
New Delhi, 30 अगस्त . India की रियल जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 27 में 7-7.2 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद है. इसे मजबूत घरेलू खपत और Government के पूंजीगत खर्च से समर्थन मिलेगा. यह जानकारी ईवाई की रिपोर्ट में दी गई.
इस दौरान India की नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 12.5-13 प्रतिशत के बीच रह सकती है.
रिपोर्ट में कहा गया कि भू-Political अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और कमजोर ग्लोबल ट्रेड माहौल के बावजूद India के विकास का आउटलुक काफी मजबूत बना हुआ है. उम्मीद है कि मजबूत घरेलू आर्थिक गतिविधियों और लगातार Governmentी खर्च से साल भर ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा.
ईवाई के अनुसार, India में औद्योगिक गतिविधियों में भी मजबूती के संकेत दिखे हैं. जून 2026 में इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (आईआईपी) में ग्रोथ बढ़कर 7.3 प्रतिशत हो गई, जो 23 महीनों में सबसे ज्यादा है. नतीजतन, वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में औसत औद्योगिक वृद्धि बढ़कर 5.7 प्रतिशत हो गई, जो पिछले आठ तिमाही में सबसे ज्यादा है.
इस सुधार में मैन्युफैक्चरिंग का अहम योगदान रहा, जून में इसका आउटपुट 7.8 प्रतिशत बढ़ा. इसमें इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट, मोटर वाहन, टेक्सटाइल और खाद्य उत्पाद भी बेहतर प्रदर्शन करने वाले सेक्टर में शामिल थे.
हालांकि, कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर बताते हैं कि विस्तार की रफ्तार धीमी हो सकती है. मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई जून के 54.2 से घटकर जुलाई में 53.5 हो गया, जबकि सर्विसेज पीएमआई 57.4 से तेजी से गिरकर 53.3 पर आ गया. इस सुस्ती के बावजूद, दोनों इंडेक्स 50 के निशान से ऊपर बने रहे, जिससे पता चलता है कि आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं.
क्रेडिट की स्थिति भी मददगार बनी रही. ईवाई ने बताया कि जून में ग्रॉस बैंक क्रेडिट ग्रोथ बढ़कर 18.6 प्रतिशत हो गई, जो 25 महीनों में सबसे अधिक है. इससे पता चलता है कि बिजनेस और अर्थव्यवस्था के अन्य सेक्टर के लिए फाइनेंसिंग की सुविधा बनी हुई है.
Government का पूंजीगत खर्च बढ़ाने पर जोर भी ग्रोथ के नजरिए को सपोर्ट करने वाला एक अहम फैक्टर है. वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में 23.3 प्रतिशत की गिरावट के बाद, वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में Governmentी पूंजीगत खर्च में तेजी से सुधार हुआ और यह 23.7 प्रतिशत हो गया.
साथ ही, राजकोषीय घाटा सालाना बजट लक्ष्य के 18.2 प्रतिशत पर ही बना रहा. ईवाई का कहना है कि कैपिटल एक्सपेंडिचर में आई नई तेजी से घरेलू मांग को बनाए रखने और रियल जीडीपी ग्रोथ की संभावनाओं को मजबूत करने में मदद मिलनी चाहिए.
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एबीएस