद्रित रही.

उन्‍होंने कहा क‍ि India के नजरिए से देखें तो घाना हमारा पुराना साझेदार रहा है. ‘ग्लोबल साउथ’ जैसे शब्द के इस्तेमाल में आने से पहले भी India और घाना इसकी आवाज रहे हैं. मुश्किल हालात में भी दोनों देशों ने उन देशों की आजादी, आत्मनिर्भरता और सम्मान का समर्थन किया, जो पहले उपनिवेश रहे थे. मेरा मानना है कि हमारी साझी विरासत आज भी हमारे रिश्तों को मजबूत आधार देती है.

जयशंकर ने कहा क‍ि आज की बातचीत में हमारा मुख्य फोकस द्विपक्षीय रिश्तों को अगले स्तर पर ले जाने पर था. मैंने मंत्री के साथ बातचीत और President से मुलाकात के दौरान भी कहा कि घाना में आज कई ऐसे कार्यक्रम और पहल चल रही हैं, जो India में चल रहे कार्यक्रमों से काफी मिलती-जुलती हैं. इसकी वजह यह है कि विकासशील देशों की चुनौतियां अक्सर एक जैसी होती हैं.

उदाहरण के तौर पर, घाना में स्वास्थ्य से जुड़ा अकरा रीसेट कार्यक्रम है जबकि India में आयुष्मान India जैसी पहल है. घाना में खाद्य सुरक्षा पर फोकस करने वाला फीड घाना कार्यक्रम है जबकि India में किसानों की खुशहाली और मोटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए कई कार्यक्रम चल रहे हैं.

उन्‍होंने कहा क‍ि इसी तरह घाना ने दस लाख कोडर्स तैयार करने का लक्ष्य रखा है और India में डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसे कार्यक्रम चल रहे हैं. बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भी दोनों देश प्रोजेक्ट्स की रफ्तार बढ़ाने पर काम कर रहे हैं.

जयशंकर ने कहा क‍ि इन समानताओं को देखते हुए ग्लोबल साउथ के देशों के तौर पर हमारे लिए अपने अनुभव साझा करना और यह देखना स्वाभाविक है कि हम एक-दूसरे की किस तरह मदद कर सकते हैं. मंत्री ने जिन कई उदाहरणों का जिक्र किया, वे भी इसी बातचीत से सामने आए.

उन्‍होंने कहा क‍ि आज हमने कृषि अनुसंधान और प्रशिक्षण तथा जैव विविधता को लेकर दो समझौतों पर हस्ताक्षर किए. इसके अलावा हम फार्मा और स्वास्थ्य, खनन, रक्षा, रेलवे और डिजिटल क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर काम कर रहे हैं.

व‍िदेश मंत्री ने कहा क‍ि मुझे यह देखकर भी खुशी है कि भारतीय कंपनियां घाना में काफी सक्रिय हैं. यहां लंबे समय से एक मजबूत और सक्रिय भारतीय समुदाय मौजूद है. इस समुदाय से जुड़े कारोबारी दोनों देशों के बीच एक मजबूत पुल की तरह काम कर रहे हैं. हाल के महीनों में फार्मा और मेडिकल सेक्टर, पोल्ट्री सेक्टर और रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में बड़े निवेश की घोषणाएं हुई हैं.

उन्‍होंने कहा क‍ि हमारा मानना है कि India और घाना की साझेदारी दोनों देशों को मुश्किल हालात का सामना करने के लिए ज्यादा मजबूत बनाने, सभी को विकास में साथ लेकर चलने और यह सुनिश्चित करने में मदद करेगी कि आर्थिक तरक्की का फायदा आम लोगों तक पहुंचे. आज की दुनिया काफी उथल-पुथल और मुश्किल दौर से गुजर रही है, इसलिए यह साझेदारी और भी अहम हो जाती है.

जयशंकर ने कहा क‍ि हमारे रिश्तों का दूसरा अहम पहलू अफ्रीकी महाद्वीप से जुड़ा है. India अफ्रीकी संघ में घाना की ऐतिहासिक भूमिका को काफी महत्व देता है. घाना अगले साल अफ्रीकी संघ की अध्यक्षता संभालने वाला है. इसके अलावा ईसीओडब्‍ल्‍यूएएस में भी घाना की अहम भूमिका रही है.

व‍िदेश मंत्री ने कहा क‍ि India के अफ्रीकी संघ और ईसीओडब्‍ल्‍यूएएस दोनों के साथ लंबे समय से गहरे संबंध हैं. मेरा मानना है कि इन संगठनों में घाना की भूमिका को India में काफी सम्मान और अहमियत के साथ देखा जाता है. हम कॉमनवेल्थ के सदस्य भी हैं. जब कुछ हफ़्तों बाद कॉमनवेल्थ की बैठक होगी, तो हम दोनों वहां मौजूद रहेंगे. कॉमनवेल्थ में ऐसे कई मुद्दे हैं जिन पर हम दोनों मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं.

उन्‍होंने कहा क‍ि अगर हम आज की दुनिया को देखें, तो मुझे लगता है कि दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था और अपनी स्वाभाविक विविधता की ओर बढ़ रही है. India और घाना जैसे देशों ने अपने इतिहास में कई मुश्किल दौर देखे हैं. इसलिए हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपनी स्वतंत्र सोच की आवाज बनें और रणनीतिक स्वायत्तता का समर्थन करें.

उन्होंने कहा क‍ि हमें ऐसे देशों के रूप में मिलकर काम करना चाहिए, जो अपने फैसले खुद लेना चाहते हैं. मेरा मानना है कि ऐसा करना दोनों देशों के लिए अच्छा है, क्षेत्र के लिए भी अच्छा है और पूरी दुनिया के हित में भी है. अंत में मैं यही कहना चाहता हूं कि मैं इस बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हूं और उम्मीद करता हूं कि जल्द ही मुझे आपका स्वागत करने का मौका मिलेगा.

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एवाई/पीएम

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